गुजरात सरकार ने दो IAS अधिकारियों K. Rajesh और Gaurav Dahiya को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया है। दोनों अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड और उनके खिलाफ चल रही जांच एवं अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया।

गांधीनगर: गुजरात सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए गुजरात कैडर के दो IAS अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया है। इनमें 2011 बैच के K. Rajesh और 2010 बैच के Gaurav Dahiya शामिल हैं। दोनों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी मानी गई है।

यह कार्रवाई अधिकारियों के लंबे सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, समीक्षा में अधिकारियों की सेवा अवधि के दौरान सामने आए अनुशासनात्मक मामलों, ईमानदारी से जुड़े मुद्दों और अन्य गंभीर मामलों को ध्यान में रखा गया। यह प्रक्रिया नए All India Services Pension Rules के तहत की गई समीक्षा से जुड़ी बताई जा रही है।

K. Rajesh पर भ्रष्टाचार से जुड़े मामले

K. Rajesh गुजरात कैडर के 2011 बैच के IAS अधिकारी हैं। वह अप्रैल 2018 से जून 2021 तक सुरेंद्रनगर के कलेक्टर रहे थे। इसके बाद 2022 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

राजेश के खिलाफ CBI ने कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में कार्रवाई की थी। आरोपों में हथियार लाइसेंस जारी करने, सरकारी जमीन के आवंटन और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को नियमित करने से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले शामिल थे। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी कार्रवाई की।

राजेश लंबे समय से निलंबन में थे। अब सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद उन्हें अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करने का फैसला लिया गया है।

Gaurav Dahiya भी कार्रवाई के दायरे में

Gaurav Dahiya 2010 बैच के IAS अधिकारी हैं और अनिवार्य सेवानिवृत्ति से पहले गांधीनगर में Additional Development Commissioner के पद पर कार्यरत थे।

दहिया को 2019 में विभिन्न आरोपों और विभागीय जांच के बाद निलंबित किया गया था। बाद में जुलाई 2023 में उन्हें सेवा में बहाल किया गया और इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं।

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, दहिया के मामले में भी उनके सेवा रिकॉर्ड, अनुशासनात्मक कार्यवाही और पूर्व में हुई जांचों को समीक्षा में शामिल किया गया।

क्या है ‘ऑपरेशन गंगाजल’?

गुजरात सरकार की इस कार्रवाई को विभिन्न रिपोर्टों में ‘ऑपरेशन गंगाजल’ से जोड़ा गया है। इस अभियान के तहत ऐसे सरकारी अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार, अनुशासनात्मक कार्रवाई या गंभीर कदाचार से जुड़े मामले रहे हैं।

दोनों अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति ऐसे समय हुई है जब केंद्र और राज्य स्तर पर लंबे सेवा रिकॉर्ड वाले अधिकारियों की समीक्षा और जवाबदेही पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, दोनों अधिकारियों के खिलाफ रहे मामले अलग-अलग प्रकृति के हैं और अनिवार्य सेवानिवृत्ति का फैसला सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा के आधार पर लिया गया है।

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By EDITOR

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