भोपाल/पन्ना, 1 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में विस्थापन और मुआवजे को लेकर चल रहा ‘चिता आंदोलन’ एक बार फिर चर्चा में है। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित ग्रामीण और आदिवासी परिवार अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। गुरुवार को आंदोलन 20वें दिन भी जारी रहा।

इस आंदोलन की सबसे अलग और परेशान करने वाली तस्वीरें तब सामने आईं, जब प्रदर्शनकारियों ने अपनी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर और पानी के बीच खड़े होकर विरोध किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि परियोजनाओं के कारण उनके घर और जमीन प्रभावित हुए हैं, लेकिन उन्हें मुआवजा और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

क्यों शुरू हुआ ‘चिता आंदोलन’?

‘चिता आंदोलन’ मुख्य रूप से केन-बेतवा लिंक परियोजना और इससे जुड़े अन्य प्रोजेक्टों से प्रभावित परिवारों की मांगों से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विस्थापन के बाद उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिल पाया है।

प्रदर्शन का तरीका भी अपने आप में एक संदेश है। ग्रामीण प्रतीकात्मक चिताओं पर बैठकर या लेटकर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके लिए घर और जमीन छिनने की स्थिति किसी अंतिम संकट से कम नहीं है।

सितंबर में भी पन्ना जिले में प्रभावित परिवारों ने इसी तरह प्रतीकात्मक चिताओं पर प्रदर्शन किया था। उस दौरान महिलाओं और आदिवासी परिवारों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखने को मिली थी।

बारिश और जलभराव के बीच भी प्रदर्शन जारी

ताजा प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों को बारिश और जलभराव जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन जारी रखा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज की घटनाओं का भी आंदोलनकारियों ने उल्लेख किया है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखते आए हैं, लेकिन समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

केन-बेतवा परियोजना को लेकर क्या है विवाद?

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना और बिजली उत्पादन करना है। परियोजना को देश की प्रमुख नदी जोड़ो योजनाओं में गिना जाता है।

हालांकि, परियोजना के कारण होने वाले विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। परियोजना से जुड़े क्षेत्रों में कई गांवों के प्रभावित होने और परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है।

ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और विस्थापन से जुड़ी समस्याओं का समाधान शामिल है।

ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन प्रभावित परिवारों की स्थिति का गंभीरता से आकलन करे और जिन लोगों के घर या जमीन परियोजना से प्रभावित हुए हैं, उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार राहत और पुनर्वास का लाभ मिले।

पहले भी सामने आई थीं ऐसी तस्वीरें

‘चिता आंदोलन’ की तस्वीरें सितंबर 2026 में भी सामने आई थीं। पन्ना में केन-बेतवा, मझगवां और रुनझ परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों ने प्रतीकात्मक चिताओं पर बैठकर अपना विरोध दर्ज कराया था। इन प्रदर्शनों में महिलाएं और आदिवासी परिवार भी शामिल रहे।

इन तस्वीरों ने विस्थापन, मुआवजे और पुनर्वास के मुद्दे को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में ला दिया।

आंदोलन के आगे क्या?

फिलहाल प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं। आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत और मांगों के समाधान को लेकर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

‘चिता आंदोलन’ ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि बड़े विकास और नदी जोड़ो प्रोजेक्टों के साथ प्रभावित परिवारों के मुआवजे, पुनर्वास और सामाजिक-पर्यावरणीय प्रभावों का समाधान किस तरह किया जाता है।

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By EDITOR

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