चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री C Joseph Vijay की अगुवाई वाली Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) और Pattali Makkal Katchi (PMK) के बीच बढ़ती नजदीकियों ने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। दोनों दलों के बीच बातचीत अब सिर्फ राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं रहने की चर्चा है, बल्कि सरकार और मंत्रिमंडल में PMK की संभावित भूमिका को लेकर भी बातचीत सामने आ रही है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यह है कि PMK अपने मौजूदा राजनीतिक रिश्तों, खासकर BJP के साथ संबंधों, को किस तरह संभालती है। PMK ने 2026 विधानसभा चुनाव AIADMK-BJP गठबंधन के हिस्से के तौर पर लड़ा था। ऐसे में TVK के साथ किसी औपचारिक राजनीतिक समझौते की दिशा में बढ़ना उसके लिए केवल तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन बदलने का मामला नहीं होगा, बल्कि BJP के साथ उसके समीकरण को भी प्रभावित कर सकता है।

PMK और TVK के बीच बातचीत ने पकड़ा जोर

Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, TVK और PMK के बीच बातचीत को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच गंभीर चर्चा चल रही है। इन चर्चाओं में PMK की ओर से Anbumani Ramadoss और TVK की ओर से Vijay के राजनीतिक सलाहकार John Arockiasamy की भूमिका बताई गई है।

यह राजनीतिक संपर्क पूरी तरह नया नहीं है। John Arockiasamy पहले भी PMK की राजनीतिक रणनीति से जुड़े रहे हैं। 2016 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने PMK की रणनीति पर काम किया था, जब Anbumani Ramadoss को पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया गया था।

अब वही राजनीतिक संपर्क एक नए दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत में यह भी चर्चा है कि अगर PMK TVK के साथ आती है तो सरकार में उसे किस तरह की भूमिका दी जा सकती है।

मंत्रिमंडल में PMK को जगह देने की चर्चा

TVK से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि PMK को सरकार में शामिल करने के लिए मंत्रिमंडल में दो जगहों पर चर्चा हो रही है।

इनमें एक नाम Sowmiya Anbumani का है, जो विधानसभा में PMK की फ्लोर लीडर हैं। दूसरा नाम PMK विधायक A Ganesh Kumar का बताया गया है।

हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक सरकारी घोषणा नहीं हुई है। खास बात यह भी है कि Sowmiya Anbumani ने मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से जुड़ी खबरों को अफवाह बताया है और लोगों से ऐसी खबरों को महत्व नहीं देने को कहा है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक बातचीत के रूप में ही देखा जा रहा है, न कि तय फैसला।

Sowmiya Anbumani की चुनावी स्थिति भी महत्वपूर्ण

Sowmiya Anbumani के पास विधानसभा में अपना स्वतंत्र चुनावी जनादेश भी है। उन्होंने Dharmapuri विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने 93,713 वोट हासिल किए और TVK उम्मीदवार को 20,896 वोटों से हराया।

यही कारण है कि PMK को केवल एक छोटे सहयोगी दल के रूप में देखने के बजाय उसके क्षेत्रीय प्रभाव और खासकर Vanniyar समुदाय के बीच उसके राजनीतिक आधार को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

PMK ने लंबे समय से उत्तरी तमिलनाडु के कई इलाकों में Vanniyar समुदाय के बीच अपना राजनीतिक आधार बनाया है। TVK के लिए PMK के साथ संबंध मजबूत होने का मतलब ऐसे इलाकों में अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश भी हो सकता है।

2026 चुनाव के बाद TVK की स्थिति

2026 विधानसभा चुनाव में TVK ने तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों में से 108 सीटों पर जीत हासिल की। सरकार बनाने के लिए बहुमत के आंकड़े से वह कुछ सीटें पीछे रही, जिसके बाद उसे छोटे दलों और सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनानी पड़ी।

इसके बाद कुछ AIADMK विधायकों के इस्तीफे और TVK में शामिल होने से राज्य की राजनीति में समीकरण और बदले हैं। कई पूर्व AIADMK नेता और विधायक TVK के साथ जुड़े हैं। हाल में AIADMK के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता Semmalai के भी TVK के साथ जुड़ने की चर्चा सामने आई।

दो विधानसभा सीटों—Madurantakam और Dharapuram—में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं और 9 अक्टूबर को मतगणना प्रस्तावित है। इन उपचुनावों को TVK सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है।

PMK ने उपचुनाव में किसी पार्टी का समर्थन नहीं किया

इन दोनों सीटों के उपचुनाव से पहले PMK ने किसी राजनीतिक दल को समर्थन नहीं देने का फैसला किया है। खासकर Madurantakam सीट को लेकर PMK का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र में Vanniyar समुदाय का प्रभाव है।

Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, PMK का यह neutral stand TVK के साथ चल रही बातचीत के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि PMK ने इस फैसले को TVK के साथ किसी औपचारिक गठबंधन के रूप में घोषित नहीं किया है।

TVK के लिए PMK क्यों महत्वपूर्ण हो सकती है?

TVK ने सरकार बना ली है, लेकिन पार्टी के सामने अब अपने राजनीतिक आधार को और मजबूत करने की चुनौती है। PMK का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि उसका प्रभाव तमिलनाडु के कुछ खास क्षेत्रों में लंबे समय से बना हुआ है।

राजनीतिक तौर पर PMK का आधार मुख्य रूप से उत्तरी तमिलनाडु और कुछ अन्य क्षेत्रों में दिखाई देता है। Vanniyar समुदाय के बीच पार्टी की पहचान और संगठनात्मक नेटवर्क उसे दूसरे छोटे दलों से अलग राजनीतिक महत्व देते हैं।

TVK के लिए PMK के साथ संबंध मजबूत करने से इन इलाकों में पार्टी की पहुंच बढ़ सकती है। वहीं PMK के लिए भी सत्ता में भागीदारी उसे सरकार के भीतर अपनी राजनीतिक भूमिका बढ़ाने का अवसर दे सकती है।

लेकिन यह समीकरण केवल सीटों और मंत्रिमंडल तक सीमित नहीं है। इसके साथ सामाजिक और क्षेत्रीय राजनीति का संतुलन भी जुड़ा हुआ है।

PMK के साथ आने पर VCK के सामने नई चुनौती

अगर PMK औपचारिक तौर पर TVK के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होती है तो इसका असर एक अन्य सहयोगी दल Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) पर भी पड़ सकता है।

तमिलनाडु की राजनीति में PMK और VCK के सामाजिक-राजनीतिक आधार अलग रहे हैं और कुछ क्षेत्रों में दोनों के समर्थक समूहों के बीच लंबे समय से तनाव भी रहा है। ऐसे में एक ही गठबंधन में दोनों दलों को साथ रखना TVK के लिए राजनीतिक प्रबंधन की चुनौती हो सकता है।

TVK से जुड़े नेताओं का मानना है कि VCK के लिए गठबंधन छोड़ना आसान नहीं होगा। दूसरी ओर, VCK के भीतर भी यह चर्चा होने की बात कही जा रही है कि उसके पारंपरिक मतदाताओं का एक हिस्सा TVK के साथ स्वतंत्र राजनीतिक संबंध विकसित कर रहा है।

VCK पहले से TVK सरकार का हिस्सा है और उसके पास मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व भी है। इसलिए PMK के संभावित प्रवेश के बाद VCK का रुख गठबंधन की राजनीति में महत्वपूर्ण हो सकता है।

Left पार्टियों का समीकरण भी बदल सकता है

TVK-PMK बातचीत का असर केवल VCK तक सीमित नहीं हो सकता। Left पार्टियों के साथ भी TVK के संबंधों पर इसका असर पड़ने की संभावना पर चर्चा हो रही है।

CPI और CPI(M) फिलहाल TVK सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं, लेकिन दोनों पार्टियों ने Madurantakam और Dharapuram उपचुनावों में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। CPI Dharapuram में और CPI(M) Madurantakam में चुनाव लड़ रही है।

सितंबर में TVK की गठबंधन बैठक के दौरान भी Left दलों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी थी। वहीं Congress, VCK, MDMK और Indian Union Muslim League जैसे दल गठबंधन से जुड़े राजनीतिक विमर्श में मौजूद रहे। TVK गठबंधन को बाद में ‘Secular Social Justice Victory Alliance’ नाम दिया गया।

ऐसे में PMK को जोड़ने की कोशिश गठबंधन के भीतर सामाजिक और वैचारिक संतुलन का एक नया सवाल खड़ा कर सकती है।

असली पेच BJP के साथ रिश्ते का

PMK के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल शायद TVK से बातचीत से ज्यादा BJP के साथ उसके मौजूदा रिश्ते का है।

2026 विधानसभा चुनाव में PMK ने AIADMK-BJP गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था और पार्टी को 18 विधानसभा सीटें दी गई थीं। ऐसे में TVK के साथ किसी औपचारिक समझौते का मतलब होगा कि PMK को अपने मौजूदा विपक्षी गठबंधन से राजनीतिक दूरी बनाने पर विचार करना पड़ सकता है।

यही कारण है कि TVK और PMK के बीच बातचीत के बावजूद BJP का रुख इस पूरे मामले में अहम माना जा रहा है। PMK अगर TVK के साथ सत्ता में आती है तो यह केवल तमिलनाडु के भीतर गठबंधन बदलने की घटना नहीं होगी, बल्कि BJP के साथ उसके संबंधों पर भी असर डाल सकती है।

BJP के संकेत क्यों अहम हैं?

PMK और BJP के बीच राजनीतिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में तमिलनाडु की गठबंधन राजनीति का हिस्सा रहे हैं। 2026 का विधानसभा चुनाव भी दोनों दलों ने AIADMK के साथ मिलकर लड़ा था।

अब अगर PMK TVK के साथ सरकार में शामिल होती है, तो BJP के लिए यह एक राजनीतिक पुनर्संयोजन होगा। इसलिए PMK को किसी भी अंतिम निर्णय से पहले BJP के साथ अपने संबंधों पर स्पष्टता लानी पड़ सकती है।

फिलहाल PMK की ओर से TVK सरकार में शामिल होने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। Sowmiya Anbumani ने भी मंत्रिमंडल में शामिल होने की खबरों को अफवाह बताया है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि PMK निश्चित तौर पर TVK के साथ जाएगी।

उपचुनाव के नतीजे भी तय करेंगे आगे की दिशा

6 अक्टूबर को Madurantakam और Dharapuram में होने वाले उपचुनावों के परिणाम TVK और उसके सहयोगियों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। TVK इन दोनों सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है और पार्टी ने इसके लिए चुनावी जिम्मेदारियां भी तय की हैं।

इन नतीजों के बाद सत्ता में संख्या बल, सहयोगी दलों की बातचीत और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार जैसे मुद्दे फिर से केंद्र में आ सकते हैं।

PMK के लिए भी उपचुनाव महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि पार्टी ने दोनों सीटों पर किसी दल को समर्थन नहीं दिया है। ऐसे में चुनाव के बाद उसका अगला राजनीतिक कदम और अधिक स्पष्ट हो सकता है।

तमिलनाडु की राजनीति में बन रहा नया समीकरण

पूरे घटनाक्रम को देखें तो तमिलनाडु में 2026 विधानसभा चुनाव के बाद गठबंधन राजनीति लगातार बदल रही है। TVK ने सरकार बनाई, Congress सहित कुछ दल उसके साथ आए, VCK सरकार का हिस्सा बनी, जबकि Left पार्टियों ने बाहर से समर्थन का रास्ता चुना। दूसरी ओर, AIADMK से जुड़े कई नेता और पूर्व विधायक TVK में शामिल हुए हैं।

अब PMK के साथ बढ़ती बातचीत इस राजनीतिक तस्वीर में एक और बड़ा बदलाव ला सकती है।

हालांकि, PMK के सामने तीन स्तरों पर संतुलन बनाने की चुनौती होगी—TVK के साथ संभावित सत्ता साझेदारी, VCK और Left जैसे मौजूदा सहयोगियों के साथ गठबंधन का संतुलन और BJP के साथ पुराने राजनीतिक रिश्ते।

इसी वजह से फिलहाल PMK और TVK के बीच बातचीत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह संपर्क आखिर किस दिशा में जाता है। राजनीतिक बातचीत गंभीर होने की खबरें जरूर हैं, लेकिन अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में BJP का रुख, उपचुनाव के परिणाम और PMK का आधिकारिक निर्णय तमिलनाडु की राजनीति में इस नए समीकरण की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं।

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By EDITOR

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