जयपुर, 2 अक्टूबर 2026: राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय/संजीव प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। शर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर मांग की है कि उन्हें जस्टिस मेहता से जिरह (cross-examination) का अवसर दिया जाए।
जस्टिस शर्मा ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्हें अपनी बात पूरी तरह रखने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जस्टिस मेहता ने उनकी ईमानदारी और न्यायिक आचरण पर सवाल किस आधार पर उठाए हैं।
जस्टिस मेहता ने क्या आरोप लगाए थे?
यह विवाद अगस्त 2026 में सामने आया था। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने CJI सूर्यकांत को भेजे कई पत्रों में तत्कालीन राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग, मामलों की लिस्टिंग में हस्तक्षेप, भाई-भतीजावाद और पक्षपात समेत कई आरोप लगाए थे।
जस्टिस मेहता ने कथित तौर पर यह भी आरोप लगाया था कि जस्टिस शर्मा ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर’ के तौर पर अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल कुछ मामलों को अपनी बेंच के सामने लाने के लिए कर रहे थे। उन्होंने CJI से राजस्थान हाईकोर्ट में दूसरे राज्य से स्थायी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का अनुरोध भी किया था।
बाद में सामने आए एक अन्य पत्र में जस्टिस मेहता ने न्यायिक जांच में कथित हस्तक्षेप, गोपनीयता भंग करने और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी सवाल उठाए थे। हालांकि, ये सभी बातें जस्टिस मेहता द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इन्हें किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा गया है।
‘एक भी आरोप सही साबित नहीं हुआ’
जस्टिस शर्मा ने आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में से उनकी जानकारी के अनुसार एक भी आरोप सही साबित नहीं हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों को संस्थागत प्रक्रिया के जरिए सुलझाया जाना चाहिए और न्यायपालिका से जुड़े विवाद सार्वजनिक बहस का विषय नहीं बनने चाहिए।
इससे पहले भी शर्मा ने आरोपों को ‘बेबुनियाद’ बताते हुए कहा था कि उन्होंने CJI सूर्यकांत के सामने अपनी स्थिति और संबंधित दस्तावेज रखे हैं। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में अपना भरोसा जताते हुए मीडिया और वकीलों से मामले में धैर्य रखने की अपील की थी।
‘यह व्यक्तिगत या पेशेवर जलन हो सकती है’
जस्टिस शर्मा से जब पूछा गया कि जस्टिस मेहता ने उनके खिलाफ इतने गंभीर आरोप क्यों लगाए, तो उन्होंने इसे संभावित ‘professional jealousy’ से जोड़ा। उन्होंने दोनों के पेशेवर करियर का जिक्र करते हुए कहा कि वे वर्ष 2011 में एक साथ वरिष्ठ अधिवक्ता बने थे।
शर्मा ने दावा किया कि उनके और जस्टिस मेहता के करियर को लेकर पहले भी मतभेद रहे हैं। हालांकि, यह उनके द्वारा व्यक्त किया गया व्यक्तिगत आकलन है और इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
CJI से करी जिरह का मौका देने की मांग
जस्टिस शर्मा ने बताया कि उन्होंने CJI सूर्यकांत को पत्र लिखकर मांग की है कि उन्हें जस्टिस मेहता से जिरह करने का अवसर दिया जाए।
उनका कहना है कि अगर उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं, तो उन्हें उन आरोपों का आधार जानने और उनका जवाब देने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
यह मांग ऐसे समय आई है जब सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर भी मामले को संस्थागत प्रक्रिया के तहत देखने की बात कही गई है। अगस्त में CJI सूर्यकांत ने कहा था कि कॉलेजियम के वरिष्ठ न्यायाधीशों ने जस्टिस मेहता की ओर से उठाई गई चिंताओं का संज्ञान लिया है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया था कि किसी मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ लगाए गए आरोप अपने आप में किसी निष्कर्ष के बराबर नहीं होते और ऐसे मामलों से निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के तहत निपटना जरूरी है।
राजस्थान हाईकोर्ट में नेतृत्व भी बदला
इस विवाद के बीच राजस्थान हाईकोर्ट के नेतृत्व में भी बदलाव हुआ। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सितंबर की शुरुआत में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी। यह घटनाक्रम जस्टिस शर्मा के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद से हटने और बाद में उनके कार्यकाल समाप्त होने के दौरान सामने आया।
जस्टिस शर्मा अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनका कहना है कि पूरे प्रकरण ने उन्हें पेशेवर तौर पर उतना प्रभावित नहीं किया, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर उन्हें काफी ठेस पहुंची है।
उन्होंने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
फिलहाल विवाद से जुड़े आरोपों और जवाबों पर संस्थागत स्तर पर प्रक्रिया जारी है। किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सही या गलत मानने से पहले संबंधित जांच या सक्षम संस्था के निष्कर्ष का इंतजार करना होगा।
