उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाला चुनाव अब सियासी गणित का मामला बनता जा रहा है। विधानसभा में मौजूदा संख्या, सहयोगी दलों का समर्थन और संभावित क्रॉस-वोटिंग को लेकर दोनों प्रमुख खेमों में रणनीति पर चर्चा तेज है। नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है, इसलिए आने वाले कुछ दिन तस्वीर साफ करने वाले माने जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रभावी संख्या 397 मानी जा रही है। इस गणित के आधार पर राज्यसभा की एक सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वाले वोट जरूरी होंगे। ऐसे में 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव केवल संख्या का खेल नहीं है, बल्कि उम्मीदवारों की संख्या तय करने और सहयोगी विधायकों को एकजुट रखने की भी चुनौती है।
मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक BJP के नेतृत्व वाले NDA के पास 8 सीटों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त संख्या बताई जा रही है, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस मिलकर दो सीटों के लिए जरूरी संख्या जुटा सकते हैं। हालांकि उम्मीदवारों की अंतिम संख्या और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चुनाव निर्विरोध होगा या मतदान की स्थिति बनेगी।
विधानसभा में किसके पास कितने विधायक?
उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में BJP के पास करीब 256 विधायक हैं। NDA के सहयोगी दलों को जोड़ने पर गठबंधन की संख्या करीब 292 तक पहुंचती है। इसमें अपना दल (सोनेलाल), राष्ट्रीय लोक दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और निषाद पार्टी समेत अन्य सहयोगियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के पास करीब 101 विधायक हैं और कांग्रेस के दो विधायक उसके साथ हैं। इस तरह दोनों की संयुक्त संख्या करीब 103 बैठती है। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह संख्या दो राज्यसभा सीटों के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।
यही वजह है कि इस चुनाव में मुख्य सवाल यह है कि BJP-NDA आठ सीटों पर उम्मीदवार उतारता है या सात सीटों तक सीमित रहता है और क्या SP तीसरी सीट के लिए दावा पेश करता है।
पहला समीकरण: BJP की 8 और SP की 2 सीटें
मौजूदा विधानसभा संख्या को देखें तो सबसे सीधा गणित BJP-led NDA की आठ सीटों और SP-कांग्रेस की दो सीटों का बनता है।
SP ने पहले ही वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े कॉरपोरेट एग्जीक्यूटिव धनराज परिमल नथवाणी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया था।
यदि BJP आठ उम्मीदवार उतारती है और SP के दो उम्मीदवार रहते हैं, तो कुल 10 उम्मीदवार होंगे। ऐसी स्थिति में अगर सभी उम्मीदवारों को पर्याप्त प्रथम वरीयता के वोट मिलते हैं, तो चुनाव निर्विरोध पूरा हो सकता है।
हालांकि BJP के लिए आठवीं सीट के लिए अपने कोर वोट के अलावा सहयोगी दलों और अन्य समर्थक विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण होगा।
दूसरा समीकरण: BJP 7, SP 3
दूसरी संभावना यह है कि BJP सात उम्मीदवार उतारे और SP तीसरी सीट के लिए उम्मीदवार मैदान में उतार दे।
इस स्थिति में मुकाबला अधिक दिलचस्प हो सकता है, क्योंकि SP के पास कांग्रेस के समर्थन के साथ करीब 103 विधायक हैं। दो उम्मीदवारों के बाद भी उसके पास कुछ वोट बचते हैं, लेकिन तीसरे उम्मीदवार के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी।
यहीं से अन्य दलों और निर्दलीय या अलग रुख रखने वाले विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि तीसरी सीट के लिए वास्तविक गणित उम्मीदवारों की अंतिम संख्या और मतदान के समय विधायकों की प्रभावी संख्या पर निर्भर करेगा।
तीसरा समीकरण: दोनों खेमे ज्यादा सीटों के लिए उतरें
अगर BJP आठ सीटों और SP तीन सीटों पर दावा करता है, तो कुल 11 उम्मीदवार हो जाएंगे और चुनाव मतदान की स्थिति में जा सकता है।
ऐसी स्थिति में हर विधायक के वोट की अहमियत बढ़ जाएगी। खास तौर पर NDA के सहयोगी दलों के विधायकों को एकजुट रखना BJP के लिए महत्वपूर्ण होगा, जबकि SP को अपने विधायकों के साथ-साथ अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ेगा।
पिछले राज्यसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में क्रॉस-वोटिंग के मामले सामने आ चुके हैं। इसलिए इस बार भी पार्टियां अपने विधायकों की संख्या और मतदान रणनीति पर विशेष नजर रखेंगी। हालांकि किसी विधायक के क्रॉस-वोट करने की संभावना को लेकर अभी केवल अटकलें हैं; इसे निश्चित घटनाक्रम के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
धनराज नथवाणी की उम्मीदवारी क्यों चर्चा में?
SP की ओर से धनराज परिमल नथवाणी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद चुनाव का एक अलग पहलू सामने आया है। नथवाणी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी हैं और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं।
उनके पिता परिमल नथवाणी भी रिलायंस से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी हैं और जून 2026 में झारखंड से NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा के लिए फिर चुने गए थे।
SP द्वारा उत्तर प्रदेश से नथवाणी को उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग चर्चाएं हैं। हालांकि पार्टी ने उनकी उम्मीदवारी के पीछे अपनी रणनीति को लेकर विस्तृत सार्वजनिक कारण नहीं बताया है।
2027 से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव को दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों के संगठनात्मक प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
BJP के लिए चुनौती अपने बड़े गठबंधन को एकजुट रखने की होगी, जबकि SP के सामने अपने विधायकों को साथ रखने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त समर्थन जुटाने का सवाल रहेगा।
लेकिन अंतिम तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है और मतदान 16 अक्टूबर को होना है। उम्मीदवारों की अंतिम संख्या तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 10 सीटों के लिए निर्विरोध चुनाव होता है या कुछ सीटों पर सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा।
फिलहाल उपलब्ध विधानसभा गणित BJP-led NDA को आठ और SP-कांग्रेस गठबंधन को दो सीटों की स्थिति में रखता है। इसके आगे का समीकरण उम्मीदवारों की संख्या, सहयोगी दलों के रुख और मतदान के दौरान विधायकों के व्यवहार पर निर्भर करेगा।
