राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार उद्योगों के लिए एक नई सब्सिडी योजना लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित योजना के तहत प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (APCD) लगाने के लिए लागत का करीब 30 से 40 फीसदी तक हिस्सा सब्सिडी के रूप में दिए जाने की संभावना है।

मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, नई योजना का उद्देश्य NCR में औद्योगिक प्रदूषण को कम करना और खासकर सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। उद्योगों को APCD लगाने की कुल लागत का बाकी हिस्सा खुद वहन करना होगा।

प्रस्तावित योजना का नाम ‘स्वच्छ पवन नील गगन’ (Swacch Pawan Neel Gagan) रखे जाने की संभावना है। यह योजना केंद्र सरकार की पहले से मंजूर ‘परिवर्तन’ (Parivartan) योजना के साथ मिलकर काम करेगी। परिवर्तन योजना का उद्देश्य NCR में पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाकर अपेक्षाकृत स्वच्छ वाहनों को बढ़ावा देना है।

करीब ₹600 करोड़ की योजना

अधिकारियों के मुताबिक प्रस्तावित नई योजना का कुल आकार करीब ₹600 करोड़ हो सकता है। योजना को Expenditure Finance Committee (EFC) से मंजूरी मिल चुकी है और अब अंतिम मंजूरियों का इंतजार है।

बताया गया है कि योजना की राशि ₹1,000 करोड़ की सीमा से कम होने के कारण इसके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी आवश्यक नहीं होगी। अंतिम स्वीकृतियों के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

इस योजना के तहत प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस लगाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इन उपकरणों का उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों को नियंत्रित करना और वातावरण में उत्सर्जन को कम करना है।

प्रदूषण की निगरानी के लिए AQI सेंसर का इस्तेमाल

प्रस्तावित योजना में केवल सब्सिडी देने तक ही सीमित रहने के बजाय प्रदूषण की निगरानी और कार्रवाई पर भी जोर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए Air Quality Index (AQI) सेंसर से मिलने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों की पहचान और लक्षित कार्रवाई के लिए किया जा सकता है।

जरूरत पड़ने पर अधिक प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। इससे अधिकारियों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि NCR के किन इलाकों में औद्योगिक प्रदूषण का स्तर अधिक है और किन इकाइयों पर तत्काल निगरानी की जरूरत है।

NCR Planning Board के जरिए पहुंचेगा फंड

अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत मिलने वाली राशि को National Capital Region Planning Board (NCRPB) के माध्यम से जारी किया जाएगा। NCRPB केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत काम करता है।

वहीं, योजना के संस्थागत क्रियान्वयन की जिम्मेदारी केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की होगी। इस तरह प्रदूषण नियंत्रण के लिए अलग-अलग मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच समन्वय किया जाएगा।

सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण पर जोर

दिल्ली-NCR में हर साल सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो जाती है। तापमान में गिरावट, हवा की कम गति और विभिन्न स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में जमा होने लगते हैं।

इसी को देखते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार इस बार सर्दियों से पहले कई स्तरों पर प्रदूषण नियंत्रण की तैयारी कर रही हैं। औद्योगिक प्रदूषण के साथ-साथ सड़क से उड़ने वाली धूल, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन और निर्माण गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ाने की योजना है।

सड़क की धूल पर भी रहेगा फोकस

प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियों में सड़क से उड़ने वाली धूल को भी एक प्रमुख समस्या माना जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार दिल्ली और NCR की विभिन्न नागरिक एवं विकास एजेंसियों के साथ मिलकर सड़क किनारे खुले और खाली हिस्सों को ठीक करने की दिशा में काम कर रही है।

इस काम में Municipal Corporation of Delhi (MCD), New Delhi Municipal Council (NDMC), Delhi Development Authority (DDA) और NCR के करीब 10 अन्य शहरी निकायों को शामिल किया जा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक कई सड़कों और फुटपाथों के किनारे खुले या बिना ढके हिस्से मौजूद हैं, जहां से वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल उड़ती है। इन हिस्सों की मरम्मत और सुधार का काम नियमित रखरखाव बजट के जरिए किया जा रहा है।

वाहनों के प्रदूषण पर भी सख्ती की तैयारी

गुरुवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सर्दियों के दौरान प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों को लेकर बैठक की।

इस दौरान वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए कई कदमों पर चर्चा की गई। इनमें ‘PUCC नहीं तो ईंधन नहीं’ नियम भी शामिल है। इसके तहत वैध Pollution Under Control Certificate (PUCC) नहीं रखने वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल, CNG और LPG स्टेशनों पर ईंधन देने से रोका जाएगा।

इस अभियान को दिल्ली के करीब 500 Automatic Number Plate Recognition (ANPR) से लैस ईंधन स्टेशनों तक लागू करने की योजना है। इसके जरिए पुराने और निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।

BS-VI मानकों से जुड़े वाहनों पर भी नजर

प्रस्तावित प्रदूषण नियंत्रण उपायों के तहत दिल्ली में बाहर से आने वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों पर भी नियम कड़े किए जाने की तैयारी है। 1 नवंबर से ऐसे बाहरी वाहनों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की योजना है जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते।

हालांकि, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी।

इसका उद्देश्य दिल्ली में पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की आवाजाही कम करना और सार्वजनिक परिवहन तथा स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों को बढ़ावा देना है।

निर्माण गतिविधियों पर भी प्रतिबंध

सर्दियों के दौरान धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर भी चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाने की योजना है।

1 नवंबर से 31 जनवरी तक ऐसी निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर रोक रहेगी जिनसे बड़ी मात्रा में धूल पैदा होती है। इसके बाद 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने की योजना है।

इसके अलावा अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क को 1 नवंबर से 28 फरवरी तक दोगुना करने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है।

सरकारी और निजी कार्यालयों के लिए भी उपाय

प्रदूषण कम करने के लिए कार्यालयों के कामकाज में भी बदलाव की योजना बनाई गई है। इसके तहत अलग-अलग समय पर कार्यालय शुरू करने की व्यवस्था यानी staggered office timings लागू करने और सरकारी तथा निजी कार्यालयों में करीब 50 फीसदी work-from-home की व्यवस्था करने का प्रस्ताव है।

इसके साथ ही सरकार दिल्ली में 150 इलेक्ट्रिक बसें जोड़ने की तैयारी कर रही है। लोगों को मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

सड़कों की मशीनों से सफाई बढ़ाने के साथ-साथ दिल्ली के 37 प्रमुख pollution hotspots पर निगरानी और कार्रवाई को भी मजबूत किया जाएगा।

उद्योगों के लिए क्या बदलेगा?

अगर प्रस्तावित ‘स्वच्छ पवन नील गगन’ योजना को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो NCR में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को अपने उत्सर्जन नियंत्रण सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए आर्थिक सहायता मिल सकती है।

30-40 फीसदी तक संभावित सब्सिडी से उद्योगों पर APCD लगाने की शुरुआती लागत का बोझ कम हो सकता है। हालांकि, योजना की अंतिम शर्तें, पात्र उद्योगों की सूची और सब्सिडी की वास्तविक सीमा अंतिम मंजूरी और दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

केंद्र सरकार की तैयारियों में उद्योगों के साथ-साथ वाहन, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और सार्वजनिक परिवहन को भी शामिल किया गया है। आने वाले महीनों में इन उपायों के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी, खासकर सर्दियों के दौरान जब दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है।

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By EDITOR

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