मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। खास बात यह है कि इस आंदोलन की शुरुआत दिल्ली के बजाय मुंबई के शिवाजी पार्क से की गई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब CJP का पिछला बड़ा आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़ा था, तो इस बार मुंबई को आंदोलन का पहला केंद्र क्यों बनाया गया?
CJP के मुताबिक, मुंबई में 2 अक्टूबर को शुरू होने वाला आंदोलन आगे देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाया जाएगा और अंत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया जाएगा। दिपके ने कहा है कि आंदोलन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रखने की योजना है।
मुंबई से शुरुआत करने की क्या है वजह?
मुंबई में 1 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत दिपके ने आंदोलन की शुरुआत महाराष्ट्र से करने के पीछे 2024 के लोकसभा और उसके बाद हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के नतीजों में आए बड़े अंतर का हवाला दिया।
दिपके ने सवाल उठाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में BJP को 48 में से 9 सीटें मिली थीं, जबकि करीब छह महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में BJP राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसे 132 सीटें मिलीं।
CJP नेता ने इसी चुनावी बदलाव को अपने आंदोलन के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इसी वजह से उन्होंने आंदोलन की शुरुआत मुंबई से करने का फैसला किया है।
उन्होंने महाराष्ट्र के राजनीतिक महत्व को बताते हुए मराठी में भी एक टिप्पणी की—“दिल्लीचे ही ताकद राखतो महाराष्ट्र”, यानी उनके अनुसार दिल्ली की सत्ता के पीछे महाराष्ट्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
पहले जंतर-मंतर से जुड़ा था CJP का आंदोलन
अभिजीत दिपके का नाम इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आया था। CJP ने उस समय परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन किया था। उस आंदोलन के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को CJP ने अपनी राजनीतिक गतिविधि की एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया था।
इस बार हालांकि CJP ने आंदोलन की शुरुआत मुंबई से करने का फैसला किया है। संगठन का कहना है कि मुंबई के बाद आंदोलन को अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा और अंत में दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
आंदोलन में क्या हैं CJP की प्रमुख मांगें?
मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिपके ने आंदोलन की प्रमुख मांगों के बारे में भी जानकारी दी। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, 2025 में तैयार मतदाता सूची को लेकर प्रक्रिया को रोकने की मांग और भविष्य में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग शामिल है।
CJP ने यह भी कहा है कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया में सिविल सोसायटी की भागीदारी होनी चाहिए।
हालांकि, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची को लेकर CJP तथा अन्य विपक्षी समूहों द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से विवादित हैं। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर अलग पक्ष और स्पष्टीकरण सामने आते रहे हैं।
मुंबई पुलिस ने नहीं दी थी प्रदर्शन की अनुमति
CJP के लिए मुंबई में प्रदर्शन आयोजित करना भी आसान नहीं रहा। मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था। पुलिस ने शिवाजी पार्क के इस्तेमाल से जुड़े प्रतिबंधों के अलावा जरूरी नागरिक अनुमति, ट्रैफिक और ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं का भी हवाला दिया था।
इसके बाद दिपके ने ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान किया। CJP का कहना था कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाती है, तो संगठन गांधी जयंती के दिन जेल भरो आंदोलन करेगा।
गांधी जयंती को ही क्यों चुना गया?
दिपके ने 2 अक्टूबर को आंदोलन शुरू करने के फैसले को महात्मा गांधी से जोड़ते हुए कहा कि उनका आंदोलन सत्ता के खिलाफ विरोध और नागरिक अधिकारों के मुद्दे पर है।
उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान महात्मा गांधी के आंदोलनों का संदर्भ देते हुए सवाल उठाया कि क्या उस समय भी हर आंदोलन के लिए सरकार से अनुमति ली जाती थी। CJP ने गांधी जयंती के दिन मुंबई से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।
मुंबई के बाद इन शहरों में पहुंचाने की तैयारी
CJP की योजना के मुताबिक आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन ने गोवा, बेंगलुरु, कोलकाता और अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन की योजना बताई है। इसके बाद आंदोलन का समापन दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े धरने के रूप में करने की बात कही गई है।
दिपके ने कहा है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते।
फिलहाल CJP का यह आंदोलन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच शुरू हुआ है। मुंबई से शुरुआत के बाद अब निगाह इस बात पर है कि यह आंदोलन देश के दूसरे शहरों में किस तरह आगे बढ़ता है और अंत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसका क्या स्वरूप रहता है।
