नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
विवाद सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी डेटाबेस तक अधिकारियों की पहुंच जैसे मुद्दे शामिल हैं।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR के तहत मतदाता सूचियों की दोबारा जांच की जा रही है। इस प्रक्रिया के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। चुनाव आयोग के मुताबिक मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की प्रक्रिया में ऐसे नामों की पहचान की जाती है जो मृत हो चुके हैं, स्थान बदल चुके हैं या अन्य कारणों से सूची में नहीं होने चाहिए।
हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी हटने का खतरा है। उनका कहना है कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, उन्हें पर्याप्त अवसर देकर अपना नाम दोबारा शामिल कराने की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से बढ़ा विवाद
विवाद को तब और हवा मिली जब रिपोर्टों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कई फैसलों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई।
इनमें Form 6 में किए गए बदलाव का मुद्दा भी शामिल है। Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस फॉर्म में SIR से संबंधित एक नया सवाल जोड़ा गया था, जिस पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।
बुधवार को चुनाव आयोग ने इस विवादित बदलाव को Form 6 से हटा दिया। हालांकि, जिन राज्यों में SIR अभी चल रहा है, वहां स्थिति को लेकर अलग-अलग प्रावधान लागू होने की रिपोर्ट सामने आई है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद को लेकर सामने आई खबरों पर कहा है कि आयोग में अलग-अलग विचार और आपत्तियां होना असामान्य नहीं है। आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।
हाल ही में आयोग की बैठक में SIR को लेकर कई फैसले लिए गए। आयोग ने यह भी कहा कि SIR से संबंधित सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। मतदाताओं की सुविधा के लिए कुछ मामलों में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर जाकर दस्तावेज जुटाने और उन्हें सिस्टम पर अपलोड करने में मदद करेंगे।
BJP ने किया CEC का बचाव
विवाद के बीच BJP ने ज्ञानेश कुमार का समर्थन किया है। पार्टी नेताओं ने विपक्ष पर चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थानों को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया है।
BJP नेता स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मतदाता सूची में सही और गलत नामों को लेकर भी सवाल उठने चाहिए। BJP का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना जरूरी है।
विपक्ष की क्या रणनीति है?
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी SIR और चुनाव आयोग को लेकर चर्चा हुई। पार्टी ने कहा है कि INDIA ब्लॉक की बैठक में आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
इसके अलावा CJP ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन ने मुंबई में 2 अक्टूबर को ‘जंतर-मंतर 2.0’ नाम से प्रदर्शन करने की बात कही है।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुकी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले सामूहिक रूप से लिए जाने के बजाय एकतरफा तरीके से लिए गए। याचिकाकर्ता ने SIR की वैधता और आयोग की कार्यप्रणाली की न्यायिक जांच की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है।
क्यों अहम है यह पूरा विवाद?
ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद अब सिर्फ CEC और चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद का मामला नहीं रह गया है। SIR सीधे मतदाता सूची से जुड़ा है और इसलिए इसका असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिनके नाम सूची में शामिल, हटाए या दोबारा बहाल किए जाने हैं।
एक तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना जरूरी है, वहीं विपक्षी दल प्रक्रिया की पारदर्शिता और वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, चुनाव आयोग के अगले फैसले और INDIA ब्लॉक की रणनीति से इस विवाद की दिशा और साफ हो सकती है।
