भुवनेश्वर: ओडिशा में Special Intensive Revision (SIR) के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची में कुल 17.67 लाख नाम हटाए गए हैं। यह राज्य के कुल मतदाताओं का करीब 5.3 फीसदी है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, SIR वाले राज्यों में ओडिशा का वोटर डिलीशन रेट केरल के बाद सबसे कम है।
केरल में करीब 3.22 फीसदी नाम हटाए गए हैं, जबकि ओडिशा में यह आंकड़ा 5.3 फीसदी रहा। इसके मुकाबले कई अन्य राज्यों में मतदाता सूची से हटाए गए नामों का प्रतिशत अधिक रहा है।
राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश से भी कम डिलीशन
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, ओडिशा में 5.3 फीसदी मतदाता नाम हटाए गए। वहीं राजस्थान में 5.74 फीसदी, मध्य प्रदेश में 5.97 फीसदी और बिहार में 5.95 फीसदी नाम हटाए गए हैं।
कुछ राज्यों में यह आंकड़ा इससे काफी ज्यादा रहा। पुडुचेरी में करीब 7.5 फीसदी, गोवा में 10.75 फीसदी, तमिलनाडु में 11.55 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 11.77 फीसदी और पश्चिम बंगाल में करीब 11.9 फीसदी नाम हटाए गए।
उत्तर प्रदेश में करीब 13.2 फीसदी और गुजरात में लगभग 13.4 फीसदी नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है।
ओडिशा में डिलीशन रेट कम रहने की वजह क्या रही?
ओडिशा में मतदाता सूची से नाम हटने का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहने के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण Enumeration Forms की वापसी से जुड़ा है।
SIR प्रक्रिया के दौरान ओडिशा में करीब 93.97 फीसदी Enumeration Forms वापस प्राप्त हुए। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने फॉर्म जमा किए।
करीब 6.03 फीसदी लोग ऐसे रहे जिन्होंने फॉर्म जमा नहीं किए। इन लोगों को ड्राफ्ट मतदाता सूची के स्तर पर बाहर रखा गया था।
मृत मतदाताओं और स्थायी रूप से स्थानांतरित लोगों के नाम हटे
ड्राफ्ट चरण में बाहर किए गए करीब 20.12 लाख नामों में अलग-अलग श्रेणियां शामिल थीं।
आंकड़ों के अनुसार, इनमें लगभग 8.32 लाख मृत मतदाता पाए गए। वहीं करीब 10.07 लाख लोग स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए थे या उनका पता नहीं चल पाया।
इसके अलावा लगभग 1.58 लाख नाम डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन के तौर पर चिन्हित किए गए।
इस तरह मतदाता सूची के संशोधन के दौरान अलग-अलग कारणों के आधार पर नामों की जांच की गई और अंतिम सूची में आवश्यक बदलाव किए गए।
ओडिशा में प्रवास का अलग पैटर्न
ओडिशा से बड़ी संख्या में लोग रोजगार और अन्य कारणों से दूसरे राज्यों में जाते हैं। हालांकि, राज्य में होने वाला प्रवास अक्सर मौसमी या अस्थायी प्रकृति का माना जाता है।
कई प्रवासी मजदूर काम के लिए कुछ समय के लिए दूसरे राज्यों में रहते हैं, लेकिन उनका स्थायी पता ओडिशा में ही रहता है। ऐसे मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित व्यक्ति के तौर पर दर्ज किए जाने की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है।
यही कारण है कि प्रवासन के बावजूद ओडिशा में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का आंकड़ा कुछ अन्य राज्यों की तुलना में कम रहा।
2024 चुनाव से पहले भी हुई थी मतदाता सूची की समीक्षा
ओडिशा में मतदाता सूची की समीक्षा SIR से पहले भी की जा चुकी थी। साल 2023 में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर से विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान चलाया गया था।
इस अभियान के दौरान करीब 3.45 लाख मृत मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इससे SIR शुरू होने से पहले ही मतदाता सूची में एक स्तर पर जांच और सुधार की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
अंतिम मतदाता सूची के आंकड़ों पर नजर
SIR के बाद सामने आए आंकड़े बताते हैं कि ओडिशा में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की दर कई अन्य राज्यों की तुलना में कम रही है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 17.67 लाख नाम हटाए गए, जो करीब 5.3 फीसदी है।
हालांकि, मतदाता सूची में नाम जुड़ने, हटने या संशोधन की प्रक्रिया चुनावी रोल की नियमित समीक्षा का हिस्सा है। किसी नाम को हटाने या शामिल करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और सत्यापन के आधार पर की जाती है।
फिलहाल SIR के बाद ओडिशा की अंतिम मतदाता सूची जारी हो चुकी है और चुनाव आयोग के आंकड़ों में राज्य का डिलीशन रेट अन्य कई राज्यों की तुलना में कम दर्ज किया गया है।
