Tata Sons जल्द ही अपनी Annual General Meeting (AGM) दोबारा आयोजित करने की तैयारी कर रही है। कंपनी अगले एक महीने के भीतर AGM बुला सकती है, लेकिन Sir Ratan Tata Trust (SRTT) से जुड़ी पाबंदियों के चलते एक बार फिर बैठक में कोरम पूरा होने की समस्या सामने आ सकती है। इससे Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran के दोबारा डायरेक्टर नियुक्त होने का मामला भी अटक सकता है।

पिछली AGM 18 अगस्त 2026 को आयोजित होनी थी, लेकिन जरूरी कोरम पूरा नहीं होने के कारण बैठक को स्थगित करना पड़ा था। इसके बाद Tata Sons को Registrar of Companies (RoC) से AGM आयोजित करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय मिला है। अब कंपनी जल्द ही नई तारीख तय कर बैठक बुलाने की तैयारी में है।

Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति पर होगी नजर

आने वाली AGM Tata Sons के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें N. Chandrasekaran की डायरेक्टर के तौर पर पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर शेयरधारकों की मंजूरी ली जानी है।

Tata Sons के बोर्ड में इस मुद्दे को लेकर मतभेद की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata और Tata Sons के बोर्ड के अन्य सदस्यों के बीच Chandrasekaran की पुनर्नियुक्ति और Tata Sons की संभावित लिस्टिंग को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है।

हालांकि, कंपनी के Articles of Association के अनुसार यदि AGM में आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो पाता है, तो Chandrasekaran तब तक डायरेक्टर बने रह सकते हैं, जब तक वैध AGM में उनकी पुनर्नियुक्ति पर फैसला नहीं हो जाता।

SRTT पर लगी पाबंदियां बनीं मुख्य वजह

AGM में कोरम का विवाद Sir Ratan Tata Trust (SRTT) पर लगी मौजूदा पाबंदियों से जुड़ा है। महाराष्ट्र Charity Commissioner ने SRTT को बैठकों में हिस्सा लेने या निर्णय लेने से संबंधित प्रतिबंध अभी नहीं हटाए हैं।

Tata Sons में Tata Trusts की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) के पास 27.98 फीसदी और SRTT के पास 23.56 फीसदी हिस्सेदारी है। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 51.54 फीसदी है।

Tata Sons के Articles of Association के मुताबिक, जब Tata Trusts की संयुक्त हिस्सेदारी कंपनी की paid-up ordinary share capital में कम से कम 40 फीसदी रहती है, तब AGM के कोरम में SDTT और SRTT द्वारा संयुक्त रूप से नामित अधिकृत प्रतिनिधि की मौजूदगी भी आवश्यक होती है।

पिछली AGM में इसी प्रतिनिधित्व से जुड़ी स्थिति के कारण जरूरी कोरम पूरा नहीं हो सका था।

दोबारा कोरम की समस्या हुई तो NCLT का रुख कर सकती है कंपनी

अगर आगामी AGM में भी कोरम पूरा नहीं होता है, तो Tata Sons National Company Law Tribunal (NCLT) का रुख कर सकती है। Companies Act की Section 97(1) के तहत NCLT को AGM आयोजित कराने और उसके आयोजन की प्रक्रिया को लेकर निर्देश देने का अधिकार है।

रिपोर्ट में कानूनी विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि NCLT परिस्थितियों के आधार पर AGM आयोजित कराने के लिए आवश्यक निर्देश दे सकता है। हालांकि, NCLT का आदेश महाराष्ट्र Charity Commissioner’s द्वारा SRTT पर लगाए गए प्रतिबंधों को अपने आप खत्म नहीं करेगा।

यही वजह है कि अगर मामला NCLT तक पहुंचता है, तो AGM और उसमें पारित प्रस्तावों की वैधता को लेकर आगे कानूनी चुनौती की संभावना भी बनी रह सकती है।

Tata Sons के लिए महत्वपूर्ण होगी अगली AGM

अब Tata Sons के सामने AGM को निर्धारित समय सीमा में आयोजित कराने और जरूरी कोरम सुनिश्चित करने की चुनौती है। वहीं, Chandrasekaran की पुनर्नियुक्ति और Tata Sons की लिस्टिंग से जुड़े मुद्दों को लेकर बोर्ड और शेयरधारकों की नजर आगामी बैठक पर रहेगी।

अगर SRTT से जुड़ी मौजूदा पाबंदियों में बदलाव नहीं होता है, तो पिछली AGM जैसी स्थिति दोबारा बन सकती है। ऐसे में Tata Sons के लिए AGM आयोजित करने का कानूनी रास्ता और NCLT की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

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By EDITOR

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