भारत में सोने की बढ़ती खरीद और आयात को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। खास तौर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत आने वाले सोने के आयात में जिस तेजी से बढ़ोतरी हुई है, उसने सरकार और व्यापार विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है।
दिलचस्प बात यह है कि भारत ने मई 2026 में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। इसके बावजूद UAE से आने वाले सोने के आयात में जबरदस्त उछाल आया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे भारत और UAE के बीच हुए Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) के तहत मिलने वाली लगभग 1 फीसदी की शुल्क रियायत एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है।
जून में UAE से 175 फीसदी से ज्यादा बढ़ा सोने का आयात
ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत ने UAE से करीब 64.94 करोड़ डॉलर का सोना आयात किया। जून 2025 में यह आंकड़ा करीब 23.59 करोड़ डॉलर था।
यानी एक साल में UAE से भारत का सोना आयात करीब 175.2 फीसदी बढ़ गया।
इसके बिल्कुल विपरीत, दुनिया के बाकी देशों से भारत का सोना आयात जून 2026 में 17.7 फीसदी घट गया। यह 160 करोड़ डॉलर से कम होकर करीब 132 करोड़ डॉलर रह गया।
इस अंतर ने UAE को भारत के गोल्ड इंपोर्ट में तेजी का एक प्रमुख स्रोत बना दिया है। जून 2026 में भारत के कुल सोना आयात में UAE की हिस्सेदारी करीब 33 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह सिर्फ 12.8 फीसदी थी।
अप्रैल-जून में UAE से दोगुने से भी ज्यादा आयात
अगर सिर्फ जून के आंकड़ों को देखा जाए तो तस्वीर बड़ी है, लेकिन अप्रैल से जून 2026 की पूरी तिमाही में यह बदलाव और ज्यादा स्पष्ट दिखाई देता है।
अप्रैल-जून 2026 के दौरान UAE से भारत का सोना आयात 124.8 फीसदी बढ़कर 3.14 अरब डॉलर हो गया। पिछले साल इसी अवधि में भारत ने UAE से करीब 1.40 अरब डॉलर का सोना आयात किया था।
वहीं, दुनिया के बाकी देशों से भारत का सोना आयात करीब 29.3 फीसदी बढ़कर 7.87 अरब डॉलर हुआ।
इस तिमाही में भारत के कुल सोना आयात में करीब 3.53 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। इसमें UAE अकेले करीब 1.74 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार रहा। यानी कुल वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा UAE से आया।
भारत के कुल तिमाही सोना आयात में UAE की हिस्सेदारी भी 18.7 फीसदी से बढ़कर 28.5 फीसदी हो गई।
1 फीसदी टैक्स का पूरा खेल क्या है?
अब सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर UAE से ही इतना ज्यादा सोना क्यों आ रहा है?
इसका जवाब भारत-UAE CEPA में मिलने वाली शुल्क रियायत से जुड़ा है।
समझौते के तहत तय Rules of Origin को पूरा करने वाला UAE-origin सोना भारत में सामान्य 15 फीसदी शुल्क के बजाय करीब 14 फीसदी शुल्क पर आ सकता है।
यानी करीब 1 फीसदी का अंतर।
आम आदमी को यह अंतर छोटा लग सकता है, लेकिन अरबों डॉलर के सोने के कारोबार में 1 फीसदी भी बड़ी रकम बन जाती है। सोना बहुत महंगी कमोडिटी है और बुलियन कारोबार में मार्जिन अपेक्षाकृत कम हो सकता है। इसलिए आयातकों के लिए यह शुल्क अंतर आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
UAE खुद सोने का बड़ा उत्पादक नहीं है
इस मामले को और दिलचस्प बनाती है UAE की भूमिका।
UAE दुनिया का कोई बड़ा सोना उत्पादक देश नहीं है। हालांकि दुबई और UAE वैश्विक स्तर पर सोने के कारोबार, रिफाइनिंग और री-एक्सपोर्ट के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
यही वजह है कि भारत में UAE से सोने की खेप इतनी तेजी से बढ़ने पर सवाल उठ रहे हैं।
Global Trade Research Initiative (GTRI) ने इस बढ़ोतरी को भारत के बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट बिल का एक प्रमुख कारण बताया है और सरकार से UAE को मिलने वाली कीमती धातुओं की व्यापारिक रियायतों की समीक्षा करने की मांग की है।
क्या तीसरे देश का सोना UAE के रास्ते भारत आ रहा है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है।
मौजूदा आंकड़े यह साबित नहीं करते कि किसी तीसरे देश का सोना गलत तरीके से UAE के रास्ते भारत में भेजा जा रहा है।
सिर्फ UAE से आयात बढ़ने के आधार पर इसे अवैध डायवर्जन कहना सही नहीं होगा। फिलहाल चिंता यह है कि भारत-UAE व्यापार समझौते के तहत मिलने वाली कम शुल्क दर कहीं आयातकों को UAE के रास्ते ज्यादा सोना मंगाने के लिए प्रोत्साहित तो नहीं कर रही।
इसीलिए विशेषज्ञों ने Rules of Origin की सख्त जांच और निगरानी की जरूरत बताई है।
भारत ने सोने पर आयात शुल्क क्यों बढ़ाया?
भारत ने 13 मई 2026 को सोने पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था।
सरकार की कोशिश आयात को नियंत्रित करने, विदेशी मुद्रा के दबाव को कम करने और बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट बिल पर लगाम लगाने की दिशा में थी।
लेकिन शुल्क बढ़ने के बावजूद अप्रैल-जून 2026 में भारत का गोल्ड बार इंपोर्ट करीब 47.1 फीसदी बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया, जबकि एक साल पहले यह करीब 7.49 अरब डॉलर था।
हालांकि इस बढ़ोतरी को केवल ज्यादा मात्रा में सोना आने के रूप में नहीं देखा जा सकता। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें भी काफी ऊंची रहीं, जिससे आयात का डॉलर मूल्य बढ़ा।
ज्यादा टैक्स से स्मगलिंग का खतरा?
सोने पर ऊंचा आयात शुल्क एक दूसरी चिंता भी पैदा करता है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कानूनी तरीके से सोना आयात करना बहुत महंगा हो जाता है, तो इससे अवैध तरीके से सोने की तस्करी के लिए आर्थिक प्रोत्साहन पैदा हो सकता है।
यही वजह है कि सोने पर आयात शुल्क की मौजूदा व्यवस्था को लेकर भी बहस चल रही है। विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि सरकार को शुल्क दर, घरेलू सोने के भंडार और गोल्ड मॉनेटाइजेशन जैसी योजनाओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
PM मोदी की सोना कम खरीदने की अपील
सोने के बढ़ते आयात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील की थी।
सरकार की चिंता यह है कि सोने की भारी खरीद से देश का आयात बिल बढ़ता है और विदेशी मुद्रा बाहर जाती है।
लेकिन दूसरी ओर, देश का ज्वेलरी उद्योग इस तरह की अपील को लेकर चिंतित है। त्योहारी और शादी के सीजन से पहले अगर सोने की मांग कमजोर होती है तो इसका असर ज्वेलर्स, छोटे कारोबारियों, कारीगरों और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े लोगों पर पड़ सकता है।
UAE को लेकर सरकार के सामने क्या चुनौती है?
मौजूदा स्थिति में सरकार के सामने कई सवाल हैं।
एक तरफ भारत को बढ़ते सोना आयात और विदेशी मुद्रा के इस्तेमाल को नियंत्रित करना है। दूसरी तरफ भारत-UAE CEPA के तहत मिलने वाली व्यापारिक रियायतें दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई हैं।
अगर UAE से सोने का आयात लगातार इसी गति से बढ़ता है, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि शुल्क रियायत का इस्तेमाल समझौते में तय नियमों के मुताबिक ही हो।
इसीलिए Rules of Origin की निगरानी, आयातकों की जांच और व्यापार डेटा की लगातार समीक्षा आने वाले समय में महत्वपूर्ण हो सकती है।
200 टन तक सोना आयात करने की रियायत
भारत-UAE CEPA के तहत UAE से सोना आयात करने के लिए एक Tariff Rate Quota (TRQ) व्यवस्था भी है। इसके तहत भारत ने UAE से हर साल निर्धारित सीमा तक सोना आयात करने पर रियायती शुल्क की व्यवस्था की है।
जुलाई 2026 में सरकार ने FY 2025-26 में जारी कुछ गोल्ड TRQ ऑथराइजेशन की वैधता को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाया था। इससे यह व्यवस्था फिलहाल व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
UAE से सोने के आयात में लगातार बढ़ोतरी के बाद अब आने वाले महीनों के आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण होंगे। अगर UAE की हिस्सेदारी आगे भी तेजी से बढ़ती है, तो भारत-UAE CEPA के तहत सोने को मिलने वाली शुल्क रियायत की समीक्षा की मांग और तेज हो सकती है।
हालांकि फिलहाल यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि UAE के जरिए नियमों का उल्लंघन हो रहा है। उपलब्ध आंकड़े केवल यह बताते हैं कि भारत के सोना आयात में UAE की भूमिका तेजी से बढ़ी है और 1 फीसदी की शुल्क रियायत इस बदलाव की संभावित वजहों में से एक है।
