ओडिशा DGP चयन पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा सवाल, CBI जांच को लेकर राज्य सरकार से मांगी स्पष्टता

नई दिल्ली: ओडिशा के अगले पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर चल रहे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार से कई अहम सवाल पूछे। अदालत ने खास तौर पर यह जानना चाहा कि वरिष्ठ IPS अधिकारी सुशांत कुमार नाथ का नाम DGP पद के लिए UPSC को भेजे जाने के समय क्या ओडिशा सरकार को CBI की उस कार्रवाई की जानकारी थी, जिसमें उनसे पूछताछ किए जाने की बात सामने आई थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं, ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने नाथ के नाम को पहले DGP चयन की प्रक्रिया में शामिल करने और बाद में उनकी उम्मीदवारी से जुड़े बदलावों के घटनाक्रम पर स्पष्टता मांगी।

CBI की जांच और DGP चयन को लेकर सवाल

मामला ओडिशा में सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती से जुड़े कथित अनियमितता मामले की CBI जांच से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, CBI ने इस मामले में 12 नवंबर 2025 को FIR दर्ज की थी। अदालत में यह भी बताया गया कि उस FIR में IPS अधिकारी सुशांत कुमार नाथ का नाम आरोपी के तौर पर दर्ज नहीं था।

नाथ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को आरोपी नहीं बनाया गया है और CBI की ओर से उनसे पूछताछ को लेकर स्थिति को भी इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

मई 2026 में UPSC को भेजा गया था नाम

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि CBI की FIR नवंबर 2025 में दर्ज होने के बाद मई 2026 में सुशांत कुमार नाथ का नाम DGP पद के लिए UPSC को भेजा गया था।

इसी क्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया कि यदि सरकार को जांच से संबंधित जानकारी पहले से थी, तो क्या यह जानकारी UPSC के सामने रखी गई थी। अदालत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि DGP चयन जैसी प्रक्रिया में संबंधित तथ्यों को चयन संस्था के सामने रखने की जिम्मेदारी किस तरह निभाई गई।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इसी घटनाक्रम को स्पष्ट करने की जरूरत बताई और राज्य सरकार से यह बताने को कहा कि CBI की कार्रवाई की जानकारी कब मिली और उसके बाद राज्य ने क्या कदम उठाए।

पहले जारी हुआ Integrity Certificate, बाद में वापस लिया गया

सुशांत कुमार नाथ के मामले में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उनके Integrity Certificate को लेकर भी है। रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य सरकार ने पहले उनके पक्ष में Integrity Certificate जारी किया था, लेकिन बाद में CBI से संबंधित जानकारी सामने आने के बाद इसे वापस ले लिया गया।

इसके बाद DGP पद के लिए UPSC को भेजे जाने वाले नामों की सूची में बदलाव किया गया। इसी कार्रवाई को लेकर याचिकाकर्ताओं और अदालत की सहायता कर रहे अमिकस क्यूरी की ओर से कई सवाल उठाए गए हैं।

सुशांत कुमार नाथ की ओर से क्या कहा गया?

नाथ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी ने सुनवाई के दौरान कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई आरोप नहीं है और उन्हें SI भर्ती मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है।

उनकी ओर से यह भी दलील दी गई कि नाथ ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड के पदेन अध्यक्ष के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे और CBI की ओर से पूछताछ की स्थिति को उनके खिलाफ आपराधिक आरोप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इस मामले में नाथ के DGP पद के लिए विचार से बाहर किए जाने को लेकर भी अदालत के सामने कानूनी और प्रक्रियात्मक सवाल रखे गए हैं।

DGP चयन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ एक अधिकारी की उम्मीदवारी का मुद्दा नहीं है, बल्कि ओडिशा में DGP चयन की पूरी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।

मामले में यह मुद्दा भी सामने आया है कि प्रारंभिक सूची UPSC को भेजे जाने के बाद कुछ अधिकारियों को DGP स्तर तक पदोन्नत किया गया और बाद में चयन प्रक्रिया में उनकी स्थिति को लेकर सवाल उठे।

अदालत के सामने यह भी चर्चा हुई कि अस्थायी ex-cadre DGP पद बनाए जाने और अधिकारियों की रैंक में बदलाव के जरिए चयन के लिए पात्र अधिकारियों का दायरा प्रभावित हुआ या नहीं।

Prakash Singh फैसले का भी संदर्भ

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2006 के Prakash Singh फैसले में पुलिस सुधार और DGP नियुक्ति से संबंधित दिशा-निर्देशों का भी संदर्भ आया।

इस व्यवस्था के तहत राज्य के पुलिस प्रमुख की नियुक्ति की प्रक्रिया में UPSC की भूमिका महत्वपूर्ण है और पात्र वरिष्ठ अधिकारियों में से एक पैनल तैयार किया जाना होता है। मौजूदा मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से यह सवाल उठाया गया है कि ओडिशा में अपनाई गई प्रक्रिया इन दिशा-निर्देशों के अनुरूप थी या नहीं।

अमिकस क्यूरी ने भी उठाए प्रक्रिया पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट की सहायता के लिए नियुक्त अमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने भी चयन प्रक्रिया में किए गए बदलावों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से Integrity Certificate और पात्र अधिकारियों की सूची में हुए बदलावों पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता बताई।

सुनवाई के दौरान अमिकस क्यूरी की भूमिका को लेकर कुछ तीखी टिप्पणी भी हुई। इसके बाद CJI सूर्यकांत ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि कभी-कभी ऐसी टिप्पणियां की जाती हैं जिससे अदालत को अमिकस की सहायता से वंचित होना पड़ सकता है।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई आगे जारी रखने का फैसला किया है। राज्य सरकार की ओर से उठाए गए सवालों पर विस्तृत जवाब पेश किए जाने की उम्मीद है।

अब अदालत के सामने मुख्य मुद्दों में यह शामिल है कि CBI की जांच से संबंधित जानकारी राज्य सरकार को कब और किस रूप में मिली, सुशांत कुमार नाथ का नाम UPSC को भेजते समय सरकार की स्थिति क्या थी, Integrity Certificate वापस लेने का आधार क्या था और DGP चयन की पूरी प्रक्रिया तय कानूनी दिशा-निर्देशों के अनुरूप रही या नहीं।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इन सवालों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार का पक्ष और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

Share this News

By EDITOR

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x