पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया है कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना को गुवाहाटी तक विस्तारित करने की मंजूरी मिल गई है। इस फैसले को उन्होंने असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इसे परियोजना की शुरुआती मंजूरी के रूप में देखा जाना चाहिए। बुलेट ट्रेन को गुवाहाटी तक पहुंचाने के लिए अभी कई तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर काम होना बाकी है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस परियोजना के लिए विस्तृत सर्वे, रेलवे लाइन का निर्धारित मार्ग, तकनीक का चयन और निर्माण की योजना तैयार करनी होगी। सबसे बड़ी चुनौती रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर को पार करना होगी। यह संकरा गलियारा पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। यहां पहले से राष्ट्रीय राजमार्ग और मौजूदा रेलवे लाइन मौजूद हैं, इसलिए बुलेट ट्रेन के लिए अलग रेल कॉरिडोर बनाने का विकल्प तलाशना होगा।
गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन पहुंचाने के प्रस्ताव को मिली मंजूरी
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली से पूर्वोत्तर भारत को बुलेट ट्रेन के माध्यम से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना में गुवाहाटी को शामिल करने की मंजूरी दी गई है।
सरमा ने कहा कि गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन लाने की मंजूरी इस दिशा में पहली बड़ी सकारात्मक प्रगति है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि परियोजना का पूरा खाका तैयार हो चुका है या निर्माण तत्काल शुरू होने जा रहा है। इसके लिए अभी कई चरणों से गुजरना होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना को जमीन पर उतारने से पहले सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके बाद रेलवे लाइन का पूरा रूट, निर्माण की तकनीक और दूसरी जरूरी व्यवस्थाएं तय की जाएंगी। बुलेट ट्रेन के लिए अलग रेलवे लाइन बनाना भी आवश्यक होगा, क्योंकि इस ट्रेन का संचालन मौजूदा रेलवे ट्रैक पर नहीं किया जा सकता।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर से बुलेट ट्रेन को निकालना होगी सबसे बड़ी चुनौती
इस परियोजना में सबसे जटिल हिस्सा सिलीगुड़ी कॉरिडोर को पार करना माना जा रहा है। इसे आमतौर पर ‘चिकन नेक’ (Chicken’s Neck) के नाम से जाना जाता है। यह पश्चिम बंगाल में स्थित एक संकरा भू-भाग है, जो पूर्वोत्तर के राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। रणनीतिक और भौगोलिक दृष्टि से इस क्षेत्र का विशेष महत्व है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर के कुछ हिस्सों में इसकी चौड़ाई लगभग 22 किलोमीटर है, जबकि कुछ स्थानों पर यह केवल 16 किलोमीटर तक रह जाती है। ऐसे सीमित क्षेत्र में पहले से ही राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे लाइन मौजूद हैं।
ऐसे में बुलेट ट्रेन के लिए अलग ट्रैक तैयार करना आसान नहीं होगा। सरकार को यह तय करना होगा कि इस संकरे गलियारे में बुलेट ट्रेन का रास्ता जमीन के ऊपर बनाया जाए या भूमिगत रेलवे लाइन तैयार की जाए।
इन दोनों विकल्पों के लिए अलग-अलग तकनीकी और निर्माण संबंधी व्यवस्थाओं की जरूरत होगी। परियोजना की लागत और निर्माण की समयसीमा भी इस बात पर निर्भर कर सकती है कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर को पार करने के लिए कौन-सा तरीका अपनाया जाता है।
मौजूदा रेलवे ट्रैक पर नहीं चलेगी बुलेट ट्रेन
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि बुलेट ट्रेन को सामान्य ट्रेनों की तरह मौजूदा रेलवे ट्रैक पर नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए पूरी तरह अलग रेलवे कॉरिडोर तैयार करना होगा।
इसका मतलब है कि गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए केवल मौजूदा रेलवे लाइन का विस्तार पर्याप्त नहीं होगा। परियोजना के तहत नए ट्रैक, संबंधित बुनियादी ढांचे और हाई-स्पीड ट्रेन संचालन के अनुकूल तकनीकी व्यवस्था विकसित करनी होगी।
सरमा के अनुसार, सिलीगुड़ी कॉरिडोर में निर्माण की तकनीक के आधार पर परियोजना में काफी अधिक निवेश की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि इस हिस्से को पार करने के लिए अपनाई जाने वाली तकनीक और निर्माण पद्धति के अनुसार लागत दो से तीन गुना तक अधिक हो सकती है।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस संभावित लागत वृद्धि का कोई निश्चित आंकड़ा नहीं बताया है। वास्तविक खर्च का अनुमान विस्तृत सर्वे और तकनीकी योजना तैयार होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अश्विनी वैष्णव और पीएम मोदी से चर्चा के बाद मिली मंजूरी
हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि शुरुआत में गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन के प्रस्ताव को लेकर कुछ कठिनाइयां सामने आई थीं। इसके बाद उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से इस विषय पर बातचीत की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी पूर्वोत्तर को इस परियोजना से जोड़ने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, इन चर्चाओं और उनके अनुरोध के बाद प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नेटवर्क में गुवाहाटी को शामिल करने की मंजूरी मिली।
सरमा ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया। उन्होंने इसे असम और पूर्वोत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण निर्णय बताया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह अपनी अगली दिल्ली यात्रा के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से फिर मुलाकात करेंगे। इस बैठक में परियोजना के तकनीकी पहलुओं, प्रस्तावित रेल मार्ग और आगे की योजना को लेकर जानकारी हासिल की जाएगी।
सर्वे और रूट तय होने के बाद आगे बढ़ेगी परियोजना
गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन पहुंचाने की मंजूरी के बाद अब परियोजना के अगले चरणों पर काम होना बाकी है। इसमें सबसे पहले संभावित रेल मार्ग का सर्वे किया जाएगा। इसके बाद यह तय होगा कि ट्रेन किन क्षेत्रों से होकर गुजरेगी और सिलीगुड़ी कॉरिडोर में किस तरह का निर्माण किया जाएगा।
परियोजना के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक और निर्माण की रणनीति भी अंतिम रूप से तय की जानी है। इन सभी पहलुओं के आधार पर निवेश, निर्माण और क्रियान्वयन की विस्तृत योजना तैयार होगी।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी स्पष्ट किया है कि अभी यह मंजूरी शुरुआती चरण की प्रगति है। परियोजना का विस्तृत खाका, तकनीकी चयन, सर्वेक्षण और निर्माण की प्रक्रिया आगे पूरी की जाएगी।
इसलिए फिलहाल गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन पहुंचने की मंजूरी को पूर्वोत्तर के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है, लेकिन ट्रेन का संचालन कब शुरू होगा, इसकी समयसीमा अभी सामने नहीं आई है।
भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़ सकता है पूर्वोत्तर
भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क विकसित करने की योजना के तहत दिल्ली से पूर्वोत्तर को जोड़ने का प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुवाहाटी को इस प्रस्तावित कनेक्टिविटी में शामिल करने से पूर्वोत्तर क्षेत्र को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, इस परियोजना का वास्तविक स्वरूप और निर्माण की समयसीमा अभी तय होना बाकी है। खासतौर पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर की भौगोलिक सीमाओं और रणनीतिक महत्व को देखते हुए यहां रेल लाइन का निर्माण परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू होगा।
फिलहाल असम सरकार और केंद्र के बीच आगे की बातचीत, सर्वेक्षण और तकनीकी योजना तैयार होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बुलेट ट्रेन का गुवाहाटी तक प्रस्तावित मार्ग किस तरह विकसित किया जाएगा।
