फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों कलाकारों की बढ़ती फीस और उनके साथ आने वाले स्टाफ यानी एंटॉरेज के खर्च को लेकर बहस तेज हो गई है। फिल्मों का बजट लगातार बढ़ने के बीच अब अनुभवी फिल्म निर्माता केसी बोकाडिया ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। उन्होंने अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सलमान खान और रजनीकांत जैसे बड़े सितारों की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा कि इन कलाकारों ने कभी अपने निजी स्टाफ की सैलरी का बोझ प्रोड्यूसर्स पर नहीं डाला।
केसी बोकाडिया ने मौजूदा दौर के कुछ कलाकारों से अपील की कि वे फिल्म निर्माताओं की आर्थिक स्थिति को समझें और अपने साथ आने वाले स्टाफ तथा दूसरी सुविधाओं के खर्च को लेकर थोड़ी जिम्मेदारी दिखाएं। उनके मुताबिक, आजकल फिल्मों की शूटिंग के दौरान कलाकारों की जरूरतों और उनके साथ आने वाले लोगों की संख्या के कारण निर्माताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सलमान खान और रजनीकांत जैसे बड़े कलाकारों ने अपने व्यवहार से एक मिसाल कायम की है। बोकाडिया ने दूसरे कलाकारों से भी कम से कम इन सितारों के स्तर की पेशेवर समझ और शालीनता दिखाने की अपील की।
अमिताभ, शाहरुख और सलमान की कार्यशैली का दिया उदाहरण
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में केसी बोकाडिया ने कहा कि अमिताभ बच्चन ने कभी अपने स्टाफ की सैलरी प्रोड्यूसर से नहीं ली। उन्होंने शाहरुख खान, सलमान खान और रजनीकांत का नाम लेते हुए कहा कि इन कलाकारों ने भी अपने निजी कर्मचारियों का वेतन निर्माताओं पर नहीं डाला।
बोकाडिया ने कहा, “अमिताभ बच्चन ने कभी अपने स्टाफ की सैलरी नहीं ली। शाहरुख खान, सलमान खान, रजनीकांत, इन सभी ने कभी प्रोड्यूसर्स से अपने स्टाफ को पैसे देने के लिए नहीं कहा। कम से कम उनके स्तर तक पहुंचिए और उनकी तरह शालीनता दिखाइए।”
फिल्म निर्माता के इस बयान का मुख्य जोर इस बात पर था कि बड़े कलाकारों को अपनी व्यक्तिगत सुविधाओं और निजी स्टाफ के खर्च की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए। उनके मुताबिक, फिल्म के निर्माण से जुड़े खर्च पहले ही काफी होते हैं और ऐसे में कलाकारों की अतिरिक्त मांगें प्रोड्यूसर्स के बजट को और बढ़ा सकती हैं।
जैकी श्रॉफ से जुड़ा पुराना किस्सा भी सुनाया
केसी बोकाडिया ने बातचीत के दौरान अभिनेता जैकी श्रॉफ से जुड़ा एक पुराना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में एक शूटिंग के दौरान जैकी श्रॉफ के ठहरने की व्यवस्था एक डबल रूम में की गई थी, जबकि बोकाडिया को लगा कि अभिनेता को एक सुइट मिलना चाहिए।
बोकाडिया ने इस व्यवस्था को देखकर खुद हस्तक्षेप किया और इस बात पर ध्यान दिया कि अभिनेता को बेहतर कमरा उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, उनके मुताबिक जैकी श्रॉफ को इस बात से कोई खास परेशानी नहीं थी। उन्होंने कमरे को लेकर कोई बड़ी मांग नहीं की और न ही इसे अपने लिए मुद्दा बनाया।
इस उदाहरण के जरिए बोकाडिया ने पुराने और मौजूदा दौर के फिल्म सेट पर कलाकारों की जरूरतों और काम करने के तरीकों में आए बदलाव की ओर इशारा किया।
चार से दस वैनिटी वैन की मांग पर जताई चिंता
फिल्म निर्माता ने कहा कि आजकल कुछ कलाकार शूटिंग के दौरान चार से लेकर दस तक वैनिटी वैन की मांग करते हैं। इन वैनिटी वैन का इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के लिए किया जाता है। कुछ कलाकार सामान्य वैन की जगह जिम जैसी सुविधाओं से लैस वैनिटी वैन चाहते हैं।
बोकाडिया के मुताबिक, इन सुविधाओं और कलाकारों के निजी स्टाफ का खर्च कई बार प्रोड्यूसर को उठाना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कलाकार अपने निजी कर्मचारियों को साथ लेकर आते हैं, तो उनकी सैलरी और दूसरी व्यक्तिगत जरूरतों का खर्च फिल्म निर्माता पर क्यों डाला जाना चाहिए?
उन्होंने कलाकारों से कहा कि उन्हें निर्माताओं की आर्थिक स्थिति को समझना चाहिए। फिल्म बनाने में पहले से ही कई तरह के खर्च शामिल होते हैं। ऐसे में हर छोटी-बड़ी सुविधा का अतिरिक्त बोझ प्रोड्यूसर पर डालना उचित नहीं है।
क्रू मेंबर्स की फीस को लेकर भी बोले केसी बोकाडिया
केसी बोकाडिया ने सिर्फ कलाकारों के एंटॉरेज खर्च पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि फिल्म निर्माण से जुड़े कुछ अन्य कर्मचारियों की बढ़ती फीस पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आजकल शूटिंग के दौरान कुछ कर्मचारियों और क्रू मेंबर्स की एक दिन की फीस भी काफी ज्यादा हो गई है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चाय बनाने वाले कर्मचारी से लेकर मैनेजर तक के लिए प्रतिदिन 1.5 लाख रुपये तक की फीस मांगे जाने की बातें सामने आती हैं। कुछ लोग एक दिन की शूटिंग के लिए 1 से 2 लाख रुपये तक चार्ज करते हैं, जबकि उनके मुताबिक अब कई लोग 50 हजार रुपये प्रतिदिन से कम पर काम करने को तैयार नहीं होते।
बोकाडिया ने कहा कि शूटिंग के लिए सामान्य वैन की जगह जिम की सुविधा वाली वैन की मांग भी की जाती है। उन्होंने इस तरह की मांगों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि निर्माताओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
‘प्रोड्यूसर पर थोड़ी दया कीजिए’
केसी बोकाडिया ने कलाकारों और फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें प्रोड्यूसर की आर्थिक स्थिति को समझना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर खर्च इसी तरह बढ़ते रहे, तो फिल्म बनाना निर्माताओं के लिए और मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने कहा, “हम उनसे कहते हैं कि कृपया प्रोड्यूसर पर थोड़ी दया कीजिए, वरना एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब हमें चार लोगों को किसी का शरीर कंधे पर उठाने के लिए रखना पड़ेगा।”
उनकी इस टिप्पणी के जरिए यह साफ है कि वह फिल्म निर्माण की बढ़ती लागत को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि कलाकारों और क्रू मेंबर्स को अपनी फीस और सुविधाओं की मांग करते समय फिल्म के कुल बजट तथा निर्माता की स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए।
फिल्मों के बजट में कलाकारों की फीस, शूटिंग लोकेशन, तकनीकी टीम, सेट, उपकरण और प्रचार जैसे कई खर्च शामिल होते हैं। ऐसे में एंटॉरेज और अतिरिक्त सुविधाओं पर होने वाला खर्च भी निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। केसी बोकाडिया ने अपने बयान में पुराने दौर के कलाकारों की कार्यशैली का उदाहरण देते हुए मौजूदा फिल्म इंडस्ट्री में खर्च को लेकर अधिक संतुलन और जिम्मेदारी की जरूरत पर जोर दिया है।
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