मुंबई के ऑफ स्पिनर तानुष कोटियन इन दिनों शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। रणजी ट्रॉफी में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्होंने भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने की अपनी दावेदारी और मजबूत कर दी है। हरियाणा के खिलाफ पिछले सप्ताह 8 विकेट लेने के बाद अब उन्होंने रेलवे के खिलाफ पहली पारी में 7 विकेट झटककर एक बार फिर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कोटियन का मानना है कि वह भारतीय टीम में चयन के काफी करीब पहुंच चुके हैं। हालांकि, अंतिम फैसला चयनकर्ताओं को ही करना है।

28 वर्षीय कोटियन का यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है, जब भारतीय टीम को घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगले साल होने वाली टेस्ट सीरीज की तैयारी करनी है। भारतीय क्रिकेट में अच्छे ऑफ स्पिनर की तलाश के बीच कोटियन की मौजूदा फॉर्म उनके लिए बड़ा मौका बन सकती है।

रेलवे के खिलाफ 7 विकेट लेकर मुंबई को दिलाई मजबूती

रणजी ट्रॉफी के एलीट ग्रुप-डी मुकाबले में बुधवार को मुंबई और रेलवे के बीच खेले जा रहे मैच की पहली पारी में तानुष कोटियन ने शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने 45 रन देकर 7 विकेट हासिल किए। इससे पहले हरियाणा के खिलाफ पिछले सप्ताह उन्होंने अपने सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 81 रन देकर 8 विकेट लिए थे।

लगातार दो मुकाबलों में इस तरह का प्रदर्शन कोटियन की लय और आत्मविश्वास को दिखाता है। घरेलू क्रिकेट में उनकी गेंदबाजी लगातार प्रभावी रही है और वह विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में सफल हो रहे हैं।

इस सीजन के फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कोटियन अब तक सात मैचों में 37 विकेट ले चुके हैं। इनमें रणजी ट्रॉफी के मौजूदा मुकाबले को शामिल करते हुए 22 विकेट रणजी प्रतियोगिता में आए हैं। उनका प्रदर्शन केवल एक टूर्नामेंट तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने दलीप ट्रॉफी, ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ मुकाबलों और रणजी ट्रॉफी में भी अपनी गेंदबाजी से प्रभावित किया है।

‘मुझे लगता है कि मैं करीब हूं’, कोटियन ने कही बड़ी बात

लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद तानुष कोटियन को भी महसूस हो रहा है कि वह भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने के करीब हैं। ब्रेबोर्न स्टेडियम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने अपने चयन को लेकर आत्मविश्वास जताया।

कोटियन ने कहा, “मुझे लगता है कि मैं करीब हूं। यह चयनकर्ताओं पर निर्भर करता है, लेकिन मैं हर पारी को एक अवसर की तरह लेता हूं।”

उनके इस बयान से साफ है कि वह भारतीय टीम में चयन की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनका ध्यान अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखने पर है। घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट हासिल करना उनके लिए सबसे अहम है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज को देखते हुए उनके पास चयनकर्ताओं के सामने अपनी उपयोगिता साबित करने का अच्छा मौका है।

पिच को समझने और गेंदबाजी में बदलाव से मिला फायदा

तानुष कोटियन के करियर की शुरुआत 2018 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट से हुई थी, लेकिन उनके प्रदर्शन में लगातार सुधार धीरे-धीरे देखने को मिला। स्पिन गेंदबाजों के लिए अनुभव और परिस्थितियों की समझ बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। कोटियन का मानना है कि अब वह अलग-अलग पिचों और परिस्थितियों को पहले से बेहतर समझने लगे हैं।

हाल ही में मुंबई के बीकेसी मैदान पर उन्होंने करियर का सर्वश्रेष्ठ मैच प्रदर्शन करते हुए कुल 151 रन देकर 11 विकेट हासिल किए थे। हालांकि, वहां की पिच धीमी थी और घरेलू क्रिकेट में अक्सर ऐसी पिचों पर स्पिन गेंदबाजों को मदद मिलती है।

इसके मुकाबले ब्रेबोर्न स्टेडियम की पिच घरेलू टेस्ट मैचों में इस्तेमाल होने वाली पिचों के ज्यादा करीब थी। यहां गेंद अपेक्षाकृत तेजी से आती है और स्पिनर के पास बल्लेबाज को अतिरिक्त गति से परेशान करने का अवसर रहता है। ऐसी परिस्थितियों में गेंद की दिशा, सटीकता और कटर का सही इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो जाता है।

कोटियन ने बताया कि इस पिच पर सीधी गेंद काफी प्रभावी रही। उन्होंने कहा, “इस विकेट पर सीधी गेंद प्रभावी रही। इसलिए सटीक गेंदबाजी करना और दबाव बनाने वाली गेंदें डालना महत्वपूर्ण था। धैर्य सबसे जरूरी था। अगर विकेट नहीं भी मिल रहे थे, तब भी बल्लेबाजों पर दबाव बनाने से वे जल्दबाजी में गलत शॉट खेलने लगे।”

उनके मुताबिक, केवल विकेट लेने के इरादे से गेंदबाजी करने के बजाय बल्लेबाजों को लगातार दबाव में रखना भी उतना ही जरूरी है। जब बल्लेबाज रन बनाने के लिए जोखिम उठाने लगते हैं, तो गेंदबाज को विकेट हासिल करने के मौके मिलते हैं।

गेंदबाजी के एंगल और क्रीज के इस्तेमाल पर किया काम

कोटियन ने अपनी गेंदबाजी में सुधार के लिए अनुभवी और विशेषज्ञ कोचों के साथ भी काम किया है। इस दौरान उन्होंने गेंदबाजी के एंगल और क्रीज का इस्तेमाल करने की तकनीक पर विशेष ध्यान दिया।

स्पिन गेंदबाजी में एक ही तरह से लगातार गेंद डालने के बजाय क्रीज के अलग-अलग हिस्सों का इस्तेमाल करना बल्लेबाज के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। गेंद की दिशा और लंबाई में छोटे बदलाव भी बल्लेबाज को गलत फैसला लेने पर मजबूर कर सकते हैं।

कोटियन ने बताया कि उन्होंने इस तकनीक का इस्तेमाल रेलवे के खिलाफ भी किया। उनकी दो सीधी गेंदों पर बल्लेबाज एलबीडब्ल्यू आउट हुए। इससे पता चलता है कि वह केवल टर्न पर निर्भर रहने के बजाय अपनी गेंदबाजी में विविधता लाने पर भी काम कर रहे हैं।

शार्दुल ठाकुर और सिद्धेश लाड की कप्तानी में मिला अलग अनुभव

एक स्पिन गेंदबाज के लिए कप्तान की रणनीति और मैदान पर मिलने वाला सहयोग भी काफी मायने रखता है। अलग-अलग कप्तानों के नेतृत्व में खेलने से गेंदबाज को अपनी योजना और रणनीति में बदलाव करना पड़ता है।

कोटियन ने मुंबई की कप्तानी को लेकर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले साल शार्दुल ठाकुर की कप्तानी में खेलने का अनुभव अलग था, जबकि इस साल सिद्धेश लाड का नेतृत्व अधिक शांत और संयमित रहा है।

उनके अनुसार, शार्दुल ठाकुर का अंदाज ज्यादा आक्रामक था, जबकि सिद्धेश लाड शांत तरीके से टीम को आगे बढ़ाते हैं। कोटियन ने दोनों कप्तानों के नेतृत्व में गेंदबाजी का आनंद लिया है।

मौजूदा सीजन में उनका प्रदर्शन बताता है कि वह कप्तान की रणनीति के अनुसार खुद को ढालने में सफल रहे हैं। एक स्पिनर के लिए सही समय पर गेंदबाजी का मौका मिलना भी अहम होता है। कोटियन की मौजूदा लय को देखते हुए यह माना जा सकता है कि मुंबई के लिए वह अब एक महत्वपूर्ण गेंदबाजी विकल्प बन चुके हैं।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज पर टिकी नजरें

तानुष कोटियन के सामने अब सबसे बड़ा लक्ष्य अपने प्रदर्शन को इसी तरह जारी रखना है। रणजी ट्रॉफी में मुंबई का अगला लीग मुकाबला 17 जनवरी को होना है। इससे पहले प्रतियोगिता में मुंबई की टीम को विराम मिलेगा।

दूसरी ओर, भारतीय टीम 21 जनवरी को नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का पहला टेस्ट मैच खेलेगी। कोटियन की इच्छा होगी कि वह उस समय रणजी मुकाबले के बजाय भारतीय टीम के साथ मैदान पर उतरें।

हालांकि, भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिलना केवल घरेलू क्रिकेट में विकेटों की संख्या पर निर्भर नहीं करता। चयनकर्ता खिलाड़ी की निरंतरता, परिस्थितियों के अनुसार प्रदर्शन, तकनीकी क्षमता और टीम की जरूरतों को भी ध्यान में रखते हैं। कोटियन ने दलीप ट्रॉफी, ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ मैचों और रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करके अपनी दावेदारी पेश की है।

आने वाले कुछ महीने उनके करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अगर वह अपनी मौजूदा लय बनाए रखते हैं, तो भारतीय टीम में चयन की उम्मीद मजबूत हो सकती है। फिलहाल कोटियन के लिए हर मैच और हर पारी खुद को साबित करने का एक नया अवसर है।

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By EDITOR

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