केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) यानी LJP (RV) अब बिहार से बाहर अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की तैयारी में है। पार्टी की नजर खास तौर पर उत्तर प्रदेश पर है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी के भीतर यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन खड़ा करने और जरूरत पड़ने पर चुनाव अकेले लड़ने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
LJP (RV) फिलहाल केंद्र में BJP के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने की संभावना को पार्टी की संगठनात्मक विस्तार की रणनीति के साथ-साथ भविष्य की NDA सीट शेयरिंग बातचीत के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
लखनऊ में होगा राम विलास पासवान की पुण्यतिथि का बड़ा कार्यक्रम
चिराग पासवान के पिता और LJP के संस्थापक राम विलास पासवान की पुण्यतिथि 8 अक्टूबर को है। इस बार पार्टी ने पुण्यतिथि का बड़ा कार्यक्रम बिहार की जगह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित करने का फैसला किया है।
यह बदलाव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी पहली बार उत्तर प्रदेश में राम विलास पासवान की पुण्यतिथि का इतना बड़ा आयोजन करने जा रही है।
हालांकि, 2021 में राम विलास पासवान की पहली पुण्यतिथि का कार्यक्रम दिल्ली में आयोजित किया गया था। लेकिन इस बार लखनऊ को चुना जाना पार्टी की यूपी में बढ़ती राजनीतिक दिलचस्पी का संकेत माना जा रहा है।
पार्टी ने इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश और बिहार के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ दोनों राज्यों के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को भी आमंत्रित किया है।
LJP (RV) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेश भट्ट के मुताबिक, पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। कार्यक्रम में पार्टी के संस्थापक राम विलास पासवान के विचारों और उनके राजनीतिक योगदान को सामने रखा जाएगा।
यूपी की सभी 403 सीटों पर तैयारी की बात
LJP (RV) ने इस साल उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाई हैं। 15 जुलाई को लखनऊ में पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। इसके बाद 27 और 28 सितंबर को प्रयागराज में ‘Youth Bole Toh’ कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में Gen-Z, छात्रों और युवाओं के साथ संवाद पर जोर दिया गया था। इसी दौरान चिराग पासवान ने संकेत दिया था कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
पार्टी नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश की राज्य इकाई को संगठन मजबूत करने और सभी विधानसभा क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए काम करने को कहा है। इसका उद्देश्य आने वाले समय में पार्टी को चुनावी मुकाबले के लिए तैयार करना है।
पार्टी के लिए यह तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर NDA में सीट शेयरिंग होती है तो मजबूत संगठन होने से उसे अधिक सीटों की मांग रखने में मदद मिल सकती है। वहीं, अगर बातचीत पार्टी के मुताबिक नहीं होती है तो उसके पास अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प भी मौजूद रहेगा।
NDA के साथ रिश्ते और अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प
LJP (RV) का उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने का विचार पहली बार सामने नहीं आया है। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भी चिराग पासवान ने तत्कालीन JD(U) के साथ सीट शेयरिंग को लेकर मतभेदों के बाद NDA के राज्य स्तरीय सीट बंटवारे से अलग होकर चुनाव लड़ा था।
हालांकि, उस समय पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर BJP को समर्थन जारी रखा था।
LJP ने 2017 में मणिपुर और 2019 में झारखंड विधानसभा चुनाव भी स्वतंत्र रूप से लड़ा था।
अब उत्तर प्रदेश में भी पार्टी इसी तरह का विकल्प खुला रखना चाहती है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर NDA के भीतर सीट शेयरिंग में पार्टी को अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिलती है, तो वह यूपी की सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहेगी।
इस रणनीति के जरिए पार्टी BJP के साथ गठबंधन बनाए रखते हुए अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और संगठनात्मक ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
BSP के लिए भी राजनीतिक संदेश
उत्तर प्रदेश में LJP (RV) के विस्तार का एक महत्वपूर्ण पहलू दलित वोट बैंक है। उत्तर प्रदेश में दलित आबादी करीब 21 प्रतिशत है, जो 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण सामाजिक समूह है।
उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति पर लंबे समय से बहुजन समाज पार्टी (BSP) का प्रभाव रहा है। ऐसे में LJP (RV) का यूपी में विस्तार BSP के लिए भी एक राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा सकता है।
हालांकि, किसी भी चुनाव में इसका वास्तविक प्रभाव पार्टी के संगठन, उम्मीदवारों, स्थानीय नेतृत्व और मौजूदा समर्थन आधार से आगे जाकर कितने मतदाताओं को अपने साथ जोड़ पाती है, इस पर निर्भर करेगा।
LJP (RV) के लिए यह केवल दलित वोटों तक सीमित रहने का सवाल नहीं है। पार्टी युवाओं, छात्रों और अन्य सामाजिक समूहों के बीच भी अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
चिराग पासवान के सामने दोहरी चुनौती
उत्तर प्रदेश में विस्तार की रणनीति चिराग पासवान के लिए आसान नहीं होगी। एक तरफ वह केंद्र सरकार में मंत्री हैं और BJP के नेतृत्व वाले NDA के महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। दूसरी तरफ, उनकी पार्टी बिहार से बाहर अपनी स्वतंत्र पहचान मजबूत करना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषक ज्ञानेंद्र यादव के मुताबिक, LJP (RV) के सामने एक तरह का संतुलन बनाने की चुनौती है। पार्टी के लिए BJP के साथ संबंध बनाए रखना जरूरी है, लेकिन अपना स्वतंत्र चुनावी आधार बढ़ाने से उसे भविष्य में सीट शेयरिंग के दौरान अधिक राजनीतिक ताकत मिल सकती है।
यूपी में संगठन का विस्तार इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सिर्फ यूपी नहीं, पंजाब और छत्तीसगढ़ पर भी नजर
LJP (RV) की नजर सिर्फ उत्तर प्रदेश पर नहीं है। पार्टी अगले साल होने वाले पंजाब और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में भी अपनी संभावनाएं तलाश रही है।
हाल ही में रायपुर दौरे के दौरान चिराग पासवान ने कहा था कि इन राज्यों में पार्टी चुनाव अकेले लड़ेगी या नहीं, इसका फैसला संबंधित राज्य समितियां करेंगी।
इससे संकेत मिलता है कि LJP (RV) बिहार से बाहर कई राज्यों में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की संभावना पर काम कर रही है।
लोकसभा में भी पार्टी की मौजूदगी
LJP (RV) के पास फिलहाल बिहार के बाहर बहुत बड़ा चुनावी संगठन नहीं है, लेकिन पार्टी की संसद और कुछ राज्यों की विधानसभाओं में मौजूदगी है।
2024 के लोकसभा चुनाव में NDA के साथ रहते हुए LJP (RV) ने बिहार में जिन पांच लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, उन सभी पर जीत दर्ज की थी।
वर्तमान में पार्टी के बिहार में 19 विधायक, नागालैंड में 2 विधायक और झारखंड में 1 विधायक हैं।
यह संख्या राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राजनीतिक ताकत नहीं है, लेकिन पार्टी नेतृत्व इसे बिहार से बाहर विस्तार के लिए शुरुआती आधार के रूप में देख रहा है।
लखनऊ का कार्यक्रम क्यों है महत्वपूर्ण?
राम विलास पासवान की पुण्यतिथि पर लखनऊ में होने वाला कार्यक्रम LJP (RV) के लिए केवल एक स्मरण कार्यक्रम नहीं है। यह उत्तर प्रदेश में पार्टी की भविष्य की राजनीतिक रणनीति को प्रदर्शित करने का भी अवसर होगा।
पार्टी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या वह बिहार से बाहर अपना संगठन खड़ा कर सकती है और क्या चिराग पासवान की लोकप्रियता को विधानसभा स्तर के चुनावी समर्थन में बदला जा सकता है।
उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें और देश का सबसे बड़ा मतदाता आधार होने के कारण यह राज्य किसी भी राजनीतिक दल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में LJP (RV) का यूपी में विस्तार आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में एक नया समीकरण जोड़ सकता है।
वहीं, NDA में शामिल एक अन्य सहयोगी दल JD(U) भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। पार्टी ने वाराणसी में राज्य स्तरीय कार्यकर्ता बैठक आयोजित करने की योजना बनाई है, जिसमें उसके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे एवं स्वास्थ्य मंत्री निशांत के शामिल होने की बात है।
ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में NDA के सहयोगी दलों की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता आने वाले महीनों में सीट शेयरिंग और गठबंधन की रणनीति को भी महत्वपूर्ण बना सकती है।
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