नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर 2026 को जो कुछ हुआ, उसने विमान में सवार 174 लोगों की जिंदगी को कुछ मिनटों के लिए बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंचा दिया। उड़ान के दौरान कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर उनके ओमानी को-पायलट द्वारा कथित तौर पर हमला किया गया। घटना के बाद विमान ने तेजी से ऊंचाई खोई और कुछ ही समय में करीब 14,000 फीट नीचे आ गया।
इस संकट के बीच कैप्टन स्मित मच्छर ने घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की। इसके बाद कुछ यात्रियों ने कॉकपिट में प्रवेश कर कथित हमलावर को काबू किया। विमान में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने बाद में नियंत्रण संभाला और विमान को सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा।
इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय पायलट के साथ चार इजरायली यात्रियों—यानिव हायून, ज़्विका मानेस, असफ राजुआन और डॉ. शोता मुसायेव—की भूमिका सामने आई है। अलग-अलग यात्रियों ने हमलावर को काबू करने, विमान को स्थिर करने और घायल पायलट की मदद करने में योगदान दिया।
30 सितंबर की सुबह: दुबई से शुरू हुई उड़ान
फ्लाइट FZ1073 ने 30 सितंबर 2026 की सुबह करीब 7:05 बजे दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से तेल अवीव के लिए उड़ान भरी थी। शुरुआत में उड़ान सामान्य थी। विमान में कुल 174 लोग सवार थे।
लेकिन उड़ान के दौरान कॉकपिट में स्थिति अचानक बिगड़ गई। इजरायली अधिकारियों और विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, ओमानी फर्स्ट ऑफिसर ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर कथित तौर पर हमला किया। घटना के बाद विमान की दिशा और ऊंचाई में अचानक बदलाव आया और हाइजैकिंग संबंधी अलर्ट भी जारी हुआ।
करीब 30 सेकंड में 14 हजार फीट नीचे आया विमान
घटना का सबसे खतरनाक हिस्सा वह था जब विमान ने बेहद तेजी से ऊंचाई खोनी शुरू कर दी। रिपोर्टों के मुताबिक, विमान करीब 30 सेकंड के भीतर लगभग 14,000 फीट नीचे आ गया। यात्रियों के मुताबिक उस समय विमान का झुकाव बेहद असामान्य हो गया था और उन्हें लगा कि विमान नियंत्रण से बाहर हो गया है।
इसी दौरान कॉकपिट के अंदर घायल भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने आगे की पूरी स्थिति बदल दी।
घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छर ने खोला कॉकपिट का दरवाजा
रिपोर्टों के अनुसार, हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छर कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। इसके बाद यात्रियों और क्रू के लिए कॉकपिट में प्रवेश का रास्ता खुल गया।
यात्रियों के मुताबिक, कैप्टन मच्छर दरवाजे के पास ही घायल अवस्था में थे। कॉकपिट में खून दिखाई दे रहा था और स्थिति बेहद गंभीर थी।
इसी दौरान कुछ यात्रियों ने जोखिम उठाकर कॉकपिट में प्रवेश किया।
कौन थे वो चार यात्री जिन्होंने संकट में संभाला मोर्चा?
इस घटना के बाद चार इजरायली यात्रियों के नाम सामने आए हैं—यानिव हायून, ज़्विका मानेस, असफ राजुआन और डॉ. शोता मुसायेव। रिपोर्टों के अनुसार, चारों ने अलग-अलग तरीके से संकट के दौरान मदद की।
1. यानिव हायून: पेशे से प्लंबर, ‘Air Crash Investigation’ से मिली मदद
यानिव हायून उन यात्रियों में शामिल थे जो सबसे पहले कॉकपिट की तरफ पहुंचे। हायून पेशे से प्लंबर बताए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब वह कॉकपिट में पहुंचे तो उन्होंने कथित हमलावर को विमान के कंट्रोल्स को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते देखा।
हायून के मुताबिक उन्होंने हमलावर को पकड़कर कॉकपिट से बाहर खींचा और दूसरे यात्रियों को बुलाकर उसे काबू करने में मदद की।
लेकिन उनकी भूमिका यहीं खत्म नहीं हुई।
विमान उस समय भी तेजी से नीचे जा रहा था। हायून ने बताया कि उन्होंने विमान के कंट्रोल्स को पकड़कर उसे ऊपर उठाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि वह टीवी शो ‘Air Crash Investigation’ देखते हैं और इसी वजह से उन्हें आपात स्थिति में विमान के कंट्रोल्स के बारे में कुछ बुनियादी जानकारी याद थी।
हालांकि, बाद में विमान में यात्रा कर रहे दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने कॉकपिट का नियंत्रण संभाल लिया।
2. ज़्विका मानेस: कॉकपिट में पहुंचकर हमलावर को काबू करने में मदद
ज़्विका मानेस भी उन यात्रियों में शामिल थे जो कॉकपिट तक पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अन्य यात्रियों के साथ मिलकर कथित हमलावर को काबू करने में मदद की।
यात्रियों ने मिलकर उसे नियंत्रित रखा ताकि वह दोबारा विमान के कंट्रोल्स तक न पहुंच सके।
3. असफ राजुआन: ‘विमान 90 डिग्री नीचे जा रहा था’
असफ राजुआन ने घटना के बाद उस भयावह पल को याद किया। उनके मुताबिक विमान अचानक नियंत्रण खोता हुआ नीचे जाने लगा और यात्रियों को समझ आ गया कि विमान में कुछ गंभीर गड़बड़ी हुई है।
राजुआन ने बताया कि जब वह कॉकपिट की तरफ पहुंचे तो दरवाजा खुला था और अंदर घायल पायलट दिखाई दे रहे थे। उन्होंने भी अन्य यात्रियों के साथ मिलकर कथित हमलावर को काबू करने में मदद की।
राजुआन के मुताबिक यात्रियों और क्रू ने मिलकर हमलावर को करीब 50 मिनट तक नियंत्रित रखा, जब तक विमान सऊदी अरब में लैंड नहीं कर गया।
उन्होंने बताया कि कुछ घंटे पहले तक वह छुट्टी मनाने के लिए थाईलैंड में थे, लेकिन कुछ ही समय बाद खुद को विमान के अंदर एक बेहद गंभीर आपात स्थिति में पाया।
4. डॉ. शोता मुसायेव: हमलावर को काबू करने के बाद घायल पायलट की मदद
डॉ. शोता मुसायेव पेशे से डेंटिस्ट हैं। वह भी शुरुआती यात्रियों में शामिल थे जो कॉकपिट में पहुंचे।
रिपोर्टों के अनुसार, हमलावर को काबू करने में मदद करने के बाद डॉ. मुसायेव ने गंभीर रूप से घायल कैप्टन स्मित मच्छर की स्थिति संभालने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि भारतीय पायलट की हालत काफी खराब थी और उनके सिर तथा हाथों से काफी खून बह रहा था।
यानी संकट के दौरान उनकी भूमिका केवल हमलावर को रोकने तक सीमित नहीं रही, बल्कि घायल पायलट को तत्काल सहायता देने में भी उन्होंने योगदान दिया।
फिर दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने संभाला विमान
यात्रियों द्वारा हमलावर को काबू करने के बाद भी एक बड़ी चुनौती बाकी थी—विमान को सुरक्षित उड़ाना और जमीन पर उतारना।
इसी फ्लाइट में दो अन्य पायलट यात्री के तौर पर मौजूद थे। उन्होंने कॉकपिट में पहुंचकर विमान का नियंत्रण संभाला। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा गया।
यही वजह रही कि घटना के बावजूद विमान में सवार सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया।
सऊदी अरब में हुई इमरजेंसी लैंडिंग
फ्लाइट को इजरायल ले जाने के बजाय सऊदी अरब के तबूक की ओर मोड़ा गया। वहां विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।
लैंडिंग के बाद घायल कैप्टन स्मित मच्छर और को-पायलट दोनों को अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक मच्छर की सर्जरी हुई और बाद में उनकी हालत स्थिर बताई गई।
यात्रियों को बाद में दूसरे विमान के जरिए तेल अवीव पहुंचाया गया।
इजरायली राष्ट्रपति ने चार यात्रियों को सम्मान देने की सिफारिश की
घटना के बाद इन चारों यात्रियों की भूमिका की भी चर्चा होने लगी। इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने यानिव हायून, ज़्विका मानेस, असफ राजुआन और डॉ. शोता मुसायेव को Presidential Award for Civilian Heroism के लिए सिफारिश करने की बात कही।
इससे पहले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर की भूमिका की भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से सराहना की थी।
हमले के पीछे क्या था मकसद?
यह सवाल अभी भी जांच का सबसे अहम हिस्सा है।
इजरायली अधिकारियों ने घटना को गंभीर सुरक्षा घटना माना है और UAE ने भी जांच शुरू की है। रिपोर्टों में हमले को संभावित रूप से विमान को क्रैश कराने की कोशिश के तौर पर देखा गया है, लेकिन घटना के पीछे की अंतिम वजह और मकसद की जांच अभी जारी है।
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने घटना की तह तक जाने की बात कही है। ईरान से संभावित संबंध को लेकर भी चर्चा हुई है, लेकिन 1 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों में ईरान के साथ किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
174 यात्रियों की जान कैसे बची?
पूरे घटनाक्रम को देखें तो विमान में मौजूद कई लोगों की भूमिका एक-दूसरे से जुड़ी हुई थी।
सबसे पहले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की। इसके बाद यात्रियों ने कॉकपिट में पहुंचकर कथित हमलावर को काबू किया। यानिव हायून ने विमान को स्थिर करने की कोशिश की, जबकि डॉ. शोता मुसायेव ने घायल कैप्टन की मदद की। ज़्विका मानेस और असफ राजुआन समेत अन्य यात्रियों ने हमलावर को नियंत्रित रखने में मदद की।
इसके बाद फ्लाइट में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाला और तबूक में सुरक्षित लैंडिंग कराई।
30 सितंबर 2026 की इस घटना ने दिखाया कि कुछ ही मिनटों में एक सामान्य यात्री उड़ान किस तरह गंभीर आपात स्थिति में बदल सकती है। 1 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के अनुसार, कैप्टन स्मित मच्छर और उन यात्रियों की त्वरित कार्रवाई ने विमान में सवार 174 लोगों को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई। मामले की जांच अभी जारी है।
