मुंबई/नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच Cockroach Janta Party (CJP) ने 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन मुंबई में प्रदर्शन का ऐलान किया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में होने वाले इस प्रदर्शन में पार्टी ने केवल CEC के इस्तीफे की मांग नहीं की है, बल्कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और 2023 के चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव की भी मांग रखी है।
CJP ने 25 सितंबर को अपनी मांगों को सार्वजनिक किया था। इसके बाद पार्टी ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से मुंबई से आंदोलन शुरू किया जाएगा और इसे देश के दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा।
CJP की तीन मुख्य मांगें क्या हैं?
CJP ने ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद में तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
1. ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और आपराधिक जांच
CJP की पहली और सबसे प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है।
पार्टी का आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। CJP ने इसके साथ ही ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने और जांच कराने की भी मांग की है।
पार्टी ने यह सवाल भी उठाया है कि जिन फैसलों को लेकर वह आपत्ति जता रही है, उनके पीछे किस स्तर से निर्देश दिए गए थे। हालांकि, ये CJP द्वारा लगाए गए आरोप और मांगें हैं; इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
2. SIR पर रोक और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग
CJP की दूसरी बड़ी मांग Special Intensive Revision यानी SIR को रोकने की है।
पार्टी का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर सवाल उठे हैं और इसलिए प्रक्रिया को रोककर पहले स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
CJP ने इसके साथ जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करने की मांग भी की है। कुछ रिपोर्टों में पार्टी की मांगों के तहत आगामी चुनावों को रोकने और SIR से जुड़े निर्णयों की स्वतंत्र जांच की मांग का भी उल्लेख है।
यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े विवाद के बीच अपने सॉफ्टवेयर की समीक्षा का आदेश दिया है। Reuters की 26 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी और स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ वाली समिति से प्रक्रिया की जांच कराने की बात कही थी।
3. 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को बदलने की मांग
CJP की तीसरी मांग 2023 में बनाए गए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को निरस्त करने की है।
पार्टी की मांग है कि इसकी जगह ऐसा नया कानून बनाया जाए जिसमें चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में सिविल सोसाइटी की भागीदारी हो।
CJP का तर्क है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव किया जाना चाहिए।
2 अक्टूबर को मुंबई में क्या होने वाला है?
CJP ने शुरुआत में मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की घोषणा की थी। हालांकि, मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
पुलिस के अनुसार, 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के तहत शिवाजी पार्क में इस तरह के जमावड़े की अनुमति देने का अधिकार उसके पास नहीं है। पुलिस ने भीड़, यातायात और ध्वनि से जुड़े नियमों का भी हवाला दिया है।
इसके बावजूद CJP ने प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। अभिजीत दिपके ने कहा है कि अगर उन्हें प्रदर्शन करने से रोका गया तो पार्टी ‘Jail Bharo Andolan’ शुरू करेगी।
बाद की घोषणाओं में CJP ने कहा कि प्रदर्शन शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 के पास किया जाएगा।
मुंबई के बाद दूसरे शहरों में भी आंदोलन का ऐलान
CJP ने अपने आंदोलन को केवल मुंबई तक सीमित नहीं रखने की बात कही है।
पार्टी के अनुसार, मुंबई के बाद बेंगलुरु, गोवा, कोलकाता, पटना और रांची जैसे शहरों में भी प्रदर्शन किए जाएंगे। CJP का कहना है कि अक्टूबर के अंत तक इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की योजना है।
25 सितंबर को भी CJP ने कहा था कि 2 अक्टूबर से मुंबई से शुरू होने वाला प्रदर्शन आगे देश के अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
CJP और अन्य आलोचकों की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने आयोग के भीतर किसी संस्थागत टूट या गंभीर आंतरिक संकट के सुझावों को खारिज किया है।
आयोग ने कहा है कि SIR समेत उसके फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। ऐसे में CJP के आरोपों और चुनाव आयोग के जवाब के बीच राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है।
SIR विवाद क्यों बना हुआ है बड़ा मुद्दा?
मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर पिछले दिनों चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव पर बहस तेज हुई है।
26 सितंबर को Reuters ने रिपोर्ट किया था कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े सॉफ्टवेयर की समीक्षा का आदेश दिया। आयोग ने कहा कि एक समिति यह देखेगी कि मतदाता सूची में बदलाव के लिए इस्तेमाल किया जा रहा सॉफ्टवेयर कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं।
यही मुद्दा CJP की मांगों में भी शामिल है। पार्टी SIR को रोकने और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग कर रही है।
‘Jail Bharo Andolan’ की चेतावनी क्यों?
मुंबई पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बाद CJP ने अपने आंदोलन को और आगे बढ़ाने की चेतावनी दी है।
अभिजीत दिपके ने कहा है कि अगर उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार नहीं दिया गया तो पार्टी जेल भरो आंदोलन शुरू करेगी। हालांकि, प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था से जुड़े नियमों को लेकर अंतिम स्थिति प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के निर्णयों पर निर्भर करेगी।
2 अक्टूबर के प्रदर्शन पर सबकी नजर
2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के दिन होने वाला CJP का मुंबई प्रदर्शन ऐसे समय हो रहा है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है।
CJP ने अपने आंदोलन के जरिए तीन प्रमुख मुद्दे उठाए हैं—CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और जांच, SIR पर रोक व जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करना, तथा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून में बदलाव।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने ऊपर लगाए गए संस्थागत संकट के आरोपों को खारिज किया है और SIR से जुड़े निर्णयों को सभी तीन चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त होने की बात कही है। ऐसे में 2 अक्टूबर का प्रदर्शन इस पूरे विवाद में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।
