भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अभी भी जारी है, लेकिन दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाना मुश्किल होता जा रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, लेकिन दोनों पक्ष एक ऐसे ‘प्लेटो’ पर पहुंच गए हैं, जहां आगे किसी भी तरह का समझौता या एक-दूसरे को रियायत देना बेहद मुश्किल हो सकता है।
सीतारमण ने यह टिप्पणी नई दिल्ली में आयोजित Munich Leaders Meeting (MLM) के दौरान की। उनका बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर पहले ही कह चुके हैं कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता फिलहाल जल्द होने वाला नहीं है।
बातचीत अभी बंद नहीं हुई है: निर्मला सीतारमण
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बारे में पूछे जाने पर निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि बातचीत अभी जारी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत चल रही है और यह प्रक्रिया काफी कठिन तथा गंभीर बातचीत के दौर से गुजर रही है।
वित्त मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने अब तक कई मुद्दों पर चर्चा की है, लेकिन कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां आगे बढ़ना आसान नहीं है। उनके मुताबिक, भारत और अमेरिका एक ऐसे बिंदु पर पहुंच गए हैं जहां ‘देने और लेने’ यानी दोनों तरफ से रियायतों की गुंजाइश सीमित होती दिखाई दे रही है।
हालांकि, सीतारमण ने यह भी कहा कि अगर दोनों पक्षों के लिए आगे बढ़ने की कोई गुंजाइश बची है तो भारत और अमेरिका उस पर काम करने की कोशिश करेंगे।
उन्होंने यह संकेत भी दिया कि बातचीत का उद्देश्य किसी एक पक्ष को पूरी तरह झुकाना नहीं बल्कि ऐसा रास्ता निकालना है जो दोनों देशों के लिए स्वीकार्य हो।
अमेरिका ने भी कहा- समझौता अभी जल्द नहीं
भारत की वित्त मंत्री का यह बयान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के हालिया बयान के कुछ दिन बाद आया है। ग्रीर ने मिलवॉकी में G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उन्हें भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर फिलहाल कुछ भी ‘इमिनेंट’ यानी तुरंत होने वाला नहीं दिख रहा है।
ग्रीर के मुताबिक, भारत और अमेरिका ने उन सभी प्रमुख मुद्दों की पहचान कर ली है जो बातचीत में अड़चन पैदा कर रहे हैं। अब इन मुद्दों पर दोनों देशों को आगे समाधान तलाशना होगा।
ग्रीर ने यह भी कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले समय में बहुत जल्द एक और फोन पर बातचीत कर सकते हैं। इस बातचीत में व्यापार समझौते को लेकर हुई प्रगति का आकलन किया जा सकता है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कौन से मुद्दे अहम?
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बातचीत में कई संवेदनशील मुद्दे सामने आए हैं। इनमें टैरिफ, बाजार तक पहुंच, भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धी परिस्थितियां और अमेरिका का व्यापार घाटा प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
अमेरिका लंबे समय से अपने व्यापार घाटे को कम करने पर जोर देता रहा है। वहीं भारत चाहता है कि उसके निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में ऐसी प्रतिस्पर्धी पहुंच मिले जिससे वे दूसरे देशों के निर्यातकों के मुकाबले नुकसान की स्थिति में न रहें।
यही वजह है कि दोनों देशों के बीच बातचीत में केवल टैरिफ घटाने या बढ़ाने का मुद्दा नहीं है, बल्कि व्यापक व्यापार शर्तों पर भी चर्चा हो रही है।
भारत का तर्क- टैरिफ को बातचीत का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए
निर्मला सीतारमण ने व्यापार असंतुलन के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े मतभेदों को बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए।
उन्होंने टैरिफ को बातचीत के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर भी सवाल उठाया। सीतारमण के अनुसार, टैरिफ का एक निश्चित ढांचा होना चाहिए और व्यापार असंतुलन को बातचीत के माध्यम से दूर किया जाना चाहिए।
उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि चीन के साथ भारत और अमेरिका दोनों का व्यापार घाटा है। इसके बावजूद भारत ने यह नहीं कहा कि वह चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को दूर करने के लिए केवल टैरिफ का इस्तेमाल करेगा।
सीतारमण ने तर्क दिया कि यदि किसी देश के साथ व्यापार असंतुलन है तो उसका समाधान बातचीत और समझौते के जरिए किया जाना चाहिए।
भारत का अमेरिका के साथ अभी भी व्यापार अधिशेष
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार की तस्वीर चीन के साथ भारत के व्यापार से अलग है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार करीब 151 अरब डॉलर नहीं, बल्कि अमेरिका के साथ अलग आंकड़ा है, जबकि भारत-चीन व्यापार 151.1 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा करीब 112.6 अरब डॉलर था।
इसके विपरीत अमेरिका के साथ भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 34.4 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष दर्ज किया। हालांकि यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2024-25 के करीब 40.89 अरब डॉलर के अधिशेष से कम है।
यानी भारत अमेरिका के साथ घाटे में नहीं बल्कि व्यापार अधिशेष की स्थिति में है। यही वजह है कि भारत अमेरिकी व्यापार घाटे से जुड़ी चिंताओं को बातचीत के जरिए हल करने पर जोर दे रहा है।
अंतरिम व्यापार समझौते पर भी बनी हुई है अनिश्चितता
भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी को एक संयुक्त बयान जारी करके अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी BTA (Bilateral Trade Agreement) के लिए एक ढांचा सामने रखा था।
इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन समझौते को अभी अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका की लगातार बदलती व्यापार नीतियां और टैरिफ को बातचीत के दौरान दबाव के साधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाना भी समझौते की राह में चुनौती बन रहा है।
इसके अलावा अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उस कानूनी आधार को अमान्य किए जाने के बाद भी स्थिति जटिल हुई, जिसके तहत अमेरिका द्वारा प्रस्तावित विशेष टैरिफ व्यवस्था को लागू किया जाना था।
भारत चाहता है निर्यातकों के लिए बेहतर बाजार पहुंच
भारत की प्राथमिकताओं में से एक यह है कि भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में प्रतिस्पर्धी और स्थिर बाजार पहुंच मिले।
भारत चाहता है कि उसे ऐसी टैरिफ व्यवस्था मिले जिससे उसके निर्यातकों को उन देशों के मुकाबले नुकसान न हो जिनके साथ अमेरिका पहले ही व्यापार समझौते कर चुका है या जिन्हें बेहतर व्यापारिक शर्तें मिल रही हैं।
यही कारण है कि भारत किसी जल्दबाजी में समझौता करने के बजाय अपने आर्थिक हितों और घरेलू संवेदनशील क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना चाहता है।
भारत-EU समझौते का दिया उदाहरण
Munich Leaders Meeting में निर्मला सीतारमण ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच जनवरी 2026 में हुए मुक्त व्यापार समझौते का भी उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि भारत-EU समझौता इस बात का उदाहरण है कि दो पक्ष अपनी-अपनी संवेदनशीलताओं का सम्मान करते हुए एक ऐसा समझौता कर सकते हैं जिससे दोनों को फायदा हो।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सभी देशों के साथ व्यापार समझौते के लिए एक जैसा मॉडल नहीं अपना सकता। अलग-अलग देशों की आर्थिक परिस्थितियां, बाजार, उद्योग और संवेदनशील क्षेत्र अलग होते हैं।
इसलिए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के लिए भी अलग-अलग मुद्दों के आधार पर समाधान तलाशना होगा।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच बातचीत खत्म नहीं हुई है। दोनों पक्ष उन मुद्दों पर समाधान तलाश रहे हैं जिन पर अभी तक सहमति नहीं बन सकी है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के मुताबिक, दोनों देशों ने उन प्रमुख मुद्दों की पहचान कर ली है जो समझौते में अड़चन बने हुए हैं। वहीं निर्मला सीतारमण के बयान से संकेत मिलता है कि भारत भी समझौते को लेकर बातचीत जारी रखना चाहता है, लेकिन वह अपने आर्थिक हितों से समझौता करने के लिए जल्दबाजी में कदम नहीं उठाएगा।
भारत और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व के बीच संभावित आगामी बातचीत को भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर दोनों पक्ष कुछ विवादित मुद्दों पर समझौते की गुंजाइश निकाल पाते हैं, तो व्यापार वार्ता फिर आगे बढ़ सकती है। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन किसी अंतिम समझौते की तारीख तय नहीं हुई है।
