केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के पलक्कड़ जिला सचिव पद से हटाए गए ईएन सुरेश बाबू को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। जिला सचिव पद से हटाए जाने के एक दिन बाद उनके खिलाफ एक महिला की ओर से कथित तौर पर दुर्व्यवहार की शिकायत किए जाने की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायत के साथ डिजिटल सबूत भी पार्टी नेतृत्व को दिए गए हैं और शिकायतकर्ता ने कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में कानूनी कदम उठाने की बात कही थी।
हालांकि, इस पूरे मामले में CPI(M) की ओर से अलग रुख सामने आया है। पार्टी के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने ऐसी किसी शिकायत के पार्टी के पास होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सामने महिला की ऐसी कोई शिकायत नहीं है। नए जिला सचिव वी. चेंथमarakशन ने भी कहा है कि जिला या राज्य समिति के सामने ऐसी कोई शिकायत आधिकारिक तौर पर नहीं आई है।
इस तरह फिलहाल मामला आरोप, पार्टी के भीतर शिकायत होने के दावे और पार्टी नेतृत्व की सफाई के बीच उलझा हुआ है।
अचानक बदले गए थे पलक्कड़ जिला सचिव
ईएन सुरेश बाबू को रविवार को CPI(M) के पलक्कड़ जिला सचिव पद से हटाया गया था। उनकी जगह पूर्व विधायक वी. चेंथमाराक्शन को नया जिला सचिव बनाया गया।
सुरेश बाबू ने पद छोड़ने के समय इसे व्यक्तिगत कारणों से लिया गया फैसला बताया था। हालांकि, इसके बाद स्थानीय मीडिया में उनके खिलाफ महिला की शिकायत और पार्टी के भीतर कार्रवाई को लेकर खबरें सामने आने लगीं।
पार्टी के संगठनात्मक स्तर पर भी पलक्कड़ इकाई को लेकर चर्चा चल रही थी। हालिया चुनावी प्रदर्शन और संगठन से जुड़े मुद्दों पर जिला समिति की बैठकों में सवाल उठाए गए थे। ऐसे में सुरेश बाबू को अचानक हटाए जाने के बाद उनके पद छोड़ने के वास्तविक कारण को लेकर भी चर्चा तेज हुई।
महिला की शिकायत में क्या आरोप बताए जा रहे हैं?
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी से जुड़े कानूनी प्रकोष्ठ की एक महिला वकील ने सुरेश बाबू के खिलाफ कथित दुर्व्यवहार की शिकायत पार्टी नेतृत्व को दी थी।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि शिकायत में पलक्कड़ स्थित CPI(M) जिला कार्यालय में कथित तौर पर अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया गया। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि महिला ने लंबे समय तक फोन के जरिए परेशान किए जाने का आरोप लगाया और शिकायत के समर्थन में डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराई।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सुरेश बाबू की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
डिजिटल सबूत दिए जाने का भी दावा
मामले में सबसे महत्वपूर्ण दावों में से एक डिजिटल सबूतों को लेकर है। कुछ स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, शिकायत के साथ डिजिटल सामग्री पार्टी नेतृत्व को दी गई है।
एक रिपोर्ट में व्हाट्सऐप चैट और वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग जैसे डिजिटल सबूत दिए जाने का दावा किया गया है। वहीं शुरुआती रिपोर्ट में केवल डिजिटल एविडेंस के साथ शिकायत दिए जाने की बात कही गई थी।
ऐसे में शिकायत की वास्तविक सामग्री और उसमें लगाए गए आरोपों की जांच पार्टी स्तर पर किस तरह की जाती है, यह आगे महत्वपूर्ण होगा।
शिकायतकर्ता ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी?
रिपोर्टों के मुताबिक, महिला ने पार्टी नेतृत्व से कहा था कि यदि मामले में कार्रवाई नहीं की गई तो वह कानूनी रास्ता अपना सकती हैं। इसी के बाद पार्टी के भीतर मामले को लेकर गंभीरता बढ़ने का दावा किया गया है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार महिला ने अभी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है या नहीं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यही वजह है कि फिलहाल इसे पार्टी के भीतर सामने आए कथित शिकायत विवाद के रूप में देखा जा रहा है।
CPI(M) नेता एनएन कृष्णदास ने क्या कहा?
वरिष्ठ CPI(M) नेता एनएन कृष्णदास ने कहा कि राज्य नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या सुरेश बाबू के खिलाफ वास्तव में कोई उत्पीड़न या दुर्व्यवहार की शिकायत आई है।
उन्होंने स्थानीय मीडिया से कहा कि उन्हें टीवी चैनलों और अखबारों के माध्यम से महिला की शिकायत के बारे में जानकारी मिली है। उनके मुताबिक, अगर जिला सचिव के खिलाफ ऐसी कोई शिकायत थी तो उसे राज्य नेतृत्व के सामने रखा जाना चाहिए था।
कृष्णदास का बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पार्टी के भीतर भी मामले को लेकर सवाल उठने का संकेत मिलता है।
एमवी गोविंदन ने शिकायत से किया इनकार
दूसरी तरफ CPI(M) के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने इन खबरों को खारिज किया है। उन्होंने पलक्कड़ में पत्रकारों से कहा कि पार्टी के सामने महिला की ऐसी कोई शिकायत नहीं है।
इससे मामले में दो अलग-अलग दावे सामने आ गए हैं—एक तरफ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में पार्टी नेतृत्व को शिकायत दिए जाने की बात कही जा रही है, जबकि पार्टी के राज्य सचिव आधिकारिक शिकायत मिलने से इनकार कर रहे हैं।
नए जिला सचिव वी. चेंथमarakशन ने भी कहा कि सुरेश बाबू के खिलाफ कोई उत्पीड़न शिकायत जिला समिति या राज्य समिति के सामने नहीं आई है। उन्होंने सुरेश बाबू के पद छोड़ने को व्यक्तिगत कारणों से जुड़ा बताया।
कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई की मांग की
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने सोमवार को मांग की कि यदि ऐसी कोई शिकायत मौजूद है तो उसे पुलिस को सौंपा जाना चाहिए, ताकि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई हो सके।
कांग्रेस की इस मांग के बाद CPI(M) के लिए यह मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो गया है। हालांकि, किसी भी आरोप की पुष्टि जांच या कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकती है।
पार्टी की आंतरिक कार्रवाई पर भी नजर
रिपोर्टों के मुताबिक, CPI(M) के भीतर सुरेश बाबू के खिलाफ आगे संगठनात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना पर चर्चा हो सकती है। कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि व्यापक जिला समिति की बैठकों के बाद मामले को राज्य स्तर पर आगे ले जाया जा सकता है।
हालांकि, पार्टी नेतृत्व की ओर से फिलहाल ऐसी कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
CPI(M) ने हाल के संगठनात्मक बदलावों के बीच पलक्कड़ इकाई में सुधार और संगठनात्मक कमियों को दूर करने पर भी जोर दिया है। राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने पहले कहा था कि पार्टी गलतियों को सुधारने के लिए कदम उठा रही है और विस्तारित जिला समिति की बैठकें इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
अभी सबसे बड़ा सवाल क्या है?
इस पूरे विवाद में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईएन सुरेश बाबू के खिलाफ महिला की कोई औपचारिक शिकायत पार्टी नेतृत्व के पास पहुंची थी या नहीं।
एक तरफ मीडिया रिपोर्टों में शिकायत, डिजिटल सबूत और संभावित कानूनी कार्रवाई की बात सामने आ रही है। दूसरी तरफ CPI(M) के राज्य सचिव और नए जिला सचिव आधिकारिक शिकायत मिलने से इनकार कर रहे हैं।
यदि शिकायत वास्तव में पार्टी के पास मौजूद है, तो उसके निपटारे की प्रक्रिया, शिकायत की जांच और आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। वहीं अगर पार्टी के पास कोई औपचारिक शिकायत नहीं है, तो सुरेश बाबू को हटाने के फैसले के पीछे बताए गए ‘व्यक्तिगत कारणों’ पर उठ रहे सवाल भी चर्चा में बने रह सकते हैं।
फिलहाल ईएन सुरेश बाबू पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में किसी आपराधिक दोष का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पार्टी नेतृत्व की आधिकारिक स्थिति और आगे होने वाली किसी जांच या कानूनी कार्रवाई से ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
