कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन पर तीखा हमला बोला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से विपक्षी नेताओं की मुलाकात के बाद बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के बयानों पर सवाल उठाए, जबकि पार्टी के एक अन्य प्रवक्ता सीआर केसवन ने उन्हें ‘पैथोलॉजिकल लायर’ यानी आदतन झूठ बोलने वाला करार दिया। इस बयानबाजी के बाद चुनाव प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी विवाद और तेज हो गया है।
राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात के बाद क्या बोले राहुल गांधी?
दरअसल, राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन INDIA के अन्य नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर अपनी चिंताओं और कथित अनियमितताओं का मुद्दा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने उठाया था। विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी रखी।
मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष ने राष्ट्रपति के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर देश की चुनावी व्यवस्था को कमजोर करने के आरोपों से जुड़ी अपनी चिंताएं रखीं। उन्होंने बताया कि ज्ञापन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की शिकायतों का उल्लेख किया गया था।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक के दौरान उन्हें इस बात पर हैरानी हुई कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों का खंडन नहीं किया। राहुल गांधी के इसी बयान को लेकर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई है।
हालांकि, राहुल गांधी की इस टिप्पणी को राष्ट्रपति द्वारा विपक्ष के आरोपों की पुष्टि के रूप में नहीं माना जा सकता। राष्ट्रपति की ओर से आरोपों को स्वीकार किए जाने का कोई स्पष्ट बयान इस रिपोर्ट में उद्धृत नहीं है। इसी मुद्दे पर बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी की भाषा और उनके दावे पर सवाल उठाए हैं।
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने का आरोप लगाया। अपने आधिकारिक X हैंडल पर जारी वीडियो संदेश में त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी लगातार देश की संवैधानिक संस्थाओं को अपनी राजनीति का निशाना बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
त्रिवेदी के मुताबिक, पिछले कई दिनों से राहुल गांधी और उनके नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन के नेता कथित अनियमितताओं को लेकर आरोप लगा रहे हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी की टिप्पणी राजनीति से प्रेरित प्रतीत होती है।
बीजेपी नेता ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के साथ बैठक के बाद उनके बयान को जिस तरह प्रस्तुत किया, उससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोपों का खंडन नहीं किया। त्रिवेदी ने कहा कि इस तरह की व्याख्या तथ्यों के बजाय राजनीतिक संदेश देने का प्रयास लगती है।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति का पद देश की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में से एक है और इस पद से जुड़ी मुलाकात को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक को भी अपनी राजनीति का माध्यम बनाने की कोशिश की है।
‘राहुल गांधी ने सभी सीमाएं पार कर दीं’: BJP
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने राजनीतिक बयानबाजी में सभी सीमाएं पार कर दी हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के साथ बैठक में वास्तव में क्या बातचीत हुई, इसकी जानकारी केवल वहां मौजूद लोगों को ही हो सकती है।
त्रिवेदी ने बैठक के दौरान मौजूद नेताओं की प्रतिक्रियाओं और उनके चेहरे के भावों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इससे राहुल गांधी की ओर से प्रस्तुत किए गए विवरण की सत्यता पर सवाल उठते हैं। हालांकि, यह त्रिवेदी की राजनीतिक टिप्पणी है और इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि राहुल गांधी का दावा गलत था।
बीजेपी प्रवक्ता ने यह आरोप भी लगाया कि राहुल गांधी पहले भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और बयानों को अपने राजनीतिक दृष्टिकोण के अनुरूप प्रस्तुत करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट और निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं को भी राजनीतिक विवादों में घसीटा जा रहा है।
त्रिवेदी का कहना था कि संवैधानिक संस्थाओं के बारे में सार्वजनिक बयान देते समय तथ्यों और वास्तविक बयानों को ध्यान में रखना जरूरी है। बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों को इसी आधार पर चुनौती दी है।
CR Kesavan ने राहुल गांधी को बताया ‘Pathological Liar’
बीजेपी प्रवक्ता सीआर केसवन ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। केसवन ने उन्हें ‘पैथोलॉजिकल लायर’ कहा और आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जानबूझकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया है, जिससे वास्तविक स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।
केसवन ने कहा कि राष्ट्रपति के उच्च संवैधानिक पद को राजनीतिक विवाद में शामिल करना अनुचित है। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को गलत और भ्रामक बताते हुए उनकी आलोचना की।
बीजेपी प्रवक्ता के मुताबिक, राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी से ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपनी राजनीतिक दलीलों को मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया का अपने तरीके से अर्थ निकाल रहे हैं। केसवन ने इसे राष्ट्रपति पद की गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
हालांकि, ‘पैथोलॉजिकल लायर’ और तथ्यों को जानबूझकर गलत पेश करने जैसे शब्द बीजेपी नेताओं के आरोप हैं। इन्हें किसी स्वतंत्र जांच या न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
क्या है SIR का पूरा विवाद?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR मतदाता सूची की जांच और संशोधन से जुड़ी प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और उसमें मौजूद त्रुटियों या पात्रता से संबंधित समस्याओं की जांच करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। विपक्ष इस विषय को लेकर निर्वाचन आयोग की भूमिका और उसकी जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है।
इसी क्रम में विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर अपनी चिंताएं सामने रखीं। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने चुनावी प्रक्रिया से संबंधित शिकायतों पर ध्यान देने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
दूसरी ओर, बीजेपी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बता रही है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी को अपने दावों के समर्थन में स्पष्ट तथ्य प्रस्तुत करने चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं के बारे में बयान देते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
इस तरह SIR को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद दिए गए बयानों और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।
चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं पर आमने-सामने सत्ता पक्ष-विपक्ष
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी और बीजेपी नेताओं के बीच हुई बयानबाजी ने एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता, निर्वाचन आयोग की जवाबदेही और राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप को चर्चा में ला दिया है।
विपक्ष चाहता है कि SIR से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई हो और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाए। वहीं, बीजेपी का रुख है कि राहुल गांधी बिना पर्याप्त आधार के गंभीर आरोप लगा रहे हैं और राजनीतिक लाभ के लिए संवैधानिक संस्थाओं का उल्लेख कर रहे हैं।
फिलहाल, इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी की टिप्पणी पर बीजेपी की प्रतिक्रिया ने विवाद को और तेज कर दिया है। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के अगले बयानों और SIR से जुड़ी शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
