कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभी ऐसी कोई ठोस परिस्थिति सामने नहीं है, जिसके आधार पर यह माना जाए कि मार्च के दौरान कोई अप्रिय घटना होगी।
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया, लेकिन 5 सितंबर से पहले मामले की तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मामले को अब 10 सितंबर को अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
कॉकरोच जनता पार्टी ने 24 अगस्त को 5 सितंबर को दिल्ली में एक नए विरोध मार्च का ऐलान किया था। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाना था। पार्टी का आरोप है कि 25 जुलाई को आंदोलन वापस लेने के दौरान केंद्र सरकार की ओर से दिए गए कुछ आश्वासन अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं।
CJP का कहना है कि यह मार्च शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शन में NEET विवाद से प्रभावित परिवारों और पहले हुए आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े लोगों की भागीदारी की बात कही गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना मुख्य रूप से केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है। अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष कानून के दायरे में रहते हुए शांतिपूर्ण और जिम्मेदार तरीके से व्यवहार करेंगे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में कोई गंभीर या चिंताजनक स्थिति सामने आती है, तो संबंधित पक्ष दोबारा अदालत का रुख कर सकते हैं।
क्या 5 सितंबर का मार्च रद्द हो गया है?
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मार्च वापस लेने या रद्द करने की पुष्टि नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने केवल तत्काल रोक लगाने से इनकार किया है। इसलिए इस समय यह कहना सही नहीं होगा कि CJP ने 5 सितंबर का मार्च वापस ले लिया है।
दिल्ली में प्रस्तावित मार्च को लेकर कानून-व्यवस्था और पुलिस अनुमति का मुद्दा अभी भी महत्वपूर्ण है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली पुलिस की ओर से मार्च को आधिकारिक अनुमति दिए जाने को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।
