श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) की धीमी रफ्तार और अधूरी योजनाओं को लेकर विधानसभा के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य एक साथ चिंता जताते नजर आए। विधानसभा के शरद सत्र के अंतिम दिन विधायकों ने जल जीवन मिशन की योजनाओं के अटकने, ठेकेदारों के भुगतान में देरी और जांच के कारण विकास कार्य प्रभावित होने का मुद्दा उठाया।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जम्मू-कश्मीर विधानसभा की एक हाउस कमेटी पिछले करीब एक साल से 3,000 से अधिक JJM योजनाओं की जांच कर रही है। कमेटी ने 21 सितंबर को विधानसभा में अपनी 1,252 पन्नों की रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में योजना के क्रियान्वयन में निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए गए थे।
BJP, PDP और NC विधायकों ने उठाए सवाल
विधानसभा में जल जीवन मिशन को लेकर चर्चा के दौरान अलग-अलग राजनीतिक दलों के विधायकों ने योजनाओं के रुकने और भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया। रिपोर्ट के मुताबिक BJP, PDP और सत्तारूढ़ National Conference के सदस्यों ने भी इस विषय पर चिंता जताई।
हाउस कमेटी की रिपोर्ट में योजना की प्लानिंग, निगरानी और मॉनिटरिंग को लेकर कमियां बताई गई हैं। कमेटी ने यह भी सवाल उठाया कि जल जीवन मिशन शुरू होने के करीब तीन साल बाद GI पाइप की जगह HDPE पाइप पर जाने का फैसला किस प्रक्रिया के तहत लिया गया।
रिपोर्ट में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका को लेकर भी चिंता जताई गई है। कमेटी ने अलग-अलग समितियों से जुड़े कथित lapses की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने की सिफारिश भी की है।
‘हमने काम रोकने या भुगतान रोकने को नहीं कहा था’
हाउस कमेटी के अध्यक्ष और National Conference विधायक हसनैन मसूदी ने विधानसभा में कहा कि कमेटी का गठन योजनाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए किया गया था। उनका कहना था कि कमेटी ने काम रोकने या ठेकेदारों के भुगतान को रोकने के लिए नहीं कहा था।
वहीं, चर्चा के दौरान जल शक्ति मंत्री जावेद अहमद राणा ने कहा कि हाउस कमेटी की ओर से सभी JJM योजनाओं के व्यापक ऑडिट की सिफारिश करने से एक और जांच की स्थिति बन सकती है और इससे योजनाओं का काम आगे भी प्रभावित हो सकता है।
मंत्री ने सुझाव दिया कि केवल उन्हीं योजनाओं का विस्तृत ऑडिट कराया जाए जिनकी पहचान कमेटी या किसी विधायक ने आपत्ति वाली योजनाओं के रूप में की है। इसके लिए संबंधित जिला विकास आयुक्तों के स्तर पर तकनीकी और वित्तीय विशेषज्ञों की टीम बनाई जा सकती है।
स्पीकर ने कहा- शिकायत नहीं है तो काम जारी रहे
मामले पर चर्चा के दौरान विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि सरकार को हाउस कमेटी की सिफारिशों पर छह महीने के भीतर Action Taken Report पेश करनी होगी।
स्पीकर ने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में योजनाओं को लेकर कोई शिकायत या आपत्ति नहीं है, वहां काम जारी रखा जा सकता है और भुगतान भी किया जा सकता है। इसके बाद सदस्यों ने इस व्यवस्था के समर्थन में अपनी सहमति जताई और सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
योजनाओं के रुकने से आम लोगों पर असर
जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक पाइप के जरिए पेयजल पहुंचाना है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने 2026-27 के बजट में भी मिशन के तहत चल रहे जलापूर्ति कार्यों को पूरा करने और बाकी कनेक्शनों को आगे बढ़ाने की बात कही है। सरकारी बजट दस्तावेज के अनुसार, 15.62 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को पाइप से पानी के कनेक्शन दिए जा चुके थे और 1,544 जलापूर्ति योजनाओं को पूरा करने पर काम चल रहा था।
ऐसे में विधानसभा में उठी चिंताओं के बीच अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती है—जहां योजनाओं को लेकर शिकायतें हैं वहां जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना, और जिन योजनाओं में कोई आपत्ति नहीं है उन्हें बिना अनावश्यक देरी के आगे बढ़ाना।
फिलहाल हाउस कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार की कार्रवाई और अगले छह महीनों में पेश होने वाली Action Taken Report पर नजर रहेगी।
