दिल्ली के पार्कों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 17 वर्षीय किशोरी के साथ दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में कथित गैंगरेप की घटना के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की ओर से कराए गए सुरक्षा ऑडिट में कई अहम कमियां सामने आई हैं।
ऑडिट के मुताबिक, दिल्ली में DDA के अधीन आने वाले 736 पार्कों में से सिर्फ 16 पार्कों में CCTV कैमरे लगे हैं। वहीं, सुरक्षा के लिहाज से किए गए आकलन में 190 पार्कों को हाई रिस्क, 258 को मीडियम रिस्क और 288 पार्कों को लो रिस्क श्रेणी में रखा गया है।
DDA ने कहा है कि हाई रिस्क वाले पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं।
आस्था कुंज पार्क की घटना के बाद हुआ सुरक्षा ऑडिट
यह सुरक्षा ऑडिट 21 सितंबर को दक्षिण दिल्ली के 142 एकड़ में फैले आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी के साथ कथित गैंगरेप की घटना के बाद कराया गया।
जानकारी के मुताबिक, किशोरी अपने 17वें जन्मदिन पर एक 17 वर्षीय दोस्त के साथ पार्क गई थी। आरोप है कि कुछ लोग खुद को पुलिसकर्मी बताकर उनके पास पहुंचे और बाद में किशोरी के साथ अपराध किया।
घटना के सामने आने के बाद दिल्ली में सार्वजनिक पार्कों की सुरक्षा, पुलिस पेट्रोलिंग और सीसीटीवी निगरानी को लेकर सवाल उठे। इसके बाद उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर DDA ने अपने पार्कों का सुरक्षा ऑडिट कराया।
520 पार्कों में अतिरिक्त लाइटिंग की जरूरत
DDA के ऑडिट में सिर्फ CCTV की कमी ही नहीं, बल्कि पार्कों में रोशनी और प्रवेश व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं भी सामने आई हैं।
ऑडिट के अनुसार, 520 पार्कों में अतिरिक्त लाइटिंग की जरूरत है। इनमें से 231 पार्कों में लाइटिंग का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जा रहा है, जबकि 106 पार्कों में अतिरिक्त लाइटिंग का काम पूरा हो चुका है।
इसके अलावा 323 पार्कों में CCTV कैमरों की जरूरत चिन्हित की गई है। इसका मतलब है कि वर्तमान CCTV कवरेज के मुकाबले बड़ी संख्या में पार्कों में निगरानी व्यवस्था बढ़ाने की जरूरत है।
163 पार्कों में गेट को लॉक करने की जरूरत
DDA ने 163 ऐसे पार्कों की भी पहचान की है जहां गेट को लॉक करने योग्य बनाने की जरूरत है। रात के समय पार्कों में अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय माना जा रहा है।
पार्कों की चारदीवारी और ग्रिल से जुड़ी समस्याएं भी ऑडिट में सामने आईं। कुल 399 पार्कों में सीमा सुरक्षा से जुड़े सुधार की जरूरत पाई गई थी। DDA के अनुसार इनमें से 233 पार्कों में मरम्मत या गायब ग्रिल को बदलने का काम पूरा किया जा चुका है।
हाई रिस्क पार्कों में बाइक पेट्रोलिंग शुरू
DDA के मुताबिक, बड़े पार्कों में रात के समय पेट्रोलिंग शुरू की गई है। 245 प्रमुख पार्कों में नाइट पेट्रोलिंग शुरू की गई है, जबकि सभी हाई रिस्क पार्कों में बाइक पेट्रोलिंग शुरू कर दी गई है।
इसके अलावा 134 ऐसे पार्कों की पहचान की गई है जहां सशस्त्र सुरक्षा गार्डों की जरूरत बताई गई है।
कर्मचारियों की निगरानी और जवाबदेही के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। DDA ने बताया कि 602 पार्कों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस की व्यवस्था शुरू हो चुकी है, जबकि बाकी पार्कों में इसे लागू किया जाना बाकी है।
शौचालय और सुनसान ढांचे भी जांच के दायरे में
ऑडिट में पार्कों के भीतर मौजूद शौचालयों और लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं आ रहे या सुनसान ढांचों के आसपास के क्षेत्रों को भी सुरक्षा की दृष्टि से चिन्हित किया गया है।
DDA का कहना है कि ऐसे स्थानों पर जरूरी सुधार किए जाएंगे, ताकि पार्क के भीतर ऐसे हिस्से कम किए जा सकें जहां निगरानी कमजोर हो सकती है।
सुरक्षा संबंधी बोर्ड और पुलिस संपर्क जानकारी
DDA ने बताया कि अब तक 115 पार्कों में सुरक्षा संबंधी सूचना बोर्ड लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा 484 अतिरिक्त साइन बोर्ड लगाने की प्रक्रिया चल रही है।
फील्ड स्टाफ को स्थानीय पुलिस और बीट अधिकारियों के संपर्क नंबर भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि किसी घटना या संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में पुलिस से तेजी से संपर्क किया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए बनेगा नया SOP
DDA अब पार्कों की सुरक्षा को लेकर एक विस्तृत Standard Operating Procedure (SOP) तैयार कर रहा है। इसमें पुलिस पेट्रोलिंग, सुरक्षा गार्डों के प्रदर्शन, अधिकारियों की जवाबदेही, कर्मचारियों की उपस्थिति, घटनाओं की रिपोर्टिंग और पुलिस के साथ समन्वय जैसे मुद्दे शामिल होंगे।
सुरक्षा से जुड़े टेंडर में भी बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में पार्कों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारियां ज्यादा स्पष्ट हों।
इसके अलावा DDA ने पार्कों से जुड़ी स्थानीय समस्याओं को समझने के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के साथ बैठकें भी शुरू की हैं।
अधिकारियों की साप्ताहिक निगरानी
पार्कों की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए एक केंद्रीय मॉनिटरिंग डैशबोर्ड बनाया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों को हर सप्ताह पार्कों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
DDA के मुताबिक, 30 सितंबर को यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क और 1 अक्टूबर को कमला नेहरू रिज पार्क का प्रिंसिपल कमिश्नर स्तर के अधिकारियों ने निरीक्षण किया।
आस्था कुंज पार्क की घटना के बाद सामने आए ऑडिट के आंकड़े दिल्ली के सार्वजनिक पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति को लेकर अहम सवाल उठाते हैं। अब निगाह इस बात पर है कि DDA द्वारा चिन्हित कमियों को कितनी तेजी से दूर किया जाता है और CCTV, लाइटिंग, पेट्रोलिंग तथा सुरक्षा कर्मचारियों की व्यवस्था को किस स्तर तक मजबूत किया जाता है।
