कर्नाटक के बल्लारी में मतदाता सूची से जुड़े Form 7 विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। पुलिस ने बीजेपी पार्षद और पार्टी के बूथ लेवल एजेंट (BLA) मोटकर श्रीनिवास के ऑफिस की तलाशी के लिए अदालत से सर्च वारंट हासिल किया है। पुलिस के मुताबिक, श्रीनिवास ने बल्लारी सिटी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से 7,561 लोगों के नाम हटाने की मांग को लेकर चुनाव अधिकारियों को आवेदन दिया था।
पुलिस अब तलूर रोड स्थित श्रीनिवास के कार्यालय की तलाशी लेकर उन दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों की जांच करेगी, जिनका इस्तेमाल इन फॉर्म या आवेदन को तैयार करने और जमा करने में किया गया था।
कांग्रेस BLA की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
इस मामले में कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंट गौतम की शिकायत पर मोटकर श्रीनिवास के खिलाफ पहले ही FIR दर्ज की जा चुकी है।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, मामला 21 सितंबर को श्रीनिवास की ओर से चुनाव अधिकारियों को दिए गए एक आवेदन से जुड़ा है। इसमें उन्होंने बल्लारी सिटी विधानसभा क्षेत्र के 7,561 मतदाताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
आवेदन में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए अलग-अलग कारण बताए गए थे। इनमें मतदाता का दूसरे स्थान पर चले जाना, किसी अन्य जगह पंजीकृत होना या संबंधित पते पर मौजूद नहीं होना जैसे कारण शामिल थे।
चुनाव अधिकारियों ने सबूत के अभाव में अनुरोध किया था खारिज
पुलिस के अनुसार, चुनाव अधिकारियों ने पर्याप्त प्रमाण नहीं होने के कारण श्रीनिवास के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। इसके अगले दिन श्रीनिवास ने दोबारा अधिकारियों से संपर्क किया और इन मतदाताओं के रिकॉर्ड की फिर से जांच करने की मांग की।
इसके बाद कांग्रेस BLA गौतम ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश के जरिए पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर करने का प्रयास किया गया।
इन आरोपों की जांच अब पुलिस कर रही है।
ऑफिस से दस्तावेज और सामग्री की होगी जांच
पुलिस द्वारा प्राप्त सर्च वारंट के आधार पर श्रीनिवास के तलूर रोड स्थित कार्यालय की तलाशी ली जाएगी। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि 7,561 मतदाताओं के नाम हटाने से संबंधित आवेदन किस आधार पर तैयार किए गए और इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज या सामग्री इस्तेमाल की गई।
पुलिस इस प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध सामग्री की जांच करेगी।
Form 7 को लेकर कर्नाटक में बढ़ा विवाद
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कर्नाटक में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 7 को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा हुआ है।
राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने पुलिस को उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं जो बड़ी संख्या में Form 7 जमा कर मतदाताओं के नाम हटाने की मांग कर रहे हैं।
खड़गे ने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति Form 7 का गलत इस्तेमाल करता है, बड़ी संख्या में पहले से भरे हुए फॉर्म रखता है या जीवित लोगों को मृत या दूसरे स्थान पर रहने वाला बताकर गलत घोषणा करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं के पास मतदाताओं की जानकारी वाले बड़ी संख्या में प्री-प्रिंटेड फॉर्म कैसे पहुंच रहे हैं।
BJP ने पुलिस कार्रवाई का किया विरोध
बीजेपी ने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। पार्टी ने बल्लारी में विरोध प्रदर्शन की बात कही है और कहा है कि यदि उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामले दर्ज करना और कार्रवाई जारी रही तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्यकर्ताओं को परेशान किया गया तो बीजेपी राज्यव्यापी आंदोलन शुरू कर सकती है।
वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने कहा कि Form 7 जमा करना अपने आप में अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी मतदाता का नाम वैध है या नहीं, इसका फैसला चुनाव आयोग को करना चाहिए, पुलिस को नहीं।
चुनाव आयोग ने भी जारी किए थे निर्देश
इस पूरे विवाद के बीच कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार ने 1 अक्टूबर को अधिकारियों को मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े झूठे दावों और आपत्तियों पर कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था।
निर्देश में कहा गया था कि Form 7 समेत Forms 6, 6A और 8 के जरिए जानबूझकर गलत जानकारी या घोषणा करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, चुनाव आयोग के निर्देश में कथित तौर पर बड़ी संख्या में Form 7 आवेदन जमा करने की घटनाओं को किसी विशेष राजनीतिक दल से सीधे नहीं जोड़ा गया है। निर्देश में अधिकारियों से पहले जांच करने और यह स्थापित करने को कहा गया है कि दावा या आपत्ति जानबूझकर झूठी थी या नहीं।
जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
Form 7 विवाद में अब पुलिस जांच के साथ चुनाव अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। श्रीनिवास के कार्यालय की तलाशी के बाद पुलिस को इस मामले से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामग्री मिलने की उम्मीद है।
वहीं चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई से पहले यह जांच जरूरी होगी कि मतदाता सूची में बदलाव के लिए दिया गया दावा या आपत्ति जानबूझकर गलत थी या नहीं।
फिलहाल मामले में पुलिस जांच जारी है और अदालत के सर्च वारंट के बाद अब श्रीनिवास के कार्यालय से मिलने वाली सामग्री जांच की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।
Form 7 Row: BJP नेता के ऑफिस की तलाशी के लिए पुलिस को वारंट, 7,561 वोटरों का मामला
Form 7 Row Karnataka
कर्नाटक के बल्लारी में 7,561 मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन के मामले में पुलिस ने BJP नेता Motkar Srinivas के ऑफिस की तलाशी के लिए कोर्ट से वारंट लिया है।
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