मध्य प्रदेश के चर्चित बागेश्वर धाम रेप मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश उस समय आया है जब मामले में जेल में बंद आरोपी राजू जाटव ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया और अदालत के सामने फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट का हवाला दिया।
फॉरेंसिक रिपोर्ट में सामने आया कि नाबालिग लड़की के गर्भ से मिले भ्रूण के जैविक पिता के रूप में आरोपी राजू जाटव की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद अदालत ने मामले की जांच को नए सिरे से देखने की जरूरत महसूस की और छतरपुर के पुलिस अधीक्षक को SIT जांच कराने के निर्देश दिए।
यह आदेश जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने 25 सितंबर को दिया था, जिसे सोमवार को सार्वजनिक किया गया।
DNA रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
मामले की जांच के दौरान 16 वर्षीय लड़की के गर्भवती होने की जानकारी सामने आई थी। मेडिकल जांच में उसके करीब दो महीने की गर्भावस्था में होने की बात सामने आई। बाद में गर्भावस्था समाप्त की गई और भ्रूण तथा प्लेसेंटा को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया।
पुलिस के अनुसार, लड़की ने शुरुआती शिकायत और जांच के दौरान आरोपी राजू जाटव पर बागेश्वर धाम में उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। इसी आधार पर जाटव को गिरफ्तार किया गया और वह जेल में है।
लेकिन बाद में आई फॉरेंसिक रिपोर्ट में भ्रूण के DNA की तुलना आरोपी से की गई तो राजू जाटव को जैविक पिता नहीं पाया गया। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की।
लड़की के बयानों में भी आया बदलाव
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान लड़की के अलग-अलग समय पर दिए गए बयानों में विरोधाभास का भी उल्लेख किया।
शुरुआत में पुलिस और मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयानों में लड़की ने राजू जाटव पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। हालांकि, बाद में ट्रायल के दौरान उसने अपने बयान से पलटते हुए जाटव पर दुष्कर्म के आरोप से इनकार कर दिया और अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया।
अदालत ने इस स्थिति को भी महत्वपूर्ण माना। कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि लड़की ने किसी अन्य व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध के बाद गर्भधारण किया था, जबकि उसके साथ जाटव और एक अन्य व्यक्ति द्वारा कथित यौन उत्पीड़न की बात भी जांच के दौरान सामने आई।
यही वजह है कि अदालत ने पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को दोबारा जोड़ने और यह पता लगाने की जरूरत बताई कि नाबालिग के साथ वास्तव में क्या हुआ था।
SIT को क्या पता करना होगा?
हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार अब SIT मामले की पूरी जांच करेगी। जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना होगा कि नाबालिग के साथ कथित यौन उत्पीड़न की पूरी घटना क्या थी और भ्रूण का जैविक पिता कौन है।
SIT को लड़की के शुरुआती बयानों, बाद में बदले हुए बयान, मेडिकल रिकॉर्ड, DNA रिपोर्ट और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों की दोबारा जांच करनी होगी।
अदालत ने छतरपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि SIT मामले की जांच कर पूरी घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाए।
15 मार्च को घर से निकली थी नाबालिग
FIR के मुताबिक, नाबालिग लड़की 15 मार्च को अपनी मां से विवाद के बाद बागेश्वर धाम पहुंची थी। शिकायत के अनुसार, इसके दो दिन बाद उसका संपर्क आरोपी राजू जाटव से हुआ।
पुलिस जांच के दौरान लड़की की मेडिकल जांच कराई गई, जिसमें उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई। बाद में गर्भावस्था समाप्त की गई और फॉरेंसिक जांच के लिए भ्रूण तथा प्लेसेंटा को सुरक्षित रखा गया।
FIR में यह भी कहा गया है कि लड़की को बाद में राजू जाटव की पत्नी के बताए स्थान से बरामद किया गया था।
बागेश्वर धाम प्रबंधन ने जारी की एडवाइजरी
मामले के सामने आने के बाद बागेश्वर धाम मंदिर प्रबंधन ने भी श्रद्धालुओं, खासकर महिलाओं के लिए एडवाइजरी जारी की है। 3 अक्टूबर को जारी सलाह में महिलाओं से परिसर में अकेले जाने से बचने, अजनबियों या सेवदारों पर तुरंत भरोसा नहीं करने और परिसर में लंबे समय तक अकेले रुकने से बचने की अपील की गई।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की जांच नए सिरे से होने जा रही है। DNA रिपोर्ट, नाबालिग के अलग-अलग बयान और शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए SIT की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और नाबालिग के गर्भ में पल रहे भ्रूण का जैविक पिता कौन था।
