Nana Patekar News: दिग्गज अभिनेता Nana Patekar के निधन के बाद जहां पूरा देश उनके फिल्मी करियर और यादगार किरदारों को याद कर रहा है, वहीं महाराष्ट्र के Beed जिले में कई परिवार उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर याद कर रहे हैं, जिन्होंने मुश्किल समय में उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का मौका दिया। Nana Patekar ने अपने सामाजिक संगठन Naam Foundation के जरिए सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों और उनके परिवारों की मदद की थी।

Beed जिले के Arvi गांव की रहने वाली Rajashree Asaram Pardeshi के लिए Nana Patekar की मदद सिर्फ एक सहायता नहीं थी, बल्कि उनके परिवार को दोबारा संभालने का जरिया बनी। करीब 10 साल पहले Naam Foundation की ओर से उन्हें एक सिलाई मशीन दी गई थी। इसी मशीन के जरिए उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालनी शुरू की।

Rajashree के पति construction worker थे, लेकिन काम के दौरान गिरने की एक गंभीर घटना के बाद वह बिस्तर पर पड़ गए। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह Rajashree के कंधों पर आ गई। ऐसे समय में Naam Foundation से मिली सिलाई मशीन उनके लिए कमाई का साधन बनी।

सिलाई मशीन से शुरू हुई नई जिंदगी

Rajashree के मुताबिक, वह सिलाई मशीन से साड़ियों की hemming और blouses की stitching करती हैं। इससे उन्हें रोजाना करीब ₹400 से ₹500 की कमाई हो जाती है और महीने में उनकी आय लगभग ₹10,000 तक पहुंचती है।

उन्होंने PTI से बातचीत में बताया कि यह कमाई Nana Patekar की मदद से संभव हुई। Nana Patekar के निधन की खबर के बाद जब उन्होंने उसी सिलाई मशीन को छुआ तो पुरानी यादें ताजा हो गईं।

Rajashree के लिए वह मशीन सिर्फ सिलाई का सामान नहीं है। वह उनके परिवार को आर्थिक रूप से संभालने और मुश्किल परिस्थितियों में आगे बढ़ने का जरिया बनी।

Nana Patekar का Beed से था खास जुड़ाव

Nana Patekar और Beed के ग्रामीण इलाकों का जुड़ाव करीब एक दशक पुराना है। साल 2015 में महाराष्ट्र के Marathwada क्षेत्र में लगातार पड़े भीषण सूखे और किसानों की आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों के बीच Nana Patekar और मराठी अभिनेता Makarand Anaspure ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए काम शुरू किया।

उनकी कोशिश सिर्फ तत्काल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रही। प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक अपनी आजीविका चलाने में सक्षम बनाने पर जोर दिया गया।

इसी उद्देश्य से ग्रामीण परिवारों को अलग-अलग तरह के साधन उपलब्ध कराए गए। इनमें महिलाओं को सिलाई मशीनें, आटा चक्कियां और पशुधन उपलब्ध कराना शामिल था, ताकि परिवार छोटे स्तर पर अपनी आय का जरिया तैयार कर सकें।

बाद में Nana Patekar और Makarand Anaspure के प्रयासों से Naam Foundation की स्थापना हुई। संगठन का फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पानी बचाने और जल संरक्षण जैसे लंबे समय के कामों पर भी रहा।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर दिया गया जोर

Naam Foundation की मदद से कई ग्रामीण महिलाओं को ऐसे साधन उपलब्ध कराने की कोशिश की गई, जिनसे वे अपने परिवार के लिए खुद कमाई कर सकें।

Beed जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्र में रोजगार के सीमित अवसरों के बीच सिलाई मशीन जैसी मदद किसी परिवार के लिए नियमित आय का साधन बन सकती है। Rajashree Pardeshi का मामला इसका एक उदाहरण है।

उनके पति के काम करने में असमर्थ होने के बाद परिवार चलाने की जिम्मेदारी उन पर आ गई थी। ऐसे समय में मिली सिलाई मशीन ने उन्हें घर से काम करने और अपनी आमदनी शुरू करने का अवसर दिया।

पानी की समस्या से निपटने के लिए भी किया काम

Naam Foundation का काम सिर्फ परिवारों को रोजगार के साधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहा। संगठन ने Beed में पानी की समस्या को कम करने के लिए भी कई जल संरक्षण परियोजनाओं पर काम किया।

Naam Foundation के जिला समन्वयक Shivram Ghodake के अनुसार, Beed जिले में जल संरक्षण के लिए नालों, streams और reservoirs से गाद निकालने सहित कई काम किए गए।

Beed tehsil के Pimpalner क्षेत्र में foundation ने Riddhi Siddhi नदी के करीब 34 किलोमीटर लंबे हिस्से में desilting और widening का काम कराया। इसके बाद राज्य सरकार ने नदी पर चार छोटे check dams का निर्माण किया।

इन check dams से आसपास के 14 गांवों को लाभ मिला और किसानों को अलग-अलग मौसम में फसल उगाने में मदद मिली।

करीब एक लाख किसानों को फायदा पहुंचने का दावा

Naam Foundation के जिला समन्वयक Shivram Ghodake ने बताया कि जिले में foundation की ओर से किए गए river deepening और water conservation work के बाद करीब 10,000 hectares जमीन सिंचाई के दायरे में आई, जिससे लगभग एक लाख किसानों को फायदा हुआ।

यह आंकड़ा foundation के जिला समन्वयक की ओर से दिया गया है। संगठन के काम का एक बड़ा हिस्सा उन ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने पर केंद्रित रहा, जहां सूखे के कारण खेती और ग्रामीण परिवारों की आजीविका प्रभावित होती रही है।

इस बार Beed में फिर गंभीर सूखे की स्थिति

Nana Patekar के निधन के समय Beed एक बार फिर पानी की समस्या से जूझ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में नदी के किनारे और नदी तल सूख चुके हैं तथा ग्रामीणों को अपने पशुओं के लिए पानी जुटाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे समय में उन ग्रामीण परिवारों के लिए Nana Patekar का निधन और भी भावुक कर देने वाला है, जिन्हें उनके संगठन से किसी न किसी रूप में मदद मिली थी।

जिन लोगों ने मुश्किल समय में Naam Foundation की मदद से अपनी आजीविका खड़ी की, उनके लिए Nana Patekar सिर्फ एक प्रसिद्ध अभिनेता नहीं थे। उनके लिए वह ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने संकट के समय रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखाया।

फिल्मों से आगे थी Nana Patekar की पहचान

Nana Patekar ने भारतीय सिनेमा में करीब पांच दशक तक काम किया। उनकी पहचान Parinda, Krantiveer, Ab Tak Chhappan, Welcome और Natsamrat जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय के लिए रही।

लेकिन उनके निधन के बाद उनकी सामाजिक सेवा का यह पक्ष भी सामने आ रहा है। महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों और उनके परिवारों के साथ किए गए काम ने उनकी सार्वजनिक छवि को फिल्मों से आगे एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी मजबूत किया।

Beed की Rajashree Pardeshi जैसे परिवारों के लिए Nana Patekar की विरासत किसी फिल्म या पुरस्कार तक सीमित नहीं है। उनके लिए यह विरासत उस सिलाई मशीन में दिखाई देती है, जिसने एक मुश्किल समय में परिवार की आय का जरिया बनने में मदद की।

Nana Patekar के निधन के बाद ऐसी कई कहानियां सामने आ रही हैं, जिनमें उनके सामाजिक काम का असर दिखाई देता है। Beed की महिलाओं और किसान परिवारों के लिए उनकी ओर से किए गए प्रयास लंबे समय तक याद किए जाएंगे।

Nana Patekar के निधन के बाद उनके सामाजिक काम की कहानी सामने आई। Beed की Rajashree Pardeshi को Naam Foundation ने सिलाई मशीन दी, जिससे उन्होंने परिवार के लिए कमाई शुरू की। जानिए Nana Patekar के सामाजिक कार्यों की पूरी कहानी।

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By EDITOR

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