जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। 40 के करीब मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द की गईं, जबकि मोबाइल इंटरनेट पर भी प्रतिबंध लगाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन पर व्यापक पाबंदियों को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से प्रतिबंध हटाने को कहा।

नई दिल्ली: Cockroach Janta Party (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला। शनिवार, 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के मद्देनजर अधिकारियों ने कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने, ट्रेनों को रद्द करने और मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं रोकने के आदेश दिए। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के तरीके पर सवाल उठाए और केंद्र सरकार तथा दिल्ली पुलिस को पाबंदियां हटाने का निर्देश दिया।

CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करना चाहती है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी Special Intensive Revision (SIR) में अनियमितताएं हुई हैं। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को इस प्रदर्शन के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों की आवाजाही और राजधानी में सुरक्षा इंतजामों को लेकर विवाद बढ़ गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हर स्थिति में इतने व्यापक प्रतिबंध जरूरी नहीं

दिल्ली में मेट्रो, रेल और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि किसी समस्या से निपटने के लिए जरूरत से ज्यादा कठोर उपाय नहीं अपनाए जाने चाहिए। इसी संदर्भ में अदालत ने टिप्पणी की, “आप मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करेंगे।”

अदालत ने सार्वजनिक परिवहन पर व्यापक प्रतिबंध हटाने का निर्देश दिया। इसके बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने बंद किए जाने वाले स्टेशनों की सूची में बदलाव किया। शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद करने की घोषणा की गई थी, लेकिन बाद में यह संख्या घटाकर 45 कर दी गई।

हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, मध्य दिल्ली के कई महत्वपूर्ण मेट्रो स्टेशन शनिवार शाम 6 बजे तक बंद रखे जाने थे। इसलिए यात्रियों को अपने सफर से पहले संबंधित मेट्रो स्टेशन की स्थिति की जानकारी लेने की जरूरत थी।

दिल्ली पुलिस ने CJP को प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी?

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संगठन ने 7 अक्टूबर को आवेदन किया था, जबकि नियमों के मुताबिक प्रस्तावित प्रदर्शन से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन करना जरूरी था।

संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने आवेदन की समय-सीमा और पहले हुए प्रदर्शन के दौरान नियमों के पालन से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त ने भी अपने पत्र में आशंका जताई कि प्रदर्शन की अनुमति देने से दोबारा गंभीर कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है।

पुलिस ने CJP के जुलाई में हुए प्रदर्शन का भी जिक्र किया। पुलिस के मुताबिक, उस समय एक दिन के लिए अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शन करीब एक महीने तक चला। पुलिस ने दावा किया कि उस दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे और प्रदर्शन में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे। पुलिस ने पिछले सप्ताह जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित छेड़छाड़ और मारपीट की घटनाओं का भी उल्लेख किया।

ये आंकड़े और आरोप दिल्ली पुलिस के पक्ष से सामने आए हैं। प्रदर्शन से जुड़े सभी आरोपों और घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

अभिजीत दिपके बोले- प्रदर्शन जारी रहेगा

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि संगठन के स्वयंसेवक प्रदर्शन के अपने फैसले पर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।

दिपके ने कहा, “अगर आप युवाओं से इतना डरते हैं, तो पूरे देश को बंद कर दीजिए।”

CJP के अन्य नेताओं ने भी दिल्ली में लगाए गए प्रतिबंधों की तुलना आपातकाल जैसी स्थिति से की। हालांकि, ये नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इन आरोपों पर टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोध का जवाब नहीं मिलने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

करीब 40 ट्रेनें रद्द, यात्रियों की परेशानी बढ़ने की आशंका

प्रदर्शन के मद्देनजर रेलवे ने नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में से करीब 40 ट्रेनें रद्द कर दीं। इन दोनों स्टेशनों पर शनिवार को आने वाली कुल 72 ट्रेनों में से बड़ी संख्या में सेवाएं प्रभावित हुईं।

रेलवे ने इसके पीछे शनिवार को दोनों स्टेशनों के आसपास गंभीर यातायात जाम की आशंका को कारण बताया। रिपोर्ट के अनुसार, कई ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशन से ही रद्द कर दिया गया।

इस फैसले का असर दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ सकता था। ट्रेन रद्द होने से यात्रियों को वैकल्पिक साधन तलाशने पड़ सकते थे, जबकि मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध के कारण शहर के भीतर यात्रा करना भी मुश्किल हो सकता था।

यात्रियों के लिए जरूरी है कि वे अपनी ट्रेन का स्टेटस रेलवे के आधिकारिक माध्यमों से जांचें और मेट्रो से यात्रा करने से पहले DMRC की ताजा सूचना देखें। सभी ट्रेनों या मेट्रो स्टेशनों के प्रभावित होने का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली की पूरी परिवहन व्यवस्था बंद कर दी गई थी।

45 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद

दिल्ली मेट्रो ने शुरुआत में 57 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने का आदेश जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस सूची में बदलाव किया गया और स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई।

DMRC के मुताबिक, सूची में शामिल स्टेशन शनिवार शाम 6 बजे तक बंद रहने थे। इससे मध्य दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में मेट्रो से यात्रा करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता था।

मेट्रो स्टेशन बंद करने का निर्णय प्रदर्शन स्थल के आसपास भीड़ को नियंत्रित करने और संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए किए गए सुरक्षा इंतजामों का हिस्सा बताया गया। हालांकि, सार्वजनिक परिवहन पर इतने व्यापक प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए।

मध्य दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक

दिल्ली में सुरक्षा इंतजामों के तहत मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, कर्तव्य पथ और जनपथ के चौराहे के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं शुक्रवार रात 10 बजे से शनिवार रात 10 बजे तक निलंबित करने की योजना थी।

इस क्षेत्र में मध्य दिल्ली के कई महत्वपूर्ण इलाके शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिबंध का दायरा दक्षिण की ओर सफदरजंग तक फैला था और इसमें ITO, पुराना किला तथा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास के इलाके भी शामिल थे।

इस तरह की पाबंदियों का असर मोबाइल इंटरनेट पर निर्भर रहने वाले लोगों, यात्रियों और कारोबारियों पर पड़ सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि दिल्ली के हर इलाके में इंटरनेट बंद था। प्रतिबंध एक निर्धारित क्षेत्र के लिए बताए गए थे।

दिल्ली की सीमाओं पर भी बढ़ाई गई सुरक्षा

CJP के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस, नोएडा पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने नोएडा-दिल्ली चिल्ला बॉर्डर पर जांच की। इसके अलावा राजधानी में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती और विशेष ट्रेन से अर्धसैनिक बलों को लाने की भी जानकारी दी गई।

प्रशासन की ओर से इन इंतजामों का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और भीड़ को नियंत्रित करना बताया गया। दूसरी तरफ CJP नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रतिबंधों के कारण शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

SIR विवाद क्या है और CJP क्या चाहती है?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूचियों की विशेष गहन जांच और पुनरीक्षण प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है। CJP और प्रदर्शन से जुड़े कुछ समूहों ने इस प्रक्रिया को लेकर कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

संगठन का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार करते हुए कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं का हवाला दिया।

इस पूरे विवाद में दो मुद्दे प्रमुख हो गए हैं—एक ओर SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर प्रदर्शनकारियों की मांगें हैं, तो दूसरी ओर प्रदर्शन से पहले सार्वजनिक परिवहन और आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों की जरूरत और उनके दायरे को लेकर सवाल उठे हैं।

आगे क्या?

10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में मेट्रो, रेल, मोबाइल इंटरनेट और सड़क यातायात से जुड़े कई प्रतिबंध लगाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन पर व्यापक पाबंदियों को लेकर हस्तक्षेप किया, जिसके बाद मेट्रो स्टेशनों की बंदी से जुड़ी सूची में बदलाव किया गया।

फिलहाल, इस मामले में प्रदर्शनकारियों के आरोप, पुलिस की कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताएं और अदालत के निर्देश तीनों अहम हैं। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन प्रतिबंधों को किस तरह लागू करता है और CJP अपनी मांगों को लेकर क्या कदम उठाती है।


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CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले दिल्ली में 45 मेट्रो स्टेशन बंद, करीब 40 ट्रेनें रद्द और कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट पर रोक। सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक प्रतिबंधों पर सवाल उठाए।

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By EDITOR

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