टी20 क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बल्लेबाजों का दबदबा लगातार बढ़ा है। अब इस फॉर्मेट में 200 से ज्यादा रन बनाना कोई बड़ी बात नहीं रह गई है। कई मुकाबलों में टीमें 220 से 240 रन तक का स्कोर आसानी से बना रही हैं। वहीं, गेंदबाजों के लिए बल्लेबाजों को रोकना पहले के मुकाबले काफी मुश्किल होता जा रहा है। पावरप्ले के शुरुआती छह ओवरों में ही 80 से 100 रन तक बन रहे हैं। ऐसे में क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में बल्ले और गेंद के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है।

भारत के पूर्व गेंदबाजी कोच पारस म्हाम्ब्रे ने टी20 क्रिकेट में गेंदबाजों को फिर से मुकाबले में बराबरी का मौका देने के लिए कुछ अहम सुझाव दिए हैं। उनका मानना है कि मौजूदा समय में खेल काफी हद तक बल्लेबाजों के पक्ष में झुक गया है। छोटे मैदान, छोटी बाउंड्री और पहली गेंद से आक्रामक बल्लेबाजी की रणनीति ने गेंदबाजों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

पारस म्हाम्ब्रे ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में तीन ऐसे बदलावों के सुझाव दिए, जिनसे टी20 क्रिकेट में गेंदबाजों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर मौका मिल सकता है। इनमें गेंदबाजों को पावरप्ले चुनने का अधिकार देना, दो बाउंसर की अनुमति और गेंद की स्थिति में बदलाव जैसे सुझाव शामिल हैं।

भारत-न्यूजीलैंड मैच में दिखा बल्लेबाजों का तूफानी अंदाज

टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के बढ़ते दबदबे का ताजा उदाहरण भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले में देखने को मिला। इस मैच में पावरप्ले खत्म होने तक भारत का स्कोर बिना विकेट गंवाए 118 रन था। अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की और मैदान के चारों ओर बड़े शॉट लगाए।

भारतीय बल्लेबाजों की आक्रामक बल्लेबाजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की यॉर्कर, बाउंसर और धीमी गेंदों पर भी बल्लेबाजों ने बड़े शॉट लगाए। गेंदबाजों ने अलग-अलग तरह की गेंदों से बल्लेबाजों को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली।

भारत ने 199 रन के लक्ष्य को 14 ओवर से भी कम समय में हासिल कर लिया। इस दौरान टीम ने पावरप्ले में सबसे बड़े स्कोर सहित कई रिकॉर्ड अपने नाम किए।

यह मुकाबला दिखाता है कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में केवल अच्छी गेंदबाजी करना ही काफी नहीं रह गया है। बल्लेबाज अब पहली गेंद से आक्रामक रुख अपनाते हैं और गेंदबाजों को शुरुआत से ही दबाव में डाल देते हैं।

180-190 रन का स्कोर अब टीमों के लिए पर्याप्त नहीं

पारस म्हाम्ब्रे के मुताबिक टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजी का नजरिया पूरी तरह बदल चुका है। पहले टीमें 180 या 190 रन का स्कोर बनाकर उसे बचाने की कोशिश करती थीं, लेकिन अब ज्यादातर टीमों का लक्ष्य पावरप्ले का अधिकतम फायदा उठाना और शुरुआती छह ओवरों में ही बड़ा स्कोर खड़ा करना होता है।

उन्होंने कहा कि अब टीमों की सोच यह नहीं रह गई है कि 180 या 190 रन बनाए जाएं। इसके बजाय हर टीम यह देख रही है कि शुरुआती छह ओवरों में ज्यादा से ज्यादा रन कैसे बनाए जा सकते हैं।

म्हाम्ब्रे ने कहा कि आज बल्लेबाजों का इरादा पहली गेंद से ही आक्रामक खेलने का होता है। कई टीमें पावरप्ले में ही 100 रन बनाने की कोशिश करती हैं। ऐसे में गेंदबाजों के पास गलतियों की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है।

उनका मानना है कि टी20 क्रिकेट में लगातार बड़े स्कोर और चौके-छक्कों की बढ़ती संख्या के कारण मुकाबलों में एकतरफा स्थिति बनने लगी है।

छोटे मैदान और छोटी बाउंड्री भी गेंदबाजों की परेशानी

पहले टी20 क्रिकेट में अलग-अलग देशों की पिचों और परिस्थितियों के कारण गेंदबाजों को कुछ न कुछ मदद मिल जाती थी। लेकिन अब दुनियाभर में टी20 मुकाबलों के लिए बल्लेबाजी के अनुकूल पिचों का इस्तेमाल बढ़ा है। इसके साथ ही कई मैदानों की बाउंड्री भी छोटी होती हैं।

म्हाम्ब्रे ने मौजूदा टी20 क्रिकेट को एकतरफा बताते हुए कहा कि छोटे मैदान और करीब 50 गज की सीधी बाउंड्री होने से बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने में आसानी होती है।

उन्होंने कहा, “इसे देखना धीरे-धीरे नीरस होता जा रहा है। खेल एक ही दिशा में जा रहा है, जहां बल्लेबाजों का दबदबा है। छोटे मैदान और 50 गज की सीधी बाउंड्री के साथ गेंदबाजों के लिए क्या बचता है? अगर उन पर लगातार दबाव रहेगा तो मुकाबला एकतरफा हो जाएगा।”

उनके मुताबिक खेल को रोमांचक बनाए रखने के लिए जरूरी है कि गेंदबाजों को भी कुछ अतिरिक्त विकल्प दिए जाएं, ताकि बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच मुकाबला बराबरी का हो सके।

2021 से 2026 तक भारतीय बल्लेबाजी में कितना बदलाव आया?

टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के बढ़ते आक्रामक अंदाज को आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। CricViz के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय टीम का टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्ट्राइक रेट वर्ष 2021 में 137 था, जो 2026 में बढ़कर 173 तक पहुंच गया है।

इसी तरह इंग्लैंड का स्ट्राइक रेट 2022 में 146 था, जो 2026 में बढ़कर 165 हो गया। वहीं ऑस्ट्रेलिया का स्ट्राइक रेट 2021 में 130 था और 2026 में यह 137 दर्ज किया गया।

भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का T20I स्ट्राइक रेट

वर्ष भारत ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड
2021 137 130 145
2022 153 142 146
2023 154 166 146
2024 159 162 158
2025 152 162 165
2026 173 137 165

इन आंकड़ों से साफ है कि भारतीय बल्लेबाजी का आक्रामक अंदाज पिछले कुछ वर्षों में काफी बदल गया है। खासकर 2026 में भारत का 173 का स्ट्राइक रेट इस बदलाव को दिखाता है।

भारत ने 2026 में 15 बार बनाया 200 से ज्यादा का स्कोर

टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 200 से अधिक रन बनाना अब आम होता जा रहा है। भारत के आंकड़े इस बदलाव को और स्पष्ट करते हैं। वर्ष 2021 में भारतीय टीम ने 16 मुकाबलों में केवल दो बार 200 से ज्यादा का स्कोर बनाया था। वहीं 2026 में अब तक 40 मुकाबलों में भारत 15 बार 200 से अधिक रन बना चुका है।

दूसरी टीमों में भी बड़े स्कोर बनाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। वेस्टइंडीज ने 2026 में 21 मैचों में पांच बार 200 से अधिक रन बनाए, जबकि 2021 में 25 मुकाबलों में ऐसा केवल एक बार हुआ था।

प्रमुख टीमों के 200 से ज्यादा के स्कोर

वर्ष भारत ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड दक्षिण अफ्रीका न्यूजीलैंड
2021 2/16 2/22 2/17 1/23 2/23
2022 5/40 2/21 6/27 6/18 5/22
2023 7/23 3/8 2/12 3/8 1/13
2024 9/21 4/21 1/17 2/23 3/21
2025 3/21 2/16 3/15 3/18 4/22
2026 15/40 0/10 5/19 4/21 5/26

<text color=”secondary” size=”xs”>नोट: हर आंकड़े में पहले 200 से अधिक स्कोर बनाने की संख्या और उसके बाद खेले गए कुल मैच दिए गए हैं।</text>

इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़े स्कोर बनाने के मामले में सबसे आगे है। इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों ने भी इस दिशा में अपनी बल्लेबाजी को अधिक आक्रामक बनाया है।

गेंदबाजों को मुकाबले में वापस लाने के लिए पारस म्हाम्ब्रे के 3 सुझाव

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पारस म्हाम्ब्रे ने क्रिकेट के नियमों में बदलाव की जरूरत बताई है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को ऐसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए, जिनसे गेंदबाजों को भी बल्लेबाजों पर दबाव बनाने का मौका मिले।

1. गेंदबाजों की टीम को पावरप्ले चुनने का अधिकार मिले

पारस म्हाम्ब्रे का पहला सुझाव है कि टी20 क्रिकेट में पावरप्ले का इस्तेमाल करने का विकल्प गेंदबाजी करने वाली टीम को भी दिया जाना चाहिए।

मौजूदा नियमों के तहत पारी के शुरुआती छह ओवर पावरप्ले होते हैं, जिसमें अधिकतम दो फील्डर ही 30 गज के घेरे के बाहर रह सकते हैं। म्हाम्ब्रे चाहते हैं कि गेंदबाजी करने वाली टीम को यह तय करने का विकल्प मिले कि वह अपने छह ओवर का पावरप्ले किस समय इस्तेमाल करना चाहती है।

उनका सुझाव है कि पावरप्ले को अनिवार्य रूप से पारी के शुरुआती छह ओवरों तक सीमित रखने के बजाय शुरुआती आठ या दस ओवरों के भीतर गेंदबाजी करने वाली टीम को इसे चुनने की आजादी दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि अगर गेंदबाजों को अपनी रणनीति के मुताबिक पावरप्ले इस्तेमाल करने का मौका मिलता है तो वे बल्लेबाजों के आक्रामक रुख के हिसाब से बेहतर योजना बना सकते हैं।

2. पावरप्ले में गेंद की स्थिति और बदलाव का विकल्प मिले

म्हाम्ब्रे का दूसरा सुझाव गेंद की स्थिति से जुड़ा है। उनका मानना है कि गेंदबाजों को ऐसी गेंद से गेंदबाजी करने का मौका मिलना चाहिए, जिस पर सतह से कुछ पकड़ और विविधता मिल सके।

उन्होंने विचार रखा कि पावरप्ले के दौरान गेंदबाजों को बिल्कुल नई गेंद के बजाय कुछ इस्तेमाल की हुई यानी सेमी-न्यू बॉल से गेंदबाजी करने का विकल्प दिया जा सकता है।

म्हाम्ब्रे के मुताबिक नई गेंद कई बार बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने में आसानी देती है। अगर गेंद की स्थिति में थोड़ा बदलाव हो तो गेंदबाजों को ग्रिप, मूवमेंट और अलग-अलग तरह की गेंदों से बल्लेबाजों को चुनौती देने का अवसर मिल सकता है।

उन्होंने इसे अपना एक नया विचार बताते हुए कहा कि यह जरूरी नहीं कि पावरप्ले हमेशा पारी के पहले छह ओवरों में ही हो। गेंदबाजी करने वाली टीम को अपनी जरूरत के अनुसार इसे चुनने का विकल्प मिलना चाहिए।

3. T20 क्रिकेट में एक ओवर में दो बाउंसर की अनुमति मिले

पारस म्हाम्ब्रे का तीसरा सुझाव टी20 क्रिकेट में बाउंसर के नियम से जुड़ा है। वह चाहते हैं कि गेंदबाजों को एक ओवर में दो बाउंसर डालने की अनुमति दी जाए।

उनके मुताबिक अगर गेंदबाजों को एक ओवर में दो बाउंसर डालने का मौका मिलता है तो उनके पास बल्लेबाजों को रोकने के लिए एक अतिरिक्त हथियार होगा।

म्हाम्ब्रे ने कहा कि ICC को इस बदलाव पर विचार करना चाहिए, क्योंकि मौजूदा समय में बल्लेबाजों के आक्रामक अंदाज के सामने गेंदबाजों को ज्यादा विकल्पों की जरूरत है।

उनका मानना है कि दो बाउंसर की अनुमति मिलने से गेंदबाज अपनी रणनीति में विविधता ला सकेंगे और बल्लेबाजों के लिए हर गेंद पर आक्रामक शॉट खेलना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

IPL में भी गेंदबाजों की भूमिका अहम

टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के बढ़ते दबदबे के बावजूद गेंदबाजों की अहमियत कम नहीं हुई है। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की नीलामी में तेज गेंदबाजों पर लगने वाली बड़ी बोलियां इसका उदाहरण हैं।

टीमें जानती हैं कि केवल बड़े स्कोर बनाने से टूर्नामेंट नहीं जीता जा सकता। मुश्किल परिस्थितियों में विकेट निकालना, रन रोकना और दबाव के समय अच्छी गेंदबाजी करना भी उतना ही जरूरी है।

इसी वजह से फ्रेंचाइजी ऐसे गेंदबाजों को अपनी टीम में शामिल करने के लिए बड़ी रकम खर्च करती हैं, जो डेथ ओवरों में यॉर्कर डाल सकें और पावरप्ले में विकेट निकालने की क्षमता रखते हों।

पारस म्हाम्ब्रे का मानना है कि गेंदबाजों को बेहतर मौके दिए बिना टी20 क्रिकेट में संतुलन वापस लाना मुश्किल होगा। अगर नियमों में जरूरी बदलाव किए जाते हैं तो खेल में फिर से बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच बराबरी का मुकाबला देखने को मिल सकता है।

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By EDITOR

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