भारतीय अर्थव्यवस्था ने जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में भारत की GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई। यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमान से भी अधिक रहा है। RBI ने इस अवधि में करीब 7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया था।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 8.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। हालांकि जून तिमाही में विकास दर कुछ कम हुई, लेकिन इसके बावजूद अर्थव्यवस्था ने बाजार की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया।
घरेलू मांग ने दिया अर्थव्यवस्था को सहारा
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, भारत की आर्थिक वृद्धि को सबसे बड़ा सहारा घरेलू खपत से मिला है। सरकारी खर्च, निवेश और निर्यात ने भी विकास की रफ्तार बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
HDFC Bank की अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता के अनुसार, मजबूत घरेलू खपत, सरकारी खर्च और निवेश के साथ-साथ निर्यात के बेहतर प्रदर्शन ने आर्थिक वृद्धि को समर्थन दिया।
महंगे तेल के बावजूद मजबूत रही ग्रोथ
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। मध्य-पूर्व में संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर भारत की लागत और महंगाई पर भी पड़ा है।
जुलाई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर 4.45 प्रतिशत पहुंच गई, जो करीब 19 महीने का उच्च स्तर है। यह RBI के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर रही।
क्या GDP अनुमान बढ़ सकता है?
RBI ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर करीब 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। जून तिमाही के बेहतर आंकड़ों के बाद अर्थशास्त्रियों के बीच इस अनुमान में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
भारत फिलहाल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक 8 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि बनाए रखना जरूरी होगा, खासकर रोजगार पैदा करने और भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए।
रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग बनी चुनौती
GDP के मजबूत आंकड़ों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि, निजी क्षेत्र के खर्च में कमजोरी और पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करना प्रमुख चिंताएं हैं।
इसलिए जून तिमाही की 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन आने वाले महीनों में महंगाई, ऊर्जा कीमतों, निवेश और रोजगार के मोर्चे पर प्रदर्शन महत्वपूर्ण रहेगा।
स्रोत: Financial Times की रिपोर्ट पर आधारित स्वतंत्र समाचार प्रस्तुतिd।
