Assam News: असम में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर शुरू किए गए ‘School Thik Karo’ अभियान ने अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले लिया है। अभियान चला रहे Cockroach Janta Party (CJP) और राज्य के प्रमुख छात्र संगठन All Assam Students’ Union (AASU) के बीच इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।

CJP ने कुछ दिन पहले ‘School Thik Karo’ अभियान की शुरुआत की थी। इसके तहत संगठन का दावा है कि वह राज्य के सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्रों की स्थिति का जायजा ले रहा है।

AASU ने CJP के स्कूल दौरों पर उठाए सवाल

AASU के महासचिव समीरन फुकन ने रविवार को CJP की स्कूल यात्राओं पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियां राज्य में अस्थिर स्थिति पैदा करने की दिशा में जा सकती हैं।

फुकन ने असम में नशीले पदार्थों और कथित उग्रवादी नेटवर्क से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में किसी संगठन द्वारा स्कूलों का दौरा किए जाने को लेकर सवाल उठते हैं कि कहीं इससे क्षेत्र की शांति प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं हो रही।

AASU नेता की इस टिप्पणी के बाद विवाद और तेज हो गया।

CJP ने AASU के बयान पर जताई नाराजगी

CJP ने AASU महासचिव के बयान पर निराशा जताई। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह AASU के बयान से “गहराई से हैरान और निराश” है।

CJP ने अपने बयान में AASU के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। संगठन ने कहा कि Assam Movement में AASU की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और कई पीढ़ियों के असमिया युवाओं के बीच संगठन का प्रभाव रहा है।

CJP ने यह भी कहा कि AASU का बयान उसे एक स्वतंत्र छात्र संगठन के बजाय BJP के प्रवक्ता की भाषा जैसा लगा।

AASU को ‘School Thik Karo’ अभियान में शामिल होने का न्योता

CJP ने विवाद के बीच AASU को अपने #SchoolThikKoroAbhiyan में शामिल होने का न्योता भी दिया।

संगठन ने AASU से अपील की कि उसके सदस्य भी सरकारी स्कूलों का दौरा करें, स्कूलों की वास्तविक स्थिति देखें, छात्रों और शिक्षकों से बातचीत करें और इंफ्रास्ट्रक्चर व सुविधाओं से जुड़े सवाल उठाएं।

CJP ने कहा कि राजनीति बाद में भी की जा सकती है, लेकिन राज्य के छात्रों से जुड़े मुद्दों को इंतजार नहीं करना चाहिए।

सरकारी स्कूलों की स्थिति बनी बहस का केंद्र

इस पूरे विवाद के बीच असम के सरकारी स्कूलों की स्थिति और वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। CJP अपने अभियान के जरिए स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं की स्थिति का आकलन करने की बात कर रहा है।

वहीं AASU ने इन दौरों के तरीके और उनके संभावित प्रभाव पर सवाल उठाए हैं। दोनों संगठनों की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मुद्दा अब सिर्फ स्कूलों के निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य में सामाजिक संगठनों और छात्र संगठनों की भूमिका को लेकर भी बहस शुरू हो गई है।

AASU और CJP के बीच बढ़ा सार्वजनिक मतभेद

AASU और CJP के बीच यह ताजा विवाद असम में नागरिक और छात्र संगठनों की भूमिका को लेकर एक नया सार्वजनिक मतभेद सामने लाता है।

एक ओर CJP सरकारी स्कूलों की समस्याओं को सामने लाने के लिए अपने अभियान को जरूरी बता रहा है, वहीं AASU ने इसके तरीके और संभावित प्रभाव पर चिंता जताई है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में दोनों संगठनों के बीच यह बयानबाजी आगे बढ़ती है या स्कूलों से जुड़े मुद्दों पर किसी तरह का संवाद शुरू होता है।

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By EDITOR

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