भारतीय क्रिकेट में अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की अचानक T20I टीम में वापसी ने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। 36 साल के भुवनेश्वर को न्यूजीलैंड दौरे के लिए चुनी गई भारतीय T20I टीम में जगह मिली है। वह करीब चार साल बाद भारत की जर्सी में नजर आएंगे।

भुवनेश्वर की वापसी ऐसे समय हुई है जब भारतीय टीम अपने तेज गेंदबाजी विभाग में लगातार विकल्प तलाश रही है। ऐसे में न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की T20I सीरीज उनके लिए सिर्फ वापसी का मौका नहीं, बल्कि आने वाले समय में बड़े फॉर्मेट के लिए अपनी दावेदारी पेश करने का भी अवसर हो सकती है।

IPL 2026 में शानदार प्रदर्शन ने बढ़ाई उम्मीद

भुवनेश्वर कुमार ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय टीम से बाहर रहने के बावजूद सफेद गेंद के क्रिकेट में अपनी निरंतरता बनाए रखी। IPL 2026 में उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के लिए शानदार प्रदर्शन किया और टीम के लगातार दूसरे IPL खिताब में अहम भूमिका निभाई।

इस सीजन भुवनेश्वर ने 28 विकेट हासिल किए और Purple Cap की दौड़ में भी रहे। यही प्रदर्शन उनके भारत में दोबारा चयन की चर्चा का सबसे बड़ा आधार बना।

भारत के लिए नवंबर 2022 के बाद से नहीं खेलने वाले भुवनेश्वर ने इस दौरान IPL में 72 विकेट लिए हैं, जो इस अवधि में किसी भी गेंदबाज से ज्यादा हैं। इनमें से 45 विकेट RCB के लगातार दो खिताबी सीजन में आए।

खुद भुवनेश्वर ने भी नहीं बना रखा था वापसी का लक्ष्य

दिलचस्प बात यह है कि भुवनेश्वर लंबे समय से भारतीय टीम में वापसी की उम्मीद को लेकर ज्यादा दबाव में नहीं थे। IPL 2026 के दौरान RCB द्वारा जारी एक वीडियो में उन्होंने कहा था कि उन्होंने लंबे समय के लक्ष्य बनाना बंद कर दिया है, क्योंकि पहले ऐसा करने पर चीजें उनके मुताबिक नहीं हुईं।

उन्होंने माना था कि वह भारत में वापसी के बारे में ज्यादा नहीं सोच रहे हैं और मौजूदा समय पर ध्यान दे रहे हैं।

एक अन्य बातचीत में भुवनेश्वर ने बताया कि 2022 T20 World Cup के बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें बताया था कि वह अभी भी टीम की योजनाओं में शामिल हैं और नए खिलाड़ियों को आजमाया जा रहा है। उन्होंने कुछ महीनों तक वापसी का इंतजार किया, लेकिन जब मौका नहीं मिला तो उन्हें निराशा हुई। बाद में उन्होंने इस स्थिति को स्वीकार किया और आगे बढ़ने का फैसला किया।

न्यूजीलैंड सीरीज में क्यों मिली जगह?

न्यूजीलैंड दौरे पर भारत के सामने अलग-अलग फॉर्मेट की व्यस्तता है। ODI और Test मैचों को प्राथमिकता मिलने के कारण टीम के कई प्रमुख गेंदबाज उन फॉर्मेट में व्यस्त रहेंगे।

वहीं, T20I में जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति ने भारत को एक अनुभवी तेज गेंदबाज की जरूरत दी। ऐसे में चयनकर्ताओं ने भुवनेश्वर के अनुभव और हालिया प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें पांच मैचों की T20I सीरीज के लिए चुना।

यह चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भुवनेश्वर आखिरी बार भारत के लिए 2022 में खेले थे और उसके बाद लंबे समय तक टीम से बाहर रहे।

क्या 2027 ODI World Cup के लिए भी बन सकती है जगह?

भुवनेश्वर की T20I वापसी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह अगले साल होने वाले 2027 ODI World Cup के लिए भी भारतीय टीम की योजना में शामिल हो सकते हैं?

भुवनेश्वर ने आखिरी ODI जनवरी 2022 में खेला था। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियां उनके पक्ष में जाती दिखाई दे रही हैं।

भारत को 2026 में ODI क्रिकेट में अपने गेंदबाजी विभाग से लगातार बेहतर प्रदर्शन नहीं मिल पाया है। वेस्टइंडीज के खिलाफ हालिया तीन मैचों की ODI सीरीज में भारत ने 2-1 से जीत दर्ज की, लेकिन गेंदबाजों ने कुल 1,038 रन खर्च किए।

सीरीज के आखिरी मैच में वेस्टइंडीज ने 352 रन के लक्ष्य का सफल पीछा किया, जो ODI क्रिकेट में उसका सबसे बड़ा सफल रन चेज रहा।

भारत की बल्लेबाजी मजबूत, लेकिन गेंदबाजी चिंता का विषय

2026 में भारत ने अब तक 12 ODI मैच खेले हैं और इनमें सात मुकाबले जीते हैं। इस दौरान भारतीय गेंदबाजों का औसत 41.86 रहा, जो Full Member टीमों में तीसरा सबसे खराब आंकड़ा है।

इसके विपरीत भारतीय बल्लेबाजी का औसत 50.28 रहा, जो इस साल सभी टीमों में सबसे बेहतर है।

वेस्टइंडीज के खिलाफ भी भारतीय बल्लेबाजी ने अपनी ताकत दिखाई। विराट कोहली, रोहित शर्मा, शुभमन गिल और केएल राहुल ने शतक लगाए। यानी भारत की बल्लेबाजी यूनिट मजबूत दिखाई दे रही है, लेकिन गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह के साथ एक भरोसेमंद विकल्प की तलाश अभी भी जारी है।

ऐसे में भुवनेश्वर कुमार का अनुभव भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

हालिया ODI प्रदर्शन ने बढ़ाई चिंता

वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI सीरीज में भारत ने कई तेज गेंदबाजों को आजमाया। इनमें Gurnoor Brar, Prasidh Krishna, Mohammed Siraj, Anshul Kamboj, Aquib Nabi और Nitish Kumar Reddy शामिल थे।

हालांकि, इनमें से कोई भी गेंदबाज पूरी सीरीज में ऐसा प्रभाव नहीं छोड़ पाया जिससे वह 2027 World Cup की योजना में अपनी जगह मजबूत कर सके।

Gurnoor Brar ने तीन मैचों में तीन विकेट लिए और उनका गेंदबाजी औसत 73 रहा। Mohammed Siraj ने एक मैच में 1/51 का आंकड़ा दर्ज किया। Aquib Nabi अपने डेब्यू मैच में 84 रन देकर विकेट नहीं ले सके। Anshul Kamboj ने भी नौ ओवर में 82 रन खर्च किए और विकेट नहीं मिला।

Nitish Kumar Reddy ने दो मैचों में 1/95 का आंकड़ा दर्ज किया।

इन आंकड़ों ने टीम मैनेजमेंट के सामने तेज गेंदबाजी में विकल्पों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

भुवनेश्वर के सामने सबसे बड़ी चुनौती फिटनेस और workload

हालांकि, भुवनेश्वर की 2027 World Cup की संभावित दावेदारी के रास्ते में एक बड़ी चुनौती है।

पिछले कुछ समय से उन्होंने खुद को मुख्य रूप से T20 क्रिकेट तक सीमित रखा है। उन्होंने आखिरी बार Vijay Hazare Trophy में 2023 में हिस्सा लिया था। यानी लंबे समय से उन्होंने 50 ओवर के क्रिकेट में नियमित रूप से नहीं खेला है।

इस वजह से न्यूजीलैंड के खिलाफ T20I सीरीज उनके लिए महत्वपूर्ण परीक्षा होगी। अगर वह यहां अपनी फिटनेस और गेंदबाजी स्तर को साबित करते हैं तो चयनकर्ता उनके ODI विकल्प के तौर पर भी मूल्यांकन कर सकते हैं।

लेकिन 50 ओवर के क्रिकेट में वापसी के लिए सिर्फ फॉर्म काफी नहीं होगा। टीम मैनेजमेंट को उनकी फिटनेस, workload और लगातार लंबे स्पेल करने की क्षमता पर भी नजर रखनी होगी।

World Cup खेलने की इच्छा अभी भी कायम

भुवनेश्वर कुमार ने खुद भी साफ किया है कि अगर उन्हें एक और World Cup खेलने का मौका मिलता है तो वह इसके लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा था कि World Cup में खेलने का अनुभव किसी भी खिलाड़ी के लिए खास होता है। भुवनेश्वर के मुताबिक, उनका शरीर अभी तैयार है और वह अपने घर पर भी फिजियो और ट्रेनर की मदद से ट्रेनिंग कर रहे हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह फिलहाल 50 ओवर के World Cup को ध्यान में रखकर ट्रेनिंग नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसलिए ट्रेनिंग कर रहे हैं क्योंकि वह ऐसा करना चाहते हैं।

उनका कहना था कि अगर उनका चयन होता है तो वह खुश होंगे और अगर चयन नहीं होता तो उन्हें निराशा नहीं होगी।

अब सबकी नजर न्यूजीलैंड T20I सीरीज पर

चार साल बाद भारतीय टीम में वापसी के बाद भुवनेश्वर कुमार के सामने अब खुद को साबित करने का मौका है। न्यूजीलैंड के खिलाफ T20I सीरीज में उनका प्रदर्शन यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि उनकी वापसी सिर्फ एक छोटी अवधि के लिए है या वह भारतीय टीम की लंबी अवधि की योजनाओं में भी जगह बना सकते हैं।

अगर भुवनेश्वर अपनी पुरानी स्विंग, नियंत्रण और डेथ ओवरों की गेंदबाजी के साथ प्रभाव डालने में सफल रहते हैं, तो 2027 ODI World Cup के लिए उनके नाम पर विचार किए जाने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

फिलहाल, 36 साल की उम्र में मिली यह वापसी भुवनेश्वर कुमार के लिए एक और बड़ी पारी की शुरुआत हो सकती है। अब यह उनके प्रदर्शन पर निर्भर करेगा कि वह इसे कितनी दूर तक ले जाते हैं।

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By EDITOR

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