IIT Bombay में परीक्षा के दौरान नकल या अनुचित साधनों (Unfair Means) के इस्तेमाल को लेकर लागू मौजूदा नियमों में बदलाव की संभावना है। संस्थान एक सेमेस्टर की Academic Suspension वाले प्रावधान को फिलहाल रोकने पर विचार कर सकता है। इस मुद्दे पर बुधवार को होने वाली Special Emergency Senate Meeting में चर्चा होने की संभावना है।

यह घटनाक्रम 18 सितंबर को एक छात्र की मौत के बाद गठित समिति की समीक्षा के बाद सामने आया है। समिति ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं और उनसे जुड़े अनुशासनात्मक नियमों की मौजूदा प्रक्रिया की समीक्षा की और इसमें कुछ बदलाव सुझाए हैं।

2026 में लागू किए गए थे सख्त नियम

IIT Bombay ने 2026 में परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को सख्त किया था। मौजूदा व्यवस्था के तहत परीक्षा में Unfair Means का इस्तेमाल करते पाए जाने वाले छात्रों को FR2 Grade दिया जा सकता है और उनके खिलाफ एक सेमेस्टर की Academic Suspension की कार्रवाई हो सकती है।

इन नियमों में कई तरह के मामलों को शामिल किया गया है। इनमें परीक्षा के दौरान बिना अनुमति वाली सामग्री रखना या इस्तेमाल करना और मोबाइल फोन, टैबलेट तथा Smartwatch जैसे Electronic Devices का इस्तेमाल भी शामिल है।

अगर कोई छात्र दोबारा इसी तरह के मामले में पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ Suspension की कार्रवाई का प्रावधान भी है।

अब समिति की समीक्षा के बाद यह सवाल सामने आया है कि क्या हर मामले में एक सेमेस्टर की Suspension लागू करना उचित है या सजा को अपराध की गंभीरता के आधार पर तय किया जाना चाहिए।

2015 के नियमों की ओर लौटने पर हो सकता है विचार

प्रस्तावित बदलावों में IIT Bombay की 2015 की पुरानी व्यवस्था के कुछ हिस्सों को दोबारा लागू करने पर विचार किया जा सकता है।

2015 के नियमों में परीक्षा में नकल या अनुचित साधनों के हर मामले में Suspension को अनिवार्य नहीं बनाया गया था। Suspension मुख्य रूप से गंभीर मामलों में लागू की जाती थी, जैसे Mass Copying, बार-बार नियमों का उल्लंघन और Impersonation।

इस व्यवस्था में सजा तय करते समय मामले की प्रकृति और उसकी गंभीरता को ध्यान में रखा जाता था।

यानी किसी छात्र के खिलाफ कार्रवाई केवल इस आधार पर नहीं होती थी कि उसके पास अनुचित सामग्री मिली है, बल्कि पूरे मामले और उपलब्ध सबूतों को भी देखा जाता था।

पुराने नियमों में कैसे होती थी जांच?

2015 की प्रक्रिया में परीक्षा के दौरान अगर Invigilator को किसी छात्र के पास अनुचित सामग्री मिलती थी या Unfair Means का संदेह होता था, तो संबंधित सामग्री को जब्त किया जाता था।

इसके बाद छात्र को नई Answer Book देकर परीक्षा जारी रखने की अनुमति दी जाती थी। घटना की रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभाग के प्रमुख को भेजी जाती थी।

मामले की आगे जांच Departmental Academic Disciplinary Action Committee करती थी। समिति उपलब्ध सबूतों की समीक्षा करती और यह तय करती थी कि वास्तव में परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।

पुरानी व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी था कि अगर उपलब्ध सबूत स्पष्ट नहीं हैं तो छात्र को Benefit of Doubt दिया जाना चाहिए।

18 सितंबर की घटना के बाद समिति ने दिए सुझाव

18 सितंबर की घटना के बाद IIT Bombay ने मामले और उससे जुड़ी प्रक्रिया की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की थी। समिति ने परीक्षा में अनुशासनात्मक मामलों से निपटने के लिए अधिक स्पष्ट प्रक्रिया की जरूरत बताई है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किसी छात्र के खिलाफ अंतिम अनुशासनात्मक फैसला लेने से पहले उसके Mentor, Head of Department और अन्य संबंधित अधिकारियों को प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश हो सकती है कि किसी बड़े अकादमिक दंड से पहले मामले के सभी पहलुओं की समीक्षा की जाए।

सजा को अपराध की गंभीरता से जोड़ने पर जोर

समिति ने Suspension के प्रावधान की दोबारा समीक्षा करने का सुझाव भी दिया है। इसमें यह देखा जा सकता है कि क्या हर मामले में एक सेमेस्टर की Suspension जरूरी है या अपराध की प्रकृति के आधार पर सजा को कम या बदला जा सकता है।

इस प्रस्ताव से परीक्षा में अनुचित साधनों के खिलाफ कार्रवाई और छात्रों को उचित प्रक्रिया दिए जाने के बीच संतुलन पर चर्चा होने की संभावना है।

मसलन, गंभीर और बार-बार होने वाले मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रखी जा सकती है, जबकि कम गंभीर मामलों में अलग तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम व्यवस्था क्या होगी, यह Senate की चर्चा और फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।

Emergency Senate Meeting में होगा फैसला

IIT Bombay की Special Emergency Senate Meeting में समिति की सिफारिशों पर चर्चा होने की उम्मीद है। बैठक में यह तय किया जा सकता है कि 2026 में लागू किए गए मौजूदा नियमों को उसी रूप में जारी रखा जाए या उनमें बदलाव किया जाए।

खास तौर पर एक सेमेस्टर की Academic Suspension, FR2 Grade और Unfair Means मामलों की जांच प्रक्रिया पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।

पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि परीक्षा में अनुचित साधनों के खिलाफ सख्ती बरकरार रखते हुए छात्रों के लिए ऐसी प्रक्रिया कैसे बनाई जाए जिसमें आरोपों की उचित जांच हो और सजा मामले की गंभीरता के अनुरूप तय की जाए।

फिलहाल, IIT Bombay की Senate Meeting के बाद ही यह साफ होगा कि संस्थान मौजूदा Suspension नियम को स्थगित करता है, उसमें बदलाव करता है या 2026 में लागू व्यवस्था को ही जारी रखता है।

Share this News

By EDITOR

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x