भारतीय टी20 टीम में इन दिनों बल्लेबाजों के बैटिंग ऑर्डर में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ईशान किशन, संजू सैमसन और तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ियों को अलग-अलग नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा जा रहा है। टीम मैनेजमेंट का यह प्रयोग कितना सही है और क्या इससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर पड़ता है? इस मुद्दे पर भारत के पूर्व क्रिकेटर वसीम जाफर, प्रवीण अमरे और डब्ल्यूवी रमन ने अपनी राय रखी है।

टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजी का अंदाज पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदला है। अब केवल अपनी तय बल्लेबाजी पोजिशन पर खेलने के बजाय खिलाड़ियों से उम्मीद की जाती है कि वे टीम की जरूरत के हिसाब से किसी भी नंबर पर उतरकर तेजी से रन बना सकें। आधुनिक टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजी क्रम को लचीला रखने यानी फ्लेक्सिबल बैटिंग ऑर्डर की रणनीति कई टीमों का हिस्सा बन चुकी है। भारतीय टीम भी इसी दिशा में प्रयोग कर रही है।

हाल के महीनों में भारतीय टीम के बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव देखने को मिले हैं। ईशान किशन, संजू सैमसन और तिलक वर्मा को अलग-अलग बल्लेबाजी नंबर पर आजमाया गया है। कई बार यह बदलाव टीम संयोजन के कारण होता है, तो कभी विपक्षी टीम के गेंदबाजी आक्रमण, पिच की परिस्थितियों या मैच की स्थिति को देखते हुए बल्लेबाजों की भूमिका बदली जाती है।

हालांकि, इस रणनीति के साथ एक सवाल भी जुड़ा है। क्या बार-बार बल्लेबाजी क्रम बदलने से खिलाड़ी अपनी स्वाभाविक भूमिका और लय खो सकते हैं? या फिर टी20 क्रिकेट में टीम की जरूरत के अनुसार खुद को ढालना ही सफल होने का सबसे अच्छा तरीका है? भारत के तीन पूर्व क्रिकेटरों ने इस विषय पर अपनी राय रखी है।

ईशान किशन, संजू सैमसन और तिलक वर्मा के बल्लेबाजी क्रम में बदलाव

भारतीय टीम में हाल के दिनों में जिन खिलाड़ियों के बल्लेबाजी क्रम में सबसे ज्यादा बदलाव देखने को मिले हैं, उनमें ईशान किशन, संजू सैमसन और तिलक वर्मा शामिल हैं। ये तीनों खिलाड़ी शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी करने की क्षमता रखते हैं, लेकिन टीम संयोजन के चलते इन्हें अलग-अलग नंबर पर खेलने का मौका दिया गया है।

ईशान किशन ने दो साल से ज्यादा समय बाद इस साल की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की थी। वापसी के बाद उन्होंने तीसरे नंबर पर अच्छा प्रदर्शन किया है। आंकड़ों के मुताबिक, ईशान ने नंबर-3 पर 28 मैचों में 35.9 की औसत से 933 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 171.2 रहा है।

वहीं, ओपनर के तौर पर खेले गए पांच मुकाबलों में ईशान ने 35.2 की औसत और 193.41 के स्ट्राइक रेट से 176 रन बनाए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि ईशान तीसरे नंबर पर भी प्रभावी रहे हैं और ओपनिंग में भी तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं।

दूसरी ओर, संजू सैमसन के आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं। ओपनर के रूप में उन्होंने 27 मैचों में 30.11 की औसत और 177.55 के स्ट्राइक रेट से 783 रन बनाए हैं। लेकिन तीसरे नंबर पर उन्हें उतनी सफलता नहीं मिली। इस पोजिशन पर खेले गए तीन मैचों में संजू केवल 27 रन बना सके और उनका औसत 9 रहा।

तिलक वर्मा की बात करें तो उनका सबसे प्रभावी प्रदर्शन पांचवें नंबर पर देखने को मिला है। उन्होंने इस पोजिशन पर 17 मैचों में 38.7 की औसत और 145 के स्ट्राइक रेट से 348 रन बनाए हैं। हालांकि, तीसरे नंबर पर उनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। इस नंबर पर सात मैचों में तिलक ने 16.4 की औसत और 108.5 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं।

इन आंकड़ों से साफ है कि हर बल्लेबाज हर पोजिशन पर एक जैसा प्रदर्शन नहीं कर पाता। कुछ खिलाड़ियों को ओपनिंग में अधिक सहजता महसूस होती है, जबकि कुछ मध्यक्रम में बेहतर भूमिका निभाते हैं।

वैभव सूर्यवंशी को नंबर-3 पर भेजने का प्रयोग क्यों चर्चा में आया?

भारत और न्यूजीलैंड के बीच दूसरे टी20 मुकाबले में भी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव देखने को मिला। ईशान किशन ग्रोइन इंजरी के कारण इस मुकाबले से बाहर हो गए थे। इसके बाद भारतीय टीम ने संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की ओपनिंग जोड़ी को बरकरार रखने का फैसला किया। ऐसे में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया।

हालांकि, नंबर-3 पर सूर्यवंशी अपनी सहज लय में नजर नहीं आए। इसके बाद अगले मुकाबले में उन्हें फिर से ओपनिंग की जिम्मेदारी दी गई। वहां अभिषेक शर्मा के साथ उन्होंने पावरप्ले में रिकॉर्ड प्रदर्शन वाली बल्लेबाजी में हिस्सा लिया।

इस उदाहरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि क्या युवा खिलाड़ियों को लगातार अलग-अलग नंबर पर भेजना सही है? किसी खिलाड़ी को एक खास बल्लेबाजी क्रम पर खेलने की आदत होती है। उस नंबर के हिसाब से वह अपनी रणनीति बनाता है और पारी की शुरुआत से लेकर अंत तक की भूमिका समझता है। अचानक पोजिशन बदलने से उसके लिए खुद को ढालना आसान नहीं होता।

हालांकि, चोट, टीम संयोजन और मैच की परिस्थितियों के कारण ऐसे बदलाव कई बार जरूरी भी हो जाते हैं।

वसीम जाफर बोले- टीम के लिए लचीलापन जरूरी

भारत के पूर्व बल्लेबाज वसीम जाफर का मानना है कि मौजूदा टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजी क्रम में लचीलापन रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, जब टीम में ऐसे कई खिलाड़ी मौजूद हों जो शीर्ष क्रम में खेलना पसंद करते हैं, तो सभी को अपनी पसंदीदा पोजिशन देना संभव नहीं होता।

जाफर ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन और ईशान किशन तीनों ही बल्लेबाजी क्रम में पहले और दूसरे नंबर पर खेलना पसंद करते हैं। लेकिन यदि ये तीनों खिलाड़ी एक साथ टीम में हैं, तो किसी एक को तीसरे नंबर पर उतरना ही होगा। ऐसे में टीम को अपने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को खिलाने के लिए बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि आदर्श स्थिति में हर खिलाड़ी का एक निश्चित बल्लेबाजी नंबर होना चाहिए, लेकिन अगर टीम का संयोजन इसकी मांग करता है तो खिलाड़ियों को थोड़ा लचीला होना पड़ेगा। जाफर के अनुसार, व्यक्तिगत पसंद से ज्यादा टीम की जरूरत को प्राथमिकता देना जरूरी है।

उनकी राय में टी20 क्रिकेट में खिलाड़ियों को केवल अपनी तय पोजिशन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। टीम की रणनीति के अनुसार अलग-अलग भूमिकाएं निभाने की तैयारी भी होनी चाहिए।

प्रवीण अमरे ने कहा- नई पोजिशन पर खेलने के लिए मानसिक तैयारी जरूरी

पूर्व भारतीय क्रिकेटर प्रवीण अमरे भी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव को जरूरी मानते हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि किसी खिलाड़ी के लिए अचानक नई पोजिशन पर बल्लेबाजी करना आसान नहीं होता।

अमरे के मुताबिक, बल्लेबाज जब लंबे समय तक किसी एक नंबर पर खेलता है तो उसके दिमाग में उस भूमिका को लेकर एक खास रणनीति बन जाती है। उदाहरण के तौर पर, एक ओपनर को पता होता है कि उसके पास पूरी पारी के 120 गेंदों में से काफी गेंदें खेलने का अवसर हो सकता है। वह अपनी पारी को उसी हिसाब से तैयार करता है।

लेकिन तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी को यह पहले से पता नहीं होता कि उसे किस समय मैदान पर उतरना पड़ेगा। विकेट जल्दी गिरने पर उसे शुरुआत से पारी संभालनी पड़ सकती है, जबकि अच्छी शुरुआत मिलने पर उसे अलग भूमिका निभानी होती है।

अमरे ने कहा कि नई पोजिशन पर खेलने के लिए खिलाड़ियों के भीतर मानसिक रूप से तैयार रहने और बदलाव को स्वीकार करने की क्षमता होनी चाहिए। अगर बल्लेबाज में सही इरादा और परिस्थितियों के अनुसार खेलने की इच्छा है, तो वह नई जिम्मेदारी को संभाल सकता है।

उन्होंने इसके उदाहरण के तौर पर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2001 की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज का जिक्र किया। अमरे ने वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ की साझेदारी का उदाहरण देते हुए बताया कि उस मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों ने जरूरत के अनुसार बल्लेबाजी क्रम में बदलाव किया था। पहली पारी में राहुल द्रविड़ तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे थे, जबकि दूसरी पारी में वीवीएस लक्ष्मण ने नंबर-3 की जिम्मेदारी संभाली थी।

अमरे के अनुसार, क्रिकेट में टीम की जरूरत के हिसाब से अपनी भूमिका बदलने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है।

डब्ल्यूवी रमन की राय- अनुभवी खिलाड़ियों को पहले बदलाव करना चाहिए

पूर्व भारतीय क्रिकेटर डब्ल्यूवी रमन ने इस मुद्दे पर जाफर और अमरे से कुछ अलग नजरिया रखा। उनका मानना है कि अगर टीम को बल्लेबाजी क्रम में बदलाव की जरूरत है तो सबसे पहले अनुभवी खिलाड़ियों को इसके लिए आगे आना चाहिए।

रमन के अनुसार, युवा खिलाड़ियों को बार-बार अलग-अलग नंबर पर भेजने के बजाय टीम में अनुभव रखने वाले बल्लेबाजों को नई जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। उन्होंने दूसरे टी20 मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी को तीसरे नंबर पर भेजने के फैसले पर भी सवाल उठाया।

रमन का मानना था कि उस मुकाबले में संजू सैमसन को नंबर-3 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यदि किसी परिस्थिति में बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करना जरूरी है, तो ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी को नई पोजिशन पर खेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।

उन्होंने राहुल द्रविड़ और केएल राहुल जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि अनुभवी क्रिकेटरों ने जरूरत पड़ने पर टीम के लिए अलग-अलग भूमिकाएं निभाई हैं।

रमन के मुताबिक, अगर किसी खिलाड़ी ने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला है और उसके पास पर्याप्त अनुभव है, तो उसे टीम की जरूरत के हिसाब से अपनी भूमिका बदलने के लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसे खिलाड़ियों को खुद आगे आकर कहना चाहिए कि वे टीम के लिए किसी भी नंबर पर बल्लेबाजी करने को तैयार हैं।

क्या भारत के लिए फ्लेक्सिबल बैटिंग ऑर्डर सही रणनीति है?

टी20 क्रिकेट में फ्लेक्सिबल बैटिंग ऑर्डर के अपने फायदे और चुनौतियां दोनों हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि टीम मैच की स्थिति के हिसाब से अपने बल्लेबाजों का इस्तेमाल कर सकती है। अगर सामने स्पिन गेंदबाज ज्यादा हैं तो किसी खास बल्लेबाज को पहले भेजा जा सकता है। वहीं, तेज गेंदबाजी या पिच की परिस्थितियों के अनुसार भी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव किया जा सकता है।

इसके अलावा, चोट या किसी खिलाड़ी की अनुपलब्धता की स्थिति में टीम को नए विकल्प आजमाने का मौका मिलता है। इससे टीम के पास एक ही बल्लेबाजी क्रम पर निर्भर रहने के बजाय कई संयोजन तैयार करने की सुविधा होती है।

लेकिन लगातार बदलाव का नुकसान भी हो सकता है। किसी बल्लेबाज को अपनी भूमिका और बल्लेबाजी की पोजिशन समझने के लिए समय चाहिए। यदि उसे बार-बार अलग नंबर पर भेजा जाता है तो उसकी तैयारी और मानसिक सहजता प्रभावित हो सकती है। आंकड़े भी दिखाते हैं कि संजू सैमसन और तिलक वर्मा ने कुछ खास पोजिशन पर बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि दूसरी पोजिशन पर उनका प्रदर्शन उतना प्रभावी नहीं रहा।

इसलिए भारतीय टीम के सामने चुनौती केवल बल्लेबाजी क्रम में प्रयोग करने की नहीं, बल्कि यह तय करने की भी है कि किस खिलाड़ी को किस भूमिका में सबसे ज्यादा सफलता मिल सकती है।

वसीम जाफर और प्रवीण अमरे जहां टीम की जरूरत के हिसाब से लचीलेपन को जरूरी मानते हैं, वहीं डब्ल्यूवी रमन का जोर इस बात पर है कि बदलाव की जिम्मेदारी अनुभवी खिलाड़ियों को ज्यादा उठानी चाहिए। तीनों पूर्व क्रिकेटरों की राय से एक बात साफ है कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह स्थायी रखना हमेशा संभव नहीं है, लेकिन बदलाव करते समय खिलाड़ियों की क्षमता, अनुभव और उनकी स्वाभाविक भूमिका को नजरअंदाज भी नहीं किया जाना चाहिए।

भारतीय टी20 टीम में ईशान किशन, संजू सैमसन और तिलक वर्मा के बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव हो रहे हैं। जानिए वसीम जाफर, प्रवीण अमरे और डब्ल्यूवी रमन ने फ्लेक्सिबल बैटिंग ऑर्डर पर क्या कहा।

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By EDITOR

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