पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रदेश संगठन में बदलाव की तैयारी तेज कर दी है। सचिन पायलट की नेताओं से बातचीत और फीडबैक के बाद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटने के लिए कहा गया।

पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से पद छोड़ने को कहा है। यह फैसला कांग्रेस के पंजाब प्रभारी और AICC महासचिव सचिन पायलट की ओर से राज्य के नेताओं और सांसदों से की गई बैठकों के बाद लिया गया।

सचिन पायलट ने 5 सितंबर को भूपेश बघेल की जगह पंजाब कांग्रेस के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद उन्होंने पिछले कुछ हफ्तों में पंजाब के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों से मुलाकात कर संगठन की स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की।

सूत्रों के मुताबिक, पंजाब के सात कांग्रेस लोकसभा सांसदों में से अधिकांश और कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की मांग की थी। इसके बाद पार्टी ने नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश शुरू कर दी है।

चन्नी के साथ तालमेल भी बड़ी चुनौती

कांग्रेस के सामने नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की चुनौती है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ बेहतर तालमेल भी पार्टी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

भूपेश बघेल के प्रभारी रहते राजा वड़िंग को संगठन में समर्थन मिला था। वहीं, सचिन पायलट ने चन्नी और वड़िंग दोनों से मुलाकात कर संगठन के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश की। पायलट ने हाल ही में कहा था कि चन्नी ने आगामी चुनाव के लिए पार्टी के प्रयासों में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया है।

पायलट की ओर से पार्टी नेतृत्व को दी गई रिपोर्ट में प्रदेश संगठन में बदलाव की सिफारिश की गई। यह रुख जुलाई में भूपेश बघेल की रिपोर्ट से अलग था, जिसमें उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष बदलने की जरूरत को लगभग खारिज कर दिया था।

विजय इंदर सिंगला का नाम चर्चा में

राजा वड़िंग के उत्तराधिकारी के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। सिंगला बनिया समुदाय से आते हैं और मालवा क्षेत्र से जुड़े हैं।

पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पंजाब की राजनीति में जाट सिख समुदाय का प्रभाव महत्वपूर्ण है, जबकि मालवा राज्य का सबसे बड़ा चुनावी क्षेत्र है।

सिंगला की संभावित नियुक्ति की स्थिति में विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा को भी संगठन में अधिक जिम्मेदारियां दिए जाने की चर्चा है। बाजवा माझा क्षेत्र से आते हैं, जबकि चन्नी और सिंगला मालवा क्षेत्र से जुड़े हैं।

2022 के प्रदर्शन से कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती

पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। उस चुनाव में कांग्रेस केवल 18 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि शिरोमणि अकाली दल को तीन सीटें मिली थीं।

ऐसे में कांग्रेस आगामी चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और विभिन्न सामाजिक व क्षेत्रीय समूहों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश कर रही है। नए प्रदेश अध्यक्ष का चयन इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

सचिन पायलट से जब पार्टी के रुख में बदलाव को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “राजनीति में बदलाव के लिए कभी देर नहीं होती।”

Share this News

By EDITOR

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x