मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले YouTuber ध्रुव राठी को गुरुग्राम में हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। इस कार्रवाई के बाद Cockroach Janta Party (CJP) ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि सत्ता उन युवाओं से डर रही है, जो गलत कामों पर सवाल उठाते हैं और चुप रहने को तैयार नहीं हैं। ध्रुव राठी के अलावा कंटेंट क्रिएटर काव्या कर्नाटक और CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह घटनाक्रम दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले हुआ है। प्रदर्शन का संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर उठाए जा रहे सवालों से है। प्रशासन ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसी बीच दिल्ली और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और कई स्थानों पर आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए।
गुरुग्राम स्थित आवास से हिरासत में लिए गए ध्रुव राठी
जानकारी के मुताबिक, जर्मनी में रहने वाले YouTuber ध्रुव राठी हाल ही में भारत आए थे। उन्हें दिल्ली में CJP के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होना था। शनिवार सुबह गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित केंद्रीय विहार सोसायटी में उनके आवास पर पुलिस पहुंची।
रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम पुलिस ने ध्रुव राठी से दिल्ली नहीं जाने और प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल नहीं होने का आग्रह किया। पुलिस की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया, जब प्रदर्शन की अनुमति पहले ही नहीं दी गई थी। बताया गया है कि ध्रुव राठी के दिल्ली नहीं जाने की बात मानने से इनकार करने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में हिरासत के बाद उनकी रिहाई, किसी औपचारिक गिरफ्तारी या उनके खिलाफ दर्ज मामले को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए हिरासत और गिरफ्तारी को एक ही अर्थ में नहीं देखा जाना चाहिए।
काव्या कर्नाटक और रत्ना सिंह भी हिरासत में
ध्रुव राठी के अलावा कंटेंट क्रिएटर काव्या कर्नाटक को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। सोशल मीडिया पर ‘kk.create’ नाम से पहचानी जाने वाली काव्या को दिल्ली के धौला कुआं इलाके में हिरासत में लिया गया।
इसके साथ ही CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह को भी हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। इन कार्रवाइयों के बाद CJP ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए और हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करने की मांग की।
CJP ने अपनी प्रतिक्रिया में पुलिस की कार्रवाई को जरूरत से ज्यादा सख्त बताते हुए आरोप लगाया कि चुनावी सूची से जुड़ी अनियमितताओं के मुद्दे पर उठ रही असहमति को दबाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, सरकार या पुलिस की ओर से इन सभी आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध कराए गए विवरण में शामिल नहीं है।
CJP ने कहा- ‘तानाशाह युवाओं से डरा हुआ है’
ध्रुव राठी की हिरासत के बाद CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार उन युवाओं से डरती है, जो सवाल पूछते हैं और कथित गलतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हैं।
CJP ने अपने बयान में कहा कि वह ध्रुव राठी और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा करती है। पार्टी ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक असहमति को दबाने की कोशिश बताया।
CJP के मुताबिक, ये कार्रवाइयां मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार की ओर से की जा रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा हैं। पार्टी ने ध्रुव राठी और अन्य हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि सरकार को ‘तानाशाह’ बताने और कार्रवाई को लोकतांत्रिक विरोध दबाने की कोशिश कहने वाली भाषा CJP के राजनीतिक आरोपों का हिस्सा है। इसे किसी स्वतंत्र जांच से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहा विवाद है। विपक्ष और प्रदर्शन से जुड़े कुछ समूहों ने इस प्रक्रिया के संबंध में सवाल उठाए हैं और चुनावी पारदर्शिता को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।
इसी मुद्दे पर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन प्रस्तावित था। प्रदर्शन में शामिल होने की योजना बनाने वाले लोगों में ध्रुव राठी और अन्य कंटेंट क्रिएटर भी शामिल थे। लेकिन प्रशासन की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद दिल्ली और आसपास के इलाकों में सुरक्षा प्रबंध बढ़ा दिए गए।
ध्रुव राठी को गुरुग्राम में हिरासत में लिए जाने के बाद यह विवाद और चर्चा में आ गया। CJP ने इसे चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई बताया, जबकि उपलब्ध विवरण में पुलिस की ओर से हिरासत के संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण शामिल नहीं है।
इस मामले में प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने, पुलिस की कार्रवाई और नागरिकों के विरोध करने के अधिकार से जुड़े सवाल प्रमुख हो गए हैं। इन मुद्दों पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित प्रशासनिक आदेशों और पुलिस के आधिकारिक पक्ष की जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 40 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात
प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के 40,000 से अधिक जवानों की तैनाती की गई। संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और कुछ मार्गों पर स्पाइक स्ट्रिप्स भी लगाई गईं।
निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के आसपास भी सुरक्षा बढ़ाई गई। संसद मार्ग और अशोक रोड के चौराहे के पास एक बस लगाकर अशोक रोड से निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर जाने वाले रास्ते को अवरुद्ध किए जाने की जानकारी दी गई। आयोग के मुख्यालय के बाहर बैरिकेड लगाए गए और बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए।
इसके अलावा, प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की। इस तरह के आदेशों का उद्देश्य संबंधित क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और निर्धारित परिस्थितियों में लोगों के जमावड़े पर प्रतिबंध लगाना होता है।
सुरक्षा के इन व्यापक इंतजामों के कारण दिल्ली के कई संवेदनशील इलाकों में सामान्य आवाजाही प्रभावित होने की आशंका भी बनी रही।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध में बदलाव
प्रदर्शन से पहले दिल्ली मेट्रो की सेवाओं को लेकर भी प्रतिबंध लगाए गए थे। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने पहले 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का फैसला लिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस फैसले में बदलाव किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, 9 अक्टूबर रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक सूचीबद्ध 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने का निर्णय लिया गया। इन प्रतिबंधों का असर यात्रियों की आवाजाही पर पड़ सकता है, खासकर उन लोगों पर जो संबंधित स्टेशनों के जरिए मध्य दिल्ली और संवेदनशील इलाकों तक पहुंचते हैं।
मेट्रो के अलावा रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच कुल 254 ट्रेनें रद्द की गईं। इनमें 75 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें तथा 179 लोकल ट्रेनें शामिल थीं।
मोबाइल इंटरनेट, मेट्रो और रेल सेवाओं के साथ कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी दी गई। इन कदमों का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया है, हालांकि प्रतिबंधों के सटीक दायरे और प्रत्येक सेवा पर उनके प्रभाव की पुष्टि संबंधित आधिकारिक सूचनाओं से की जानी चाहिए।
हिरासत और विरोध प्रदर्शन को लेकर उठे कई सवाल
ध्रुव राठी की हिरासत के बाद अब इस घटनाक्रम को लेकर कई सवाल चर्चा में हैं। पहला सवाल यह है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद पुलिस ने किन परिस्थितियों और आदेशों के आधार पर कार्रवाई की। दूसरा सवाल यह है कि हिरासत में लिए गए लोगों को कितनी देर तक रखा गया और क्या उन्हें बाद में रिहा किया गया। तीसरा सवाल यह है कि SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष तथा प्रदर्शनकारियों की शिकायतों पर प्रशासन की ओर से क्या जवाब दिया जाएगा।
CJP ने इन कार्रवाइयों को लोकतांत्रिक असहमति को दबाने की कोशिश बताया है और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग की है। वहीं, प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने और पुलिस की कार्रवाई के पीछे प्रशासनिक कारणों का पूरा विवरण उपलब्ध कराए गए घटनाक्रम में सामने नहीं आया है।
फिलहाल, ध्रुव राठी की हिरासत, CJP की प्रतिक्रिया और दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजामों ने SIR विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन हिरासत और प्रतिबंधों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
