इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जो रूट इन दिनों टेस्ट क्रिकेट में एक ऐसे मुकाम की ओर बढ़ रहे हैं, जहां पहुंचने के बाद वह सचिन तेंदुलकर के सबसे बड़े रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकते हैं। टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड फिलहाल भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर के नाम है। वहीं, जो रूट इस सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच चुके हैं और लगातार अपने रनों की संख्या बढ़ा रहे हैं।
इस बीच सचिन तेंदुलकर ने जो रूट की बल्लेबाजी और उनके क्रिकेट करियर को लेकर अपनी राय साझा की है। सचिन ने इंग्लैंड के इस बल्लेबाज की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने रूट की प्रतिभा को उनके पहले टेस्ट मैच में ही पहचान लिया था। सचिन के मुताबिक, उन्हें शुरुआत से ही भरोसा था कि जो रूट भविष्य में बड़ा खिलाड़ी बनने वाले हैं।
सचिन तेंदुलकर ने यह बात मंगलवार को रेडिट पर आयोजित एक ‘आस्क मी एनीथिंग’ (AMA) सेशन के दौरान कही। उनसे पूछा गया था कि टेस्ट क्रिकेट में उनके सबसे ज्यादा रन बनाने के रिकॉर्ड के करीब पहुंच रहे जो रूट को लेकर उनकी क्या राय है।
टेस्ट क्रिकेट में सचिन के रिकॉर्ड से 1,643 रन दूर हैं जो रूट
जो रूट टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने 169 टेस्ट मैचों की 309 पारियों में कुल 14,278 रन बनाए हैं। अब वह सचिन तेंदुलकर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड से केवल 1,643 रन पीछे हैं।
सचिन तेंदुलकर ने अपने टेस्ट करियर में 200 मैच खेले और 329 पारियों में 15,921 रन बनाए। उनका यह रिकॉर्ड लंबे समय से टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता रहा है।
जो रूट की मौजूदा उपलब्धियां बताती हैं कि वह इस रिकॉर्ड के काफी करीब पहुंच चुके हैं। हालांकि, सचिन के रिकॉर्ड को पार करने के लिए उन्हें अभी 1,643 रन और बनाने होंगे। इसके लिए उनके आने वाले टेस्ट मैच और उनका प्रदर्शन महत्वपूर्ण रहने वाला है।
‘पहले टेस्ट मैच में ही समझ गया था कि वह बड़ा खिलाड़ी बनेगा’
रेडिट पर आयोजित सवाल-जवाब सत्र में सचिन तेंदुलकर से पूछा गया कि वह जो रूट के बारे में क्या सोचते हैं और क्या उन्हें लगता है कि इंग्लैंड का यह बल्लेबाज उनके टेस्ट रन के रिकॉर्ड को तोड़ सकता है?
इस सवाल के जवाब में सचिन ने रूट की तारीफ करते हुए कहा, “मैंने हमेशा उन्हें बहुत ऊंचा दर्जा दिया है और उनके पहले टेस्ट मैच में ही मुझे यह साफ दिखाई दे गया था कि वह बड़ा मुकाम हासिल करने वाले हैं।”
सचिन के इस बयान से पता चलता है कि वह जो रूट की बल्लेबाजी क्षमता को उनके करियर की शुरुआत से ही पहचानते थे। रूट ने अपने खेल में निरंतरता बनाए रखते हुए टेस्ट क्रिकेट में शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं और अब वह इस प्रारूप के सबसे बड़े रिकॉर्ड के करीब हैं।
2012 में भारत के खिलाफ किया था टेस्ट डेब्यू
जो रूट ने दिसंबर 2012 में भारत के खिलाफ नागपुर टेस्ट मैच से अपने अंतरराष्ट्रीय टेस्ट करियर की शुरुआत की थी। उस मुकाबले में सचिन तेंदुलकर भी भारतीय टीम का हिस्सा थे।
अपने डेब्यू टेस्ट की पहली पारी में रूट ने 229 गेंदों का सामना करते हुए 73 रन बनाए थे। दूसरी पारी में वह 20 रन बनाकर नाबाद रहे। यह मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ था।
रूट के करियर की शुरुआत भारत के खिलाफ हुई थी और उस समय सचिन तेंदुलकर जैसे अनुभवी बल्लेबाज उनके सामने खेल रहे थे। अब करीब 14 साल बाद वही युवा बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट में सचिन के सबसे बड़े रिकॉर्ड के करीब पहुंच चुका है।
सचिन ने हैरी ब्रूक और स्टीव स्मिथ को भी बताया पसंदीदा बल्लेबाज
रेडिट AMA सेशन के दौरान सचिन तेंदुलकर से उनके पसंदीदा गैर-भारतीय बल्लेबाजों के बारे में भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने इंग्लैंड के जो रूट और हैरी ब्रूक के साथ ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ का नाम लिया।
इन तीनों बल्लेबाजों ने टेस्ट क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई है। जो रूट अपनी निरंतरता और लंबे समय तक रन बनाने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं, जबकि स्टीव स्मिथ ने अपनी अनोखी बल्लेबाजी शैली से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खास मुकाम हासिल किया है। हैरी ब्रूक भी इंग्लैंड के उभरते हुए प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल हैं।
सचिन की इस पसंद से साफ है कि वह मौजूदा दौर के उन बल्लेबाजों को पसंद करते हैं, जिन्होंने अलग-अलग परिस्थितियों में अपने प्रदर्शन से प्रभाव छोड़ा है।
सचिन तेंदुलकर ने ODI क्रिकेट में भी बदलाव का दिया सुझाव
सवाल-जवाब सत्र में सचिन तेंदुलकर ने केवल जो रूट के रिकॉर्ड पर ही बात नहीं की, बल्कि वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर अपना पुराना सुझाव भी दोहराया। उनका मानना है कि 50 ओवर के वनडे प्रारूप को ज्यादा संतुलित और रोमांचक बनाने के लिए उसमें बदलाव किया जा सकता है।
सचिन ने सुझाव दिया कि एकदिवसीय मुकाबले को 50-50 ओवर की एक-एक पारी के बजाय 25-25 ओवर की दो पारियों में बांट दिया जाना चाहिए। यानी प्रत्येक टीम को कुल 50 ओवर बल्लेबाजी करने का मौका मिले, लेकिन उसे दो अलग-अलग 25 ओवर की पारियों में खेलना हो।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे 50 ओवर के दौरान टीम के पास कुल 10 विकेट ही होने चाहिए। इसके अलावा, मैच में एक ही गेंद का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
सचिन के मुताबिक, इस बदलाव से बल्लेबाजी और गेंदबाजी के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे दोनों टीमों को ओस की परिस्थितियों में बल्लेबाजी और गेंदबाजी करने का मौका मिलेगा।
‘गेंदबाजों के खत्म होने से पहले कुछ करना होगा’
वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजों के बढ़ते दबदबे और गेंदबाजों के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर सचिन ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में बल्लेबाज और गेंदबाज के बीच मुकाबला बनाए रखना जरूरी है।
अपने सुझाव को समझाते हुए सचिन ने कहा, “मेरा सुझाव आसान है। 50 ओवर को 25-25 ओवर की दो पारियों में बांट दिया जाए। लेकिन पूरे 50 ओवर के लिए 10 विकेट ही रखे जाएं और पूरे मैच में सिर्फ एक गेंद का इस्तेमाल हो। इससे बल्ले और गेंद के बीच मुकाबला बना रहेगा और दोनों टीमों को ओस के दौरान बल्लेबाजी और गेंदबाजी करने का मौका मिलेगा। इससे दोनों पक्षों के बीच संतुलन बना रहेगा। गेंदबाजों के खत्म होने से पहले हमें कुछ करना होगा।”
सचिन का यह सुझाव वनडे क्रिकेट के मौजूदा स्वरूप में बदलाव को लेकर उनकी सोच को दर्शाता है। उनके अनुसार, खेल को ऐसा बनाए रखना जरूरी है, जिसमें बल्लेबाजों के साथ गेंदबाजों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने के पर्याप्त अवसर मिलें।
क्या जो रूट तोड़ पाएंगे सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड?
टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड लंबे समय से कायम है। जो रूट अब इस सूची में दूसरे स्थान पर हैं और उनके पास इस रिकॉर्ड तक पहुंचने का मौका है।
14,278 रन बना चुके रूट को सचिन के 15,921 रनों से आगे निकलने के लिए 1,643 रन और बनाने होंगे। उनकी मौजूदा उपलब्धि ने इस रिकॉर्ड को लेकर क्रिकेट जगत में चर्चा बढ़ा दी है।
हालांकि, टेस्ट क्रिकेट में इतने बड़े रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन, फिटनेस और लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलना जरूरी होता है। जो रूट की आगे की पारियां तय करेंगी कि वह सचिन के रिकॉर्ड को कब और किस मुकाम तक चुनौती दे पाते हैं।
फिलहाल सचिन तेंदुलकर ने रूट की प्रतिभा की खुलकर तारीफ की है। जिस खिलाड़ी को उन्होंने 2012 में उसके डेब्यू टेस्ट के दौरान ही भविष्य का बड़ा बल्लेबाज माना था, वही खिलाड़ी आज उनके ऐतिहासिक रिकॉर्ड के करीब खड़ा है।
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