जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर स्थित ऐतिहासिक लाल चौक पर बुधवार को सियासी तापमान उस समय चरम पर पहुंच गया, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सरकार के खिलाफ एक बड़ा विरोध मार्च निकाला। पार्टी के शीर्ष नेताओं, पूर्व मंत्रियों, विधायकों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने घंटाघर के समक्ष एकत्रित होकर सरकार विरोधी जोरदार नारेबाजी की और सिविल सचिवालय की ओर कूच करने का प्रयास किया। पुलिस और सुरक्षाबलों ने कड़े सुरक्षा घेरे के बीच प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड्स लगाकर आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके चलते इलाके में काफी देर तक तनाव और जाम की स्थिति बनी रही।
घंटाघर से शुरू हुआ ‘सचिवालय मार्च’
सुबह से ही कश्मीर घाटी के विभिन्न जिलों से बीजेपी कार्यकर्ता पार्टी के झंडे, बैनर और तख्तियां लेकर लाल चौक के पास जुटने लगे थे। दोपहर होते-होते सैकड़ों की भीड़ घंटाघर के आसपास जमा हो गई। कार्यकर्ताओं ने हाथों में सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लिखी पट्टिकाएं ले रखी थीं। प्रदर्शनकारी ‘उमर सरकार होश में आओ’, ‘चुनावी वादे पूरे करो’, और ‘युवाओं के साथ धोखा बंद करो’ जैसे नारे लगा रहे थे। घंटाघर से जैसे ही यह विशाल जुलूस सिविल सचिवालय की दिशा में बढ़ा, पुलिस ने मौलाना आजाद रोड और रीगल चौक के समीप बहुस्तरीय बैरिकेडिंग कर पूरे रास्ते को सील कर दिया।
पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की
प्रदर्शनकारियों ने जब आगे बढ़ने के लिए लगाए गए लोहे के बैरिकेड्स को हटाने की कोशिश की, तो सुरक्षाकर्मियों के साथ तीखी बहस और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की भारी टुकड़ी तैनात थी। सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे नहीं बढ़ने दिया और कई प्रमुख नेताओं को एहतियातन हिरासत में लेकर सुरक्षा वाहनों में बैठाया। इस विरोध प्रदर्शन के कारण लाल चौक, रेजिडेंसी रोड और आसपास के व्यापारिक इलाकों में सामान्य यातायात लगभग ठप हो गया और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
चुनावी वादों और बेरोजगारी पर सरकार को घेरा
मार्च का नेतृत्व कर रहे प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सत शर्मा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) सुनील शर्मा ने जनसभा को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला सरकार पर तीखा हमला बोला। विपक्षी नेताओं ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सत्ता हासिल करने के लिए जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद उन सभी मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि घाटी का शिक्षित युवा आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। चुनावी घोषणापत्र में 1 लाख सरकारी नौकरियां देने, दैनिक वेतनभोगियों (डेली वेजर्स) को नियमित करने, 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने और सामाजिक सुरक्षा पेंशन को दोगुना करने के जो वादे किए गए थे, उनका जमीन पर कहीं कोई अता-पता नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुस्ती के कारण विकास कार्य रुक गए हैं और सरकार केवल बयानबाजी तक सीमित रह गई है।
‘सड़क से लेकर सदन तक जारी रहेगा संघर्ष’
बीजेपी नेताओं ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि पार्टी एक सजग और मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी। नेताओं ने स्पष्ट किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार की नीतियों के खिलाफ यह विरोध सिर्फ एक दिन का नहीं है, बल्कि जब तक सरकार अपने घोषणापत्र के वादों को पूरा नहीं करती, तब तक यह लड़ाई घाटी के हर जिले की सड़कों से लेकर जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पटल तक जारी रहेगी। नेताओं ने आरोप लगाया कि आम जनता की बुनियादी समस्याओं जैसे बिजली, पानी, राशन और बुनियादी ढांचे की बदहाली पर सरकार की कोई स्पष्ट नीति नहीं है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का पलटवार: ‘राजनीतिक नौटंकी’
बीजेपी के इस आक्रामक प्रदर्शन पर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी कड़ा पलटवार किया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ताओं ने इसे महज एक “राजनीतिक स्टंट और हेडलाइन बटोरने की कोशिश” करार दिया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने कहा कि उमर अब्दुल्ला सरकार जनहित और राज्य के समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
पार्टी ने उल्टा बीजेपी से सवाल पूछते हुए कहा कि पहले केंद्र सरकार और बीजेपी नेतृत्व यह स्पष्ट करे कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood) कब बहाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों तक केंद्र के सीधे शासन में बेरोजगारी और विकास की जो बदहाली पैदा हुई, उसका ठीकरा चुनी हुई सरकार पर फोड़ना अनुचित है। एनसी ने यह भी संकेत दिया कि वे बीजेपी की नीतियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बीच जाएंगे।
व्यापारिक केंद्र में अफरा-तफरी का माहौल
लाल चौक श्रीनगर का प्रमुख व्यावसायिक और पर्यटन केंद्र है। विरोध मार्च के चलते घंटाघर और आसपास की कई दुकानों के शटर आंशिक रूप से गिर गए। सुरक्षाबलों ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए ड्रोन कैमरों से इलाके की निगरानी की। हालांकि, करीब दो घंटे की गहमागहमी के बाद पुलिस द्वारा स्थिति को सामान्य कर लिया गया और धीरे-धीरे यातायात को बहाल कराया गया।
