कटक: ओडिशा में Biju Janata Dal (BJD) के निलंबित विधायकों की अयोग्यता से जुड़े मामले में Orissa High Court ने विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा सचिव और तीन निलंबित विधायकों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामला राज्यसभा चुनाव में कथित क्रॉस-वोटिंग के बाद BJD की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज किए जाने से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति आर.के. पटनायक की अदालत ने निलंबित BJD विधायकों अरविंद मोहापात्रा, सौविक बिस्वाल और सनातन महाकुड़ से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपना काउंटर-अफिडेविट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होनी है।
राज्यसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला इस साल मार्च में हुए ओडिशा राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है। चुनाव में BJP समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे ने निर्दलीय उम्मीदवार और यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को हराया था।
डॉ. होता को BJD और कांग्रेस दोनों का समर्थन प्राप्त था। हालांकि, चुनाव के दौरान कुछ विधायकों द्वारा कथित तौर पर क्रॉस-वोटिंग किए जाने के बाद वोटों का समीकरण बदल गया और डॉ. होता चुनाव हार गए।
इसके बाद BJD ने अपने आठ विधायकों को निलंबित कर दिया। पार्टी ने इन विधायकों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की कार्रवाई की मांग करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिकाएं दाखिल कीं।
विधानसभा सचिवालय ने याचिकाएं खारिज कीं
BJD की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं पर विधानसभा सचिवालय ने 19 जून को आदेश जारी किया। इसमें पार्टी की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।
सचिवालय की ओर से कहा गया कि याचिकाएं पर्याप्त रूप से स्पष्ट और प्रमाणित नहीं थीं। आदेश में आवेदन को “cryptic, vague and unsubstantiated” बताया गया और कहा गया कि याचिकाएं मौजूदा नियमों के तहत आवश्यक प्रक्रियात्मक मानकों को पूरा नहीं करती थीं।
इसके बाद BJD ने इस फैसले को Orissa High Court में चुनौती दी।
BJD ने हाईकोर्ट में क्या दलील दी?
BJD के मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक ने विधानसभा सचिवालय के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल कीं।
पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिलन कानूंगो और अधिवक्ता आशीष मिश्रा ने अदालत के सामने पक्ष रखा। BJD की दलील है कि याचिकाओं में मौजूद प्रक्रियात्मक कमियों को दूर किया जा सकता था और उन्हें सीधे खारिज करने के बजाय नियमों के तहत सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए था।
पार्टी ने यह भी तर्क दिया कि अयोग्यता कानून का उद्देश्य विधायकों के दल-बदल और उससे जुड़ी गतिविधियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है। BJD का आरोप है कि उसकी याचिकाओं को तकनीकी आधार पर खारिज करने से मामले के मूल मुद्दे पर सुनवाई का अवसर ही नहीं मिला।
स्पीकर की ओर से भी उठाया गया सवाल
विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य ने इन याचिकाओं की सुनवाई योग्य होने को लेकर आपत्ति दर्ज की।
अब हाईकोर्ट के सामने दोनों पक्षों की दलीलें और संबंधित दस्तावेज रखे जाएंगे। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि विधानसभा सचिवालय द्वारा अयोग्यता याचिकाओं को खारिज करने की प्रक्रिया कानूनी रूप से उचित थी या नहीं।
तीन और विधायकों को नोटिस
हाईकोर्ट का ताजा निर्देश अरविंद मोहापात्रा, सौविक बिस्वाल और सनातन महाकुड़ से संबंधित मामलों में आया है। अदालत ने इन विधायकों के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष और विधानसभा सचिव से भी काउंटर-अफिडेविट दाखिल करने को कहा है।
इससे पहले इसी विवाद से जुड़े मामलों में निलंबित BJD विधायकों चक्रमणि कन्हार और सुबासिनी जेना को लेकर भी हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
वहीं, पार्टी के अन्य निलंबित विधायकों देवी रंजन त्रिपाठी, नबा किशोर मल्लिक और रमाकांत भोई से संबंधित याचिकाओं पर भी आने वाली सुनवाई में विचार किए जाने की संभावना है।
29 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अब इस मामले में अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 29 सितंबर को होगी। उस दौरान विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा सचिव और संबंधित विधायकों की ओर से दाखिल किए गए जवाब अदालत के सामने होंगे।
फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले के अंतिम गुण-दोष पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। अयोग्यता याचिकाओं और विधानसभा सचिवालय के फैसले को लेकर दोनों पक्षों की दलीलों पर सुनवाई आगे जारी रहेगी।
