Puri Jagannath Airport: ओडिशा के पुरी में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण का रास्ता अब काफी हद तक साफ हो गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पुरी एयरपोर्ट परियोजना को अंतिम पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) दे दी है। परियोजना को लेकर वन्यजीव और पर्यावरण विशेषज्ञों ने पहले कई गंभीर चिंताएं जताई थीं, खासकर प्रवासी पक्षियों, ओलिव रिडले कछुओं और आसपास के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर संभावित प्रभाव को लेकर।
अंतिम पर्यावरण मंजूरी मिलने के साथ ही पुरी में प्रस्तावित इस ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना ने एक महत्वपूर्ण नियामकीय बाधा पार कर ली है। हालांकि, राज्य सरकार को आगे की प्रक्रिया के लिए मंत्रालय से औपचारिक मंजूरी और अन्य आवश्यक अनुमतियों का इंतजार है।
जगन्नाथ मंदिर से करीब 5 किलोमीटर दूर बनेगा एयरपोर्ट
प्रस्तावित श्री जगन्नाथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पुरी जिले के सिपासरुबाली (Sipasarubali) क्षेत्र में बनाया जाना है। यह एयरपोर्ट प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर प्रस्तावित है।
परियोजना के लिए कुल 471.348 हेक्टेयर भूमि का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें करीब 27.887 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है।
पुरी के जिलाधिकारी दिब्य ज्योति परिडा के अनुसार, परियोजना को पर्यावरण मंजूरी के साथ-साथ Coastal Regulation Zone (CRZ) clearance भी मिल चुकी है। वन से संबंधित मुद्दों पर भी मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।
राज्य सरकार अब मंत्रालय से औपचारिक नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) का इंतजार कर रही है। इसके बाद Airports Authority of India (AAI) से संपर्क कर परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट यानी Detailed Project Report (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
पहले चरण में 46 लाख यात्रियों की क्षमता
पुरी में बनने वाले इस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को भविष्य की यात्री जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना है।
परियोजना के पहले चरण (Phase-I) में एयरपोर्ट की सालाना यात्री क्षमता करीब 46 लाख यात्रियों की होगी। पहले चरण में ही अंतरराष्ट्रीय सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है, हालांकि इसके लिए संबंधित नियामकीय मंजूरियां जरूरी होंगी।
इसके बाद क्षमता को अलग-अलग चरणों में बढ़ाने की योजना है।
- Phase-I: 4.6 मिलियन यात्री प्रति वर्ष
- Phase-II: 10.18 मिलियन यात्री प्रति वर्ष
- Phase-III: 16.69 मिलियन यात्री प्रति वर्ष
इस तरह पूरी तरह विकसित होने के बाद एयरपोर्ट की सालाना यात्री क्षमता करीब 1.67 करोड़ तक पहुंचने की परिकल्पना की गई है।
27.887 हेक्टेयर वन भूमि का होगा इस्तेमाल
एयरपोर्ट परियोजना के लिए 27.887 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा है। मंत्रालय ने इससे पहले Van (Sanrakshan Evam Samvardhan) Adhiniyam, 1980 के तहत वन भूमि के इस्तेमाल के लिए Stage-I यानी सैद्धांतिक मंजूरी दी थी।
यह मंजूरी मंत्रालय की Advisory Committee की सिफारिशों के आधार पर दी गई थी। इसके साथ कुल 33 शर्तें भी रखी गई थीं।
इनमें से एक महत्वपूर्ण शर्त 29.939 हेक्टेयर गैर-वन भूमि पर compensatory afforestation यानी प्रतिपूरक वनीकरण से जुड़ी है।
इसके अलावा परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए impact assessment studies और एक विशेष wildlife management plan को लागू करने पर भी जोर दिया गया है।
यह wildlife management plan Wildlife Institute of India (WII) और Zoological Survey of India की सिफारिशों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना है।
Wildlife Institute of India ने जताई थी गंभीर चिंता
पर्यावरण मंजूरी मिलने के बावजूद पुरी एयरपोर्ट परियोजना को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंताएं महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।
Wildlife Institute of India (WII) ने अपनी assessment में इस परियोजना को लेकर कई आपत्तियां दर्ज की थीं। WII ने एयरपोर्ट की प्रस्तावित लोकेशन को मौजूदा भुवनेश्वर एयरपोर्ट, Balukhand-Konark Wildlife Sanctuary और Chilika Ramsar Site के संदर्भ में संवेदनशील बताया था।
WII ने अपनी रिपोर्ट में परियोजना को आगे बढ़ाने के बजाय इसे खारिज करने की सिफारिश तक की थी।
चिलिका झील और प्रवासी पक्षियों को लेकर चिंता
परियोजना स्थल से करीब 16 किलोमीटर दूर चिलिका झील स्थित है। चिलिका अंतरराष्ट्रीय महत्व वाली एक प्रमुख आर्द्रभूमि है और यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं।
WII के आकलन के अनुसार, एयरपोर्ट की स्थिति प्रवासी पक्षियों की आवाजाही वाले क्षेत्र के करीब होने के कारण bird strike का जोखिम बढ़ा सकती है।
Bird strike उस स्थिति को कहा जाता है जब विमान और पक्षियों के बीच टक्कर हो जाती है। एयरपोर्ट के आसपास बड़ी संख्या में पक्षियों की मौजूदगी विमान संचालन और वन्यजीव दोनों के लिए चुनौती बन सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यह क्षेत्र Central Asian Flyway से जुड़े प्रवासी पक्षियों के मार्ग के करीब है।
ओलिव रिडले कछुओं पर भी चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता सिर्फ पक्षियों तक सीमित नहीं है। क्षेत्र में पाए जाने वाले समुद्री वन्यजीवों और खासकर Olive Ridley turtles के संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
WII ने अपने आकलन में कहा था कि परियोजना से आसपास के महत्वपूर्ण wildlife habitats पर असर पड़ सकता है। ओडिशा का तटीय क्षेत्र ओलिव रिडले कछुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसी वजह से एयरपोर्ट परियोजना में wildlife management और mitigation measures को महत्वपूर्ण शर्तों के रूप में शामिल किया गया है।
Bird Strike के अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का भी दिया गया हवाला
WII ने अपनी रिपोर्ट में एयरपोर्ट और प्रवासी पक्षियों के बीच संभावित टकराव के खतरे को समझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का भी उल्लेख किया था।
रिपोर्ट में दक्षिण कोरिया के Muan International Airport की दिसंबर 2024 की घटना का हवाला दिया गया, जिसमें प्रवासी पक्षियों से जुड़ी bird strike दुर्घटना में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी।
इसके अलावा इथियोपिया के Bahir Dar International Airport पर Lake Tana के पास हुई एक पुरानी bird strike घटना का भी उदाहरण दिया गया था।
इन घटनाओं के जरिए WII ने एयरपोर्ट के आसपास प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी से जुड़े विमानन सुरक्षा जोखिमों पर ध्यान आकर्षित किया था।
पुरी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है नया एयरपोर्ट?
पुरी भारत के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक है और यहां सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को राज्य के पर्यटन और कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।
वर्तमान में ओडिशा का प्रमुख एयर कनेक्टिविटी केंद्र भुवनेश्वर एयरपोर्ट है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा एयरपोर्ट के विस्तार की अपनी सीमाएं हैं, क्योंकि उसके आसपास बड़े पैमाने पर आबादी और निर्माण मौजूद है।
ऐसे में पुरी में एक नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे पुरी को सीधे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क से जोड़ने की क्षमता बढ़ सकती है।
अब आगे क्या होगा?
पर्यावरण और CRZ मंजूरी मिलने के बाद परियोजना से जुड़े अगले चरणों पर काम किया जाएगा। राज्य सरकार मंत्रालय से औपचारिक NOC की प्रतीक्षा कर रही है।
इसके बाद AAI के साथ समन्वय कर Detailed Project Report (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। निर्माण कार्य राज्य के Transport Department और AAI के समन्वय से आगे बढ़ाया जाना प्रस्तावित है।
हालांकि, परियोजना के आगे बढ़ने के साथ पर्यावरणीय शर्तों और wildlife management measures का पालन भी महत्वपूर्ण रहेगा।
कुल मिलाकर, पुरी के श्री जगन्नाथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अंतिम पर्यावरण मंजूरी मिलना परियोजना के लिए एक बड़ा कदम है। लेकिन एयरपोर्ट की लोकेशन, प्रवासी पक्षियों के मार्ग, चिलिका झील की निकटता और ओलिव रिडले कछुओं जैसे संवेदनशील वन्यजीवों को लेकर उठाई गई चिंताएं आगे भी इस परियोजना की निगरानी और पर्यावरणीय प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
