चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है। दीपके ने सोमवार को कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद पर बने हुए हैं और SIR प्रक्रिया पर रोक नहीं लगती, तब तक चुनाव में हिस्सा लेना उनके अनुसार बेअसर है।

पुणे में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दीपके ने देश में होने वाले चुनावों की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को ऐसे चुनावी परिणाम मिल रहे हैं, जहां उनके मुताबिक पार्टी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के चरम दौर में भी जीत नहीं मिली थी।

‘ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक चुनाव में हिस्सा लेने का मतलब नहीं’

CJP संस्थापक ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा देकर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित नहीं करते, तब तक चुनाव में हिस्सा लेने का कोई मतलब नहीं है। उनके मुताबिक चुनाव परिणाम पहले से तय होने जैसी स्थिति दिखाई दे रही है।

दीपके ने दावा किया कि बीजेपी को कुछ राज्यों में ऐसे परिणाम मिल रहे हैं जहां वह कथित तौर पर पहले सफल नहीं हुई थी। उन्होंने इसके लिए SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को जिम्मेदार बताया।

उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के पद से हटने और SIR प्रक्रिया के रुकने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अलग-अलग राज्यों में बीजेपी को वास्तव में कितनी सीटें मिलती हैं। ये दीपके के राजनीतिक आरोप हैं, जिनका चुनाव आयोग ने खंडन किया है।

महाराष्ट्र में MPSC छात्रों के समर्थन में पहुंचे थे दीपके

अभिजीत दीपके ने ये बयान पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में पहुंचने के दौरान दिए। उन्होंने छात्रों के आंदोलन के प्रति समर्थन जताया और इसी दौरान SIR तथा आगामी चुनावों को लेकर अपनी बात रखी।

इससे पहले CJP की ओर से मुंबई में भी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए गए थे।

शिवाजी पार्क प्रदर्शन के बाद केस का भी मामला

मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन को लेकर भी विवाद सामने आया है। एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि CJP से जुड़े कुछ नेताओं ने अनुमति नहीं मिलने के बावजूद प्रदर्शन किया। शिकायत में अभिजीत दीपके के अलावा आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह के नाम बताए गए थे।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि उनके खिलाफ और मामले दर्ज किए जाएं, लेकिन वे लोकतंत्र को बचाने के लिए अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

SIR को लेकर लगातार बढ़ रहा राजनीतिक विवाद

SIR को लेकर विवाद तब और बढ़ा जब चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर मतदाता पंजीकरण, चुनावी रोल और तकनीकी प्रणालियों से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इस रिपोर्ट की उस व्याख्या को खारिज किया है जिसमें इन आपत्तियों को अंतिम फैसलों के खिलाफ संस्थागत असहमति बताया गया था। यानी इस मुद्दे पर CJP और चुनाव आयोग के दावों में स्पष्ट अंतर बना हुआ है।

CJP ने 10 अक्टूबर को बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध में CJP ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। पार्टी की ओर से 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। CJP नेताओं ने इसे देशव्यापी आंदोलन के अगले चरण के रूप में पेश किया है।

CJP नेता लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि SIR के जरिए मतदाता सूची में बदलाव चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने ऊपर लगाए गए अनियमितता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है और आने वाले दिनों में CJP के प्रदर्शन तथा चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

Share this News

By EDITOR

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x