विराट कोहली के क्रिकेट करियर में एक और नया दौर दिखाई दे रहा है। टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वनडे में उनका बल्लेबाजी अंदाज पहले जैसा जरूर दिखता है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उनके खेल में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब कोहली सिर्फ पारी को संभालने और लंबे समय तक बल्लेबाजी करने पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वह पारी की शुरुआत से ही गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में शानदार शतक लगाने के बाद कोहली ने कहा था कि करियर के इस पड़ाव पर उनके सामने चुनौती खुद को एक-दो गियर और ऊपर ले जाने की है। यही बदलाव पिछले करीब एक साल के उनके आंकड़ों में भी दिखाई देता है।
15 हजार ODI रन के बाद भी कोहली की भूख कायम
विराट कोहली वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में 15,000 वनडे रन पूरे करने वाले दुनिया के सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बने। हालांकि, इस उपलब्धि से ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हुई जिसमें उन्होंने अपने खेल को और तेज करने की बात कही।
टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अक्टूबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर कोहली के लिए शुरुआत मुश्किल रही थी। उन्होंने लगातार दो पारियों में शून्य का सामना किया, जो उनके वनडे करियर में पहली बार हुआ था।
लेकिन इसके बाद उनके खेल में बड़ा बदलाव देखने को मिला।
पिछले 12 मैचों में 854 रन और 117 से ज्यादा का स्ट्राइक रेट
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज से शुरू हुए इस नए दौर में कोहली ने 12 पारियों में 854 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 85.40 और स्ट्राइक रेट 117.63 रहा है।
वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में नाबाद 139 रन की पारी के बाद उनकी पिछली 10 पारियों में 825 रन हो गए। वनडे इतिहास में सिर्फ छह ऐसे 10-पारी के क्रम हैं, जिनमें किसी बल्लेबाज ने इससे ज्यादा रन बनाए हैं।
इनमें कोहली के ही दो पुराने रिकॉर्ड भी शामिल हैं। 2018 में उन्होंने 10 पारियों में 995 रन और 2012 में 850 रन बनाए थे।
कोहली के खेल में तीन अलग-अलग दौर
अगर 2020 के दशक में कोहली के वनडे करियर को देखें तो इसे तीन हिस्सों में समझा जा सकता है।
2021-22: इस दौर में कोहली ने 14 पारियों में 431 रन बनाए। उनका औसत 30.79 और स्ट्राइक रेट 86.9 रहा।
अक्टूबर 2023 से ऑस्ट्रेलिया दौरे तक: इस चरण में कोहली ने 24 पारियों में 1,172 रन बनाए। औसत 61.68 और स्ट्राइक रेट 87.79 रहा।
नवंबर 2025 के बाद: इस दौर में 12 पारियों में 854 रन, 85.40 का औसत और 117.63 का स्ट्राइक रेट रहा।
यानी रन बनाने की निरंतरता पहले भी थी, लेकिन अब रन बनाने की गति में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
सबसे बड़ा बदलाव: ज्यादा बाउंड्री और ज्यादा छक्के
कोहली के नए अंदाज की सबसे बड़ी पहचान उनका बढ़ा हुआ बाउंड्री प्रतिशत और छक्के लगाने का तरीका है।
2021-22 में उन्हें एक बाउंड्री लगाने के लिए औसतन 10.2 गेंद खेलनी पड़ती थी। पिछले करीब 11 महीनों में यह अंतर घटकर 7.3 गेंद रह गया है।
छक्कों में बदलाव और भी ज्यादा स्पष्ट है। 2021-22 में कोहली लगभग हर 173.5 गेंद पर एक छक्का लगाते थे। 2023-25 के दौरान यह आंकड़ा हर 133.5 गेंद था। नवंबर 2025 के बाद वह लगभग हर 25 गेंद पर छक्का लगा रहे हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि कोहली ने अपना तकनीकी खेल छोड़कर आक्रामक या लापरवाह बल्लेबाजी शुरू कर दी है। उनका हमला अभी भी काफी नियंत्रित नजर आता है।
पेस के खिलाफ अब पहले से जल्दी हमला
तेज गेंदबाजों के खिलाफ कोहली हमेशा मजबूत बल्लेबाज रहे हैं। लेकिन अब अंतर यह है कि वह गेंदबाज को जमने का मौका कम दे रहे हैं।
अच्छी लेंथ की गेंदों पर उनका स्ट्राइक रेट 2023-25 में 79.20 था, जो नवंबर 2025 के बाद बढ़कर 111.95 हो गया है।
खास बात यह है कि अच्छी लेंथ की गेंदों पर हमला करने वाली गेंदों का प्रतिशत लगभग समान रहा है। पहले वह करीब 48.4 प्रतिशत ऐसी गेंदों पर हमला करते थे और अब यह आंकड़ा 48.6 प्रतिशत है।
बदलाव यह आया है कि जब वह हमला करते हैं तो उन शॉट्स से ज्यादा रन निकल रहे हैं।
साथ ही, अच्छी लेंथ की गेंदों को सिर्फ डिफेंड करने या छोड़ने की उनकी आदत भी कम हुई है। 2023-25 में वह ऐसी करीब 27.9 प्रतिशत गेंदों को डिफेंड या छोड़ रहे थे, जबकि अब यह आंकड़ा करीब 11 प्रतिशत रह गया है।
इससे उन्हें बिना हर गेंद पर चौका-छक्का लगाए भी लगातार स्ट्राइक रोटेट करने का मौका मिल रहा है।
क्रीज से बाहर निकलकर गेंदबाजों की लेंथ बिगाड़ रहे हैं
कोहली के नए अंदाज में एक और महत्वपूर्ण बदलाव है—तेज गेंदबाजों के खिलाफ क्रीज से बाहर निकलकर गेंद खेलना।
2023-25 के दौरान उन्होंने तेज गेंदबाजों के खिलाफ करीब 4.2 प्रतिशत गेंदों पर क्रीज से बाहर निकलकर शॉट खेलने की कोशिश की थी। नवंबर 2025 के बाद यह बढ़कर 10.1 प्रतिशत हो गया है।
इसका मकसद सिर्फ चौका लगाना नहीं है। बल्लेबाज जब गेंदबाज की अच्छी लेंथ को आगे बढ़कर खेलने लगता है तो गेंदबाज को अपनी लेंथ बदलनी पड़ती है। इससे बल्लेबाज को बाद की गेंदों पर भी ज्यादा विकल्प मिल जाते हैं।
कोहली इस तकनीक को ज्यादातर पारंपरिक ड्राइव के साथ इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि उनका आक्रामक खेल भी उनकी पारंपरिक बल्लेबाजी तकनीक से जुड़ा हुआ दिखाई देता है।
पावरप्ले में भी बदला कोहली का रवैया
कोहली अब पारी की शुरुआत में भी ज्यादा तेजी से रन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
पिछले चरण की तुलना में तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनकी शुरुआती 20 गेंदों का स्ट्राइक रेट 80 से बढ़कर 109.48 हो गया है। पावरप्ले में भी उनका स्ट्राइक रेट 75.34 से बढ़कर करीब 110 हो गया है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ वडोदरा वनडे इसका अच्छा उदाहरण रहा। भारत ने 301 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 39 रन पर पहला विकेट गंवाया था। कोहली क्रीज पर आए और उन्होंने शुरुआत से ही आक्रमण किया। उन्होंने सिर्फ 20 गेंदों में 27 रन बनाए, जिसमें छह चौके शामिल थे।
बाद में उन्होंने 93 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली और भारत ने लक्ष्य एक ओवर शेष रहते हासिल कर लिया।
कोहली का संदेश साफ है—अगर परिस्थितियां मुश्किल हैं तो सिर्फ गेंद के गलती करने का इंतजार करने के बजाय वह अब खुद दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
स्पिन के खिलाफ भी बदला तरीका
कोहली के खेल में बदलाव सिर्फ तेज गेंदबाजों के खिलाफ नहीं आया है। स्पिनरों के खिलाफ भी वह पहले की तुलना में अधिक आक्रामक नजर आ रहे हैं।
स्पिन के खिलाफ उनके आक्रामक शॉट्स का हिस्सा करीब 49.3 प्रतिशत से बढ़कर 57 प्रतिशत हो गया है। शुरुआती 20 गेंदों में स्पिन के खिलाफ उनका स्ट्राइक रेट 80.12 से बढ़कर 103.64 हो गया है।
स्पिनरों के खिलाफ क्रीज से बाहर निकलने और गेंद को हवा में खेलने की उनकी कोशिश भी बढ़ी है।
वेस्टइंडीज के खिलाफ तिरुवनंतपुरम वनडे में शतक पूरा करने के लिए गुडाकेश मोती की गेंद पर लगाया गया छक्का इसी बदले हुए अंदाज का उदाहरण था। कोहली आगे बढ़े, गेंद को अच्छी तरह टाइम किया और उसे सीमा रेखा के पार पहुंचा दिया।
आखिर क्यों बदला विराट कोहली का खेल?
कोहली के इस बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं। खुद कोहली कई बार अपनी बेहतर मानसिक स्थिति और बल्लेबाजी में ज्यादा स्वतंत्रता के बारे में बात कर चुके हैं।
इसके अलावा टीम की बल्लेबाजी संरचना में भी बदलाव आया है। रोहित शर्मा अब पहले की तरह हर पावरप्ले में लगातार आक्रामक भूमिका नहीं निभाते। ऐसे में पारी का शुरुआती टेम्पो बनाए रखने की कुछ जिम्मेदारी कोहली पर भी आती है।
एक और बड़ा कारण टेस्ट क्रिकेट से उनका संन्यास हो सकता है।
टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज को अलग तकनीक और अलग मानसिकता बनाए रखनी पड़ती है। अब कोहली के सामने वह दबाव नहीं है। IPL में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उन्होंने जिस तरह तेजी से रन बनाने और जोखिम लेने की आदत विकसित की, उसका असर अब वनडे में भी ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
यानी यह पूरी तरह नया कोहली नहीं है। बल्कि यह उसी कोहली का ज्यादा स्वतंत्र और आक्रामक रूप है, जिसे अब अपने खेल की सीमाओं को थोड़ा और आगे बढ़ाने की आजादी मिल रही है।
दक्षिण अफ्रीका में होगी असली परीक्षा
कोहली के इस नए अंदाज की सबसे बड़ी परीक्षा दक्षिण अफ्रीका में होने वाले अगले बड़े टूर्नामेंट में हो सकती है।
भारत में हाल के ज्यादातर वनडे मैच सपाट पिचों पर खेले गए हैं, जहां बल्लेबाजों के लिए परिस्थितियां अनुकूल रही हैं। दक्षिण अफ्रीका में परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। कहीं अतिरिक्त उछाल मिल सकता है, कहीं गेंद मूव कर सकती है और कुछ मैदानों पर बल्लेबाजों के लिए रन बनाना अपेक्षाकृत आसान भी हो सकता है।
ऐसे में तेज गेंदबाजों के खिलाफ जल्दी हमला करने और अच्छी लेंथ की गेंदों पर रन बनाने की कोहली की नई रणनीति काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
हालांकि, हर परिस्थिति में एक ही गति से बल्लेबाजी करना जरूरी नहीं होगा। कोहली की सबसे बड़ी ताकत परिस्थितियों को पढ़कर अपने खेल को बदलना रही है।
37 साल की उम्र में 15,000 से ज्यादा वनडे रन पूरे करने के बाद भी अगर विराट कोहली अपने खेल में नए तरीके खोज रहे हैं, तो यही उनकी बल्लेबाजी की सबसे खास बात है। वह सिर्फ अपने पुराने रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि लगातार अपने खेल को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
