MPSC परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर Bombay High Court की अहम टिप्पणी, सरकार से करीब 70 हजार रिक्तियों का विभाग और आरक्षणवार ब्यौरा मांगा

मुंबई/पुणे: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर पुणे में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मामले में Bombay High Court ने बुधवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अगर छात्रों को भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी या खामी महसूस होती है, तो उन्हें अपनी शिकायतों के लिए विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है।

कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों की शिकायतों को गंभीर बताते हुए सरकार से छात्रों का भरोसा बहाल करने की दिशा में कदम उठाने को कहा। हालांकि, अदालत ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से अपनी पढ़ाई पर वापस लौटने की अपील भी की और कहा कि लंबे समय तक सड़क रोककर किया जाने वाला आंदोलन उनके करियर को प्रभावित कर सकता है।

‘ये छात्र हैं, एंटी-नेशनल नहीं’

मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, “They are students, not anti-nationals.”

पीठ ने कहा कि पुणे देश का एक प्रमुख शिक्षा केंद्र है और यहां आने वाले अधिकांश छात्र पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मेहनत करते हैं। अदालत के मुताबिक, छात्र सामान्य तौर पर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन नहीं करना चाहते, लेकिन यदि वे ऐसा कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि उनकी शिकायतें गंभीर हैं।

अदालत ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मेहनत करने वाले छात्रों को यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी दिखाई देती है, तो उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है।

करीब 70 हजार रिक्तियों का ब्यौरा मांगा

Bombay High Court ने महाराष्ट्र सरकार को करीब 70,000 रिक्त पदों का विभागवार और आरक्षणवार ब्यौरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सरकार को इस संबंध में तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।

अदालत ने निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा तथा भर्ती प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया। पीठ ने कहा कि छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं उनके करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है।

MPSC चेयरमैन के इस्तीफे समेत कई मांगें

राज्य की ओर से अदालत में पेश हुए एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों की कई मांगें हैं। इनमें MPSC के चेयरमैन के इस्तीफे की मांग, परीक्षा शुल्क को घटाकर 100 रुपये करने और सभी परीक्षाएं ऑफलाइन आयोजित करने की मांग शामिल है।

साठे ने अदालत को बताया कि सरकार ने छात्रों की एक मांग स्वीकार कर ली है। उन्होंने यह भी बताया कि MPSC चेयरमैन के खिलाफ कार्रवाई की मांग से जुड़ा एक प्रतिनिधित्व राज्यपाल को भेजा गया है।

कोर्ट ने कहा- परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए

अदालत ने सुनवाई के दौरान निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की जरूरत पर विशेष जोर दिया। पीठ ने कहा कि ये छात्र अपने करियर के लिए मेहनत कर रहे हैं और उनके माता-पिता उन्हें पढ़ाई के लिए पुणे भेजते हैं।

अदालत ने कहा कि ऐसा संदेश नहीं जाना चाहिए कि पुणे छात्रों के लिए सुरक्षित या उपयुक्त जगह नहीं है, क्योंकि इससे देशभर के अभिभावकों के बीच चिंता पैदा हो सकती है।

पीठ ने यह भी कहा कि अदालत यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से हों और भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।

छात्रों से पढ़ाई पर लौटने की अपील

Bombay High Court ने छात्रों की शिकायतों को गंभीर मानने के साथ-साथ उन्हें आंदोलन के तरीके पर भी विचार करने को कहा। अदालत ने प्रदर्शनकारियों से सड़क रोकने वाला आंदोलन वापस लेने की अपील की और चेतावनी दी कि लंबे समय तक चलने वाला आंदोलन उनके करियर की राह में बाधा बन सकता है।

अदालत ने कहा कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और आने वाली परीक्षाओं को निष्पक्ष तरीके से आयोजित करने की दिशा में काम करेगी।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो छात्र अपना विरोध जारी रखना चाहते हैं, उन्हें प्रदर्शन के लिए उचित स्थान निर्धारित करना होगा और संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। यदि बिना अनुमति के प्रदर्शन जारी रहता है और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होती है, तो प्रशासन कार्रवाई कर सकता है।

पुणे में तीन जगहों पर चल रहा है प्रदर्शन

MPSC परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर पुणे में बड़ी संख्या में छात्र और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन तीन अलग-अलग स्थानों पर चल रहा है।

पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद प्रदर्शन जारी रहने के कारण पुलिस ने कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है और प्रदर्शनकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।

इस आंदोलन में केवल नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि शिक्षक, परीक्षा की तैयारी कराने वाले मेंटर्स और कुछ राजनीतिक लोग भी शामिल हुए हैं।

कथित पेपर लीक के बाद तेज हुआ मामला

पुणे में चल रहे विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के कथित पेपर लीक का मामला भी बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने, पारदर्शिता बढ़ाने और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं।

MPSC से जुड़ी परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर इससे पहले भी छात्रों के विरोध प्रदर्शन सामने आते रहे हैं। ऐसे में बुधवार को Bombay High Court की टिप्पणी को प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों और राज्य सरकार, दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अदालत ने एक ओर छात्रों की शिकायतों और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को गंभीरता से लिया, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और छात्रों की पढ़ाई व करियर को प्रभावित होने से बचाने पर भी जोर दिया।

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By EDITOR

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