दिल्ली के ऐतिहासिक और विरासत स्थलों के संरक्षण को लेकर नगर निगम दिल्ली (MCD) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले Heritage Sites के लिए एक Standard Operating Procedure (SOP) तैयार कर रहा है। इसके साथ ही MCD ने इन विरासत स्थलों की Geo-Mapping कराने की संभावना पर भी काम शुरू किया है, ताकि ऐतिहासिक संरचनाओं की सही पहचान, निगरानी और संरक्षण बेहतर तरीके से किया जा सके।

MCD ने यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में दी है। यह हलफनामा दिल्ली में Heritage Sites और ऐतिहासिक संरचनाओं के संरक्षण से जुड़ी याचिका की सुनवाई से पहले दाखिल किया गया था।

इस मामले की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि करीब दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के जामरूदपुर इलाके में मौजूद पांच Grade-1 Heritage Structures की स्थिति को लेकर MCD को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि MCD ने इन संरचनाओं पर अतिक्रमण की स्थिति को लेकर अदालत के सामने तथ्यों को दबाया और गलत जानकारी पेश की।

Heritage Sites के लिए तैयार होगा SOP

MCD ने अपने हलफनामे में कहा है कि उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले विरासत स्थलों के लिए SOP फिलहाल तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य इन ऐतिहासिक स्थलों की पहचान, निरीक्षण, दस्तावेजीकरण, रिपोर्ट तैयार करने और आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया में एकरूपता और स्पष्टता लाना है।

MCD के मुताबिक, SOP का अंतिम रूप इस महीने के अंत तक तैयार किए जाने की उम्मीद है।

इस प्रक्रिया के जरिए यह तय किया जाएगा कि Heritage Sites का निरीक्षण किस तरह किया जाए, उनकी मौजूदा स्थिति का रिकॉर्ड कैसे तैयार हो, अतिक्रमण या क्षति मिलने पर किस स्तर पर कार्रवाई हो और भविष्य में उनकी निगरानी कैसे की जाए।

Heritage Sites की Geo-Mapping पर भी विचार

MCD ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले अधिसूचित Heritage Sites की Geo-Mapping की व्यवहार्यता की जांच कर रहा है।

Geo-Mapping के जरिए इन ऐतिहासिक संरचनाओं की सटीक लोकेशन दर्ज की जा सकेगी। इससे भविष्य में किसी संरचना की पहचान करने और उसके आसपास होने वाले अतिक्रमण या बदलाव पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।

MCD का कहना है कि Location-based monitoring से विरासत स्थलों की निगरानी और संरक्षण की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

जामरूदपुर के पांच Heritage Buildings को लेकर उठा था विवाद

यह पूरा मामला दक्षिण दिल्ली के जामरूदपुर इलाके में मौजूद पांच Grade-1 Heritage Buildings की स्थिति से जुड़ा है। इन ऐतिहासिक संरचनाओं को लेकर सामने आई रिपोर्टों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और खराब रखरखाव की बात कही गई थी।

याचिकाकर्ता दिल्ली निवासी राजीव सूरी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल आवेदन के जरिए इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि जामरूदपुर में मौजूद ऐतिहासिक मकबरों और संरचनाओं की स्थिति बेहद खराब है और कई जगहों पर अतिक्रमण किया गया है।

इससे पहले MCD ने अदालत में एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें पांच में से एक मकबरे की स्थिति को संतोषजनक बताया गया था। वहीं तीन अन्य संरचनाओं के आसपास अतिक्रमण और कूड़ा-कचरा पाए जाने की बात कही गई थी।

बाद की जांच और मीडिया रिपोर्टों से स्थिति इससे कहीं ज्यादा गंभीर सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने MCD की रिपोर्ट पर सवाल उठाए।

सुप्रीम कोर्ट ने MCD को लगाई थी कड़ी फटकार

24 अगस्त को जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान MCD की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे।

कोर्ट ने कहा था कि MCD की ओर से तथ्यों को दबाने और लापरवाही बरतने की स्थिति सामने आई है। अदालत ने यह भी सवाल किया था कि जब जमीनी स्थिति अलग थी तो MCD की रिपोर्ट में संबंधित संरचना को अतिक्रमण मुक्त कैसे बताया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट और सामने आई तस्वीरों का हवाला देते हुए मामले को गंभीर बताया था।

अदालत ने MCD के Additional Commissioner और Archaeological Survey of India (ASI) के Director General को भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने को कहा था कि अधिकारियों के खिलाफ गंभीर कार्रवाई क्यों न की जाए।

कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी थी कि यदि अन्य Heritage Sites के संबंध में भी MCD या ASI की ओर से किए गए सर्वे और रिपोर्ट गलत पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीधे कार्रवाई की जा सकती है।

गलत निरीक्षण रिपोर्ट पर Junior Engineer के खिलाफ कार्रवाई

अब MCD ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अदालत के 24 अगस्त के आदेश के बाद संबंधित Junior Engineer के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

MCD के Heritage Cell के Additional Commissioner संजीव मित्तल की ओर से दाखिल जवाब के मुताबिक, Maintenance Division, South Zone के संबंधित Junior Engineer को गलत तथ्य निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज करने के मामले में disciplinary proceedings शुरू करने के लिए show-cause notice जारी किया गया।

इसके अलावा उसी जोन के Executive Engineer और Assistant Engineer को warning letters भी जारी किए गए हैं।

MCD ने 87 Heritage Sites का दोबारा निरीक्षण किया

MCD ने बताया कि अदालत की सख्ती के बाद उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले 87 Heritage Sites का fresh inspection कराया गया। इस निरीक्षण में जामरूदपुर की वे पांच संरचनाएं भी शामिल थीं, जिन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट में विवाद सामने आया था।

यह निरीक्षण कोर्ट कमिश्नरों की मौजूदगी में किया गया।

MCD ने इन ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और Restoration के लिए Aga Khan Cultural Services Forum (AKCSF) के साथ भी समझौता किया है। इसका उद्देश्य संबंधित विरासत संरचनाओं के संरक्षण और पुनर्स्थापन के काम को आगे बढ़ाना है।

कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट में भी गंभीर स्थिति सामने आई

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नरों ने भी जामरूदपुर की Heritage Structures का Field Survey किया। उनकी रिपोर्ट में कहा गया कि पांचों स्मारकों का उचित रखरखाव नहीं हो रहा था और वे लंबे समय से उपेक्षा का सामना कर रहे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन ऐतिहासिक संरचनाओं के अंदरूनी हिस्सों का इस्तेमाल कूड़ा और सामान रखने के लिए किया जा रहा था। एक संरचना का इस्तेमाल हाल तक गायों के बाड़े के रूप में भी किया जा रहा था। कोर्ट के आदेश के बाद MCD ने वहां से गंदगी और कचरा हटाया।

Heritage Buildings तक पहुंचने का रास्ता भी नहीं

कोर्ट कमिश्नरों ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि इन स्मारकों तक पहुंचने के लिए उचित रास्ते तक उपलब्ध नहीं हैं। आसपास बने आवासीय भवनों ने इन ऐतिहासिक संरचनाओं को लगभग चारों तरफ से घेर लिया है।

रिपोर्ट में कहा गया कि कई जगह बिजली के खंभे और तार स्मारकों की दीवारों के बेहद करीब हैं। इसके अलावा आसपास मौजूद कुछ Residential Buildings कई मंजिल तक बने हुए हैं।

कमिश्नरों ने इन निर्माणों और Heritage Structures की Structural Integrity को लेकर भी चिंता जताई।

‘Lal Dora’ इलाके में निर्माण को लेकर चिंता

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि आसपास के कई Residential Buildings ‘Lal Dora’ क्षेत्र में आते हैं। ऐसे क्षेत्रों में भवन निर्माण से जुड़े कुछ नियम सामान्य नगरपालिका क्षेत्रों से अलग होते हैं।

कोर्ट कमिश्नरों ने आशंका जताई कि इस वजह से आसपास के निर्माणों पर नियमित Building Regulations और Sanction Plan से जुड़ी निगरानी पर्याप्त तरीके से नहीं हो पाई।

इसका असर सीधे ऐतिहासिक संरचनाओं के आसपास के क्षेत्र पर पड़ा है, जहां कई इमारतें स्मारकों के बेहद करीब तक बन गई हैं।

अब Heritage Sites की निगरानी पर सुप्रीम कोर्ट की नजर

MCD की ओर से SOP तैयार करने और Heritage Sites की Geo-Mapping पर विचार किए जाने को सुप्रीम कोर्ट की पिछली सख्त टिप्पणियों के बाद उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब मुख्य चुनौती यह होगी कि केवल SOP और Mapping तैयार करने के बजाय उन्हें जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। जामरूदपुर की घटनाओं ने यह सवाल भी उठाया है कि दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरों की नियमित निगरानी और रखरखाव किस तरह सुनिश्चित किया जा सकता है।

फिलहाल MCD ने कोर्ट को बताया है कि SOP तैयार करने का काम जारी है और इसे महीने के अंत तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। वहीं 87 Heritage Sites के नए निरीक्षण और संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों पर भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी बनी हुई है।

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By EDITOR

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