महाराष्ट्र के नासिक से मुंबई पहुंचे आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन पर मंगलवार को पुलिस ने कार्रवाई की। प्रदर्शनकारी छात्र मुंबई स्थित कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय तिलक भवन में ठहरे हुए थे। पुलिस ने उन्हें वहां से हिरासत में लिया और निजी बसों के जरिए मुंबई से बाहर भेज दिया।
ये छात्र आदिवासी स्कूलों और छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर नासिक से पैदल मार्च करते हुए मुंबई पहुंचे थे। छात्रों ने आदिवासी स्कूलों में हुई कुछ छात्रों की मौत की स्वतंत्र जांच समेत कई मांगें सरकार के सामने रखी हैं।
राज्यपाल से मिलना चाहते थे छात्र
प्रदर्शनकारी छात्रों ने मुंबई के आजाद मैदान में प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस की ओर से अनुमति नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने उन्हें अपने प्रदेश मुख्यालय में ठहरने की जगह दी थी।
छात्रों की मांग थी कि उन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल Jishnu Dev Verma से मिलने का मौका दिया जाए। वे अपनी समस्याओं और आदिवासी स्कूलों में छात्रों की मौत के मामलों को राज्यपाल के सामने रखना चाहते थे।
मंगलवार को जब छात्र तिलक भवन से बाहर निकलने की तैयारी कर रहे थे, तब वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद छात्रों को निजी बसों में बैठाया गया और उन्हें मुंबई से बाहर ले जाया गया।
कांग्रेस के एक पदाधिकारी के अनुसार, छात्रों को वापस नासिक ले जाने की संभावना है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं था कि उन्हें सीधे नासिक छोड़ा जाएगा या शहर के आसपास किसी स्थान पर उतारा जाएगा।
करीब 200-300 छात्रों को कांग्रेस ने दी थी जगह
पुलिस द्वारा आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद कांग्रेस ने करीब 200 से 300 आदिवासी छात्रों को अपने कार्यालय में ठहरने की व्यवस्था की थी।
छात्रों ने 28 सितंबर को नासिक से अपना मार्च शुरू किया था और रविवार देर रात मुंबई पहुंचे थे। उनका कहना है कि आदिवासी स्कूलों और छात्रावासों में कई बुनियादी सुविधाओं की कमी है और इन समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।
तीन छात्राओं की मौत की जांच की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में आदिवासी स्कूलों में हुई छात्रों की मौत की स्वतंत्र जांच शामिल है। छात्रों ने गढ़चिरौली के एक स्कूल में कथित तौर पर सांप के काटने से जान गंवाने वाली तीन छात्राओं के परिवारों के लिए प्रत्येक को ₹1 करोड़ मुआवजा देने की मांग भी की है।
इसके अलावा छात्रों ने आदिवासी विकास विभाग की ओर से मिलने वाले अनुदानों के वितरण में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग उठाई है। उन्होंने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
आदिवासी विकास मंत्री के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री Ashok Uike के इस्तीफे की भी मांग की है। छात्रों का आरोप है कि मंत्री आदिवासी छात्रों से जुड़े मुद्दों और अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में विफल रहे हैं।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि वे अपनी मांगों को लेकर फिर मुंबई लौटेंगे। प्रदर्शनकारियों ने 25 अक्टूबर को दोबारा मुंबई आने की बात कही है।
फिलहाल छात्रों को मुंबई से बाहर भेजे जाने के बाद उनके अगले कदम और सरकार की ओर से उनकी मांगों पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर बनी हुई है।
