सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 12 अक्टूबर को विपक्षी दलों की ओर से निकाले गए विरोध मार्च को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से जवाब मांगा है। मंगलवार, 3 नवंबर को हुई सुनवाई में अदालत ने केंद्र सरकार से भी इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के आसपास जुलूस, प्रदर्शन, धरना और सार्वजनिक सभाओं के आयोजन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 नवंबर की तारीख तय की है। यह याचिका वकीलों के एक समूह की ओर से दायर की गई है, जिसका नेतृत्व अधिवक्ता दिगंत मिश्रा कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आसपास बड़े राजनीतिक प्रदर्शन और भीड़ जुटने से अदालत परिसर की सुरक्षा और न्यायिक कामकाज प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने 12 अक्टूबर को हुए विपक्षी मार्च का जिक्र किया। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं और समर्थकों की बड़ी संख्या सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थी। उनके अनुसार, इस दौरान बड़ी संख्या में वकील और राजनीतिक समर्थक अदालत परिसर के आसपास जमा हो गए, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई।
राहुल गांधी पर महिला पत्रकार को धक्का देने का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से पेश गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि विरोध मार्च के दौरान तीन महीने की गर्भवती एक महिला पत्रकार को राहुल गांधी ने धक्का दिया था। भाटिया के मुताबिक, घटना के बाद महिला पत्रकार को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने इस आरोप के आधार पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग करते हुए अदालत में एक अलग आवेदन भी दाखिल किया।
हालांकि, यह आरोप याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में रखा गया है। इस पर राहुल गांधी या कांग्रेस का पक्ष अभी सामने आना बाकी है। कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की तरफ से जवाब दाखिल किया जाएगा।
सिंघवी ने सुनवाई के दौरान कहा कि उनका पक्ष जल्द ही अपना जवाब दाखिल करेगा। उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई होने से पहले गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से अदालत के सामने अपना पक्ष रखा जाएगा।
12 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निकला था विपक्ष का मार्च
यह पूरा मामला 12 अक्टूबर को दिल्ली में निकाले गए विपक्षी दलों के विरोध मार्च से जुड़ा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित इस प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल हुए थे। इस मार्च के चलते मध्य दिल्ली के कई इलाकों में करीब तीन घंटे तक बड़ी राजनीतिक गतिविधि और भीड़भाड़ देखने को मिली थी।
यह प्रदर्शन उन घटनाओं के बाद हुआ था, जिनमें आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस ने लगातार दो दिनों तक कार्रवाई की थी। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए मार्च निकाला था। राहुल गांधी ने संविधान क्लब से मार्च का नेतृत्व किया और प्रदर्शनकारियों के साथ भगवान दास रोड की ओर बढ़े।
इसके बाद राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और वहां एक याचिका दाखिल की। इस याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कुछ फैसले कथित तौर पर एकतरफा तरीके से लेने का आरोप लगाया गया था। राहुल गांधी की ओर से इन फैसलों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई थी।
इसके साथ ही याचिका में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को जांच पूरी होने तक रोकने की मांग भी की गई थी। विपक्ष का विरोध मुख्य चुनाव आयुक्त के कथित फैसलों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर था।
सुप्रीम कोर्ट के आसपास प्रदर्शन के लिए नियम बनाने की मांग
वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि अदालत के आसपास किसी भी तरह के जुलूस, विरोध प्रदर्शन, धरना, सभा और रैली के आयोजन को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं।
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट केवल एक ऐसी इमारत नहीं है, जहां देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था बैठती है। यह देश के संवैधानिक मूल्यों और न्याय व्यवस्था में लोगों के भरोसे का प्रतीक भी है। अदालत का महत्व इस बात में है कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील और विवादित मामलों का निपटारा स्वतंत्र, निष्पक्ष और कानून के अनुसार किया जाए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के आसपास राजनीतिक गतिविधियों और बड़ी भीड़ के कारण ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए, जिससे अदालत की सुरक्षा, गरिमा और स्वतंत्र न्यायिक कामकाज पर असर पड़े। इसी आधार पर उन्होंने प्रदर्शन और सार्वजनिक सभाओं के आयोजन के लिए एक निर्धारित व्यवस्था बनाने की मांग की है।
इस याचिका में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, दिल्ली पुलिस आयुक्त, केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री और कांग्रेस पार्टी को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
केंद्र सरकार ने भी जवाब दाखिल करने की बात कही
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में पेश हुए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अगली सुनवाई से पहले याचिका पर अपना जवाब दाखिल करेगी। इसके साथ ही उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि इस मामले को महिला पत्रकारों की ओर से दायर एक अन्य याचिका के साथ सुना जाए।
यह दूसरी याचिका ‘नेटवर्क ऑफ वुमेन इन मीडिया, इंडिया’ के बैनर तले महिला पत्रकारों की ओर से दाखिल की गई है। इसमें राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार की घटनाओं का मुद्दा उठाया गया है।
केंद्र सरकार का सुझाव था कि दोनों मामलों को एक साथ सुनने से प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा और सुप्रीम कोर्ट के आसपास कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर व्यापक रूप से विचार किया जा सकेगा।
23 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने जवाब दाखिल करने की बात कही है, जबकि केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अगली तारीख तक अपना पक्ष रखने का आश्वासन दिया है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। उस दिन अदालत के सामने यह मुद्दा होगा कि सुप्रीम कोर्ट के आसपास विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक जमावड़े को नियंत्रित करने के लिए किस तरह के दिशा-निर्देश बनाए जाने चाहिए। साथ ही राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग से जुड़े आवेदन और याचिका में लगाए गए आरोपों पर भी संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। 12 अक्टूबर के मार्च के दौरान महिला पत्रकार के घायल होने और राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों की सत्यता पर अदालत का कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 12 अक्टूबर को निकाले गए विपक्षी मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से जवाब मांगा है। जानिए पूरी खबर।
