भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच बड़ा फैसला लिया है। RBI की Monetary Policy Committee (MPC) ने बुधवार को Repo Rate में 25 Basis Points की बढ़ोतरी कर इसे 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया। करीब चार साल में यह RBI की पहली Repo Rate बढ़ोतरी है।

इस फैसले के बाद उन लोगों पर असर पड़ सकता है जिनके Home Loan, Personal Loan या अन्य कर्ज की ब्याज दरें Repo Rate से जुड़ी हैं। बैंक अगर इस बढ़ोतरी का असर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं तो आने वाले समय में कुछ Borrowers की EMI बढ़ सकती है या Loan की अवधि लंबी हो सकती है।

RBI का यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन महंगाई के भविष्य को लेकर केंद्रीय बैंक की चिंता बढ़ी है।

MPC ने सर्वसम्मति से लिया फैसला

RBI की छह सदस्यीय Monetary Policy Committee ने Repo Rate बढ़ाने के फैसले का सर्वसम्मति से समर्थन किया। इसके साथ ही MPC ने अपनी Policy Stance को ‘Neutral’ से बदलकर ‘Calibrated Tightening’ कर दिया है।

इस बदलाव से संकेत मिलता है कि RBI फिलहाल महंगाई को नियंत्रित करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहता है।

MPC की तीन दिवसीय बैठक 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक चली। इससे पहले अगस्त में हुई बैठक में RBI ने Repo Rate को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था और Policy Stance को Neutral रखा था।

उस समय केंद्रीय बैंक ने Inflation Outlook और Growth-Inflation Dynamics को लेकर ज्यादा स्पष्टता की जरूरत बताई थी।

RBI ने क्यों बढ़ाई ब्याज दर?

RBI Governor Sanjay Malhotra ने Monetary Policy Statement पेश करते हुए वैश्विक परिस्थितियों को चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि Geopolitical Developments के कारण Global Environment मुश्किल बना हुआ है, हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत और व्यापक आधार पर टिकाऊ बनी हुई है।

लेकिन RBI के सामने सबसे बड़ी चिंता Inflation Outlook को लेकर है।

Malhotra के मुताबिक उपलब्ध आंकड़ों को देखते हुए Inflation और उसका Outlook पिछले साल की तरह अनुकूल नहीं है। RBI को उम्मीद है कि आने वाली तीन तिमाहियों में Headline CPI Inflation का औसत करीब 5.8 फीसदी रह सकता है।

वहीं, चालू वित्त वर्ष में Core Inflation के 4.4 फीसदी रहने का अनुमान है।

यही वजह है कि RBI ने महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दर बढ़ाने का फैसला किया है।

आम लोगों की EMI पर क्या असर पड़ेगा?

Repo Rate वह दर है जिस पर RBI Commercial Banks को Short-term Loan देता है। जब Repo Rate बढ़ती है तो बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो सकता है। इसका असर आगे चलकर Loan Interest Rates पर भी पड़ सकता है।

इसका सीधा असर उन Borrowers पर पड़ सकता है जिनके Loans की Interest Rates Repo-linked या External Benchmark से जुड़ी हैं।

खास तौर पर Home Loan लेने वाले ग्राहकों को इसका असर महसूस हो सकता है। ब्याज दर बढ़ने की स्थिति में बैंक EMI बढ़ा सकते हैं या ग्राहक के Loan Tenure को बढ़ा सकते हैं।

हालांकि, हर बैंक और हर Loan पर इसका असर एक जैसा नहीं होगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित Loan की Interest Rate किस Benchmark से जुड़ी है और बैंक Repo Rate में बदलाव को किस तरह लागू करता है।

Home Loan लेने वालों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?

Home Loan आमतौर पर लंबी अवधि का कर्ज होता है। इसलिए ब्याज दर में छोटी बढ़ोतरी भी लंबे समय में Borrower की कुल repayment को प्रभावित कर सकती है।

Repo Rate में 25 Basis Points यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद बैंकों की Lending Rates में बदलाव आता है तो नए Home Loan लेने वालों के लिए Borrowing Cost बढ़ सकती है।

वहीं, मौजूदा Borrowers के मामले में असर उनके Loan Agreement और Interest Rate Structure पर निर्भर करेगा।

इसलिए जिन ग्राहकों का Loan Floating Interest Rate पर है, उन्हें अपने बैंक से यह देखना होगा कि Repo Rate बढ़ने के बाद उनकी Interest Rate और EMI में क्या बदलाव होता है।

RBI ने Growth Forecast बढ़ाया

दिलचस्प बात यह है कि RBI ने एक तरफ Inflation को लेकर चिंता जताई है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय अर्थव्यवस्था के Growth Forecast को बढ़ाया है।

RBI Governor Sanjay Malhotra ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के लिए Real GDP Growth का अनुमान 7.1 फीसदी किया गया है।

उन्होंने बताया कि दूसरी तिमाही में GDP Growth 7.2 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.9 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है।

यह अनुमान पहले की तुलना में 40 Basis Points ज्यादा है।

RBI के मुताबिक, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है।

पहली तिमाही में GDP Growth 7.8 फीसदी

RBI के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की Real GDP Growth 7.8 फीसदी रही।

इस मजबूती के पीछे Resilient Private Consumption और मजबूत Investment Activity की भूमिका रही। RBI के मुताबिक Investment Activity में करीब 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

Net Exports ने भी Growth में सकारात्मक योगदान दिया।

Governor Malhotra ने कहा कि भारत ने Global Headwinds के बावजूद अपनी आर्थिक मजबूती दिखाई है।

दूसरी तिमाही में भी Economic Activity मजबूत

RBI के अनुसार दूसरी तिमाही के High-Frequency Indicators से पता चलता है कि Economic Activity की गति बनी हुई है, हालांकि पहली तिमाही की तुलना में Growth में कुछ कमी आई है।

Manufacturing Activity Cost Pressures के बावजूद स्थिर बनी रही है। वहीं Services Sector में भी गतिविधियां व्यापक स्तर पर जारी हैं।

Manufacturing और Services दोनों के Purchasing Managers’ Index (PMI) दूसरी तिमाही में Expansion Zone में रहे।

हालांकि, दोनों क्षेत्रों में Expansion की गति पहली तिमाही के मुकाबले कुछ धीमी हुई।

Private Consumption और Investment से भी मिला सहारा

RBI ने कहा कि Private Consumption भी broadly resilient बनी हुई है। खास तौर पर Discretionary Spending से Consumption को सहारा मिला है।

इसके अलावा Fixed Investment में भी मजबूती बनी रही।

इसका मतलब यह है कि RBI को फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था की Growth को लेकर बहुत बड़ी चिंता नहीं है। केंद्रीय बैंक का मौजूदा फोकस Growth और Inflation के बीच संतुलन बनाए रखने पर दिखाई दे रहा है।

चार साल बाद Repo Rate में बढ़ोतरी

RBI का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब चार साल में यह पहली Repo Rate hike है।

इससे पहले RBI ने फरवरी 2023 में Repo Rate को 25 Basis Points बढ़ाकर 6.50 फीसदी किया था।

इसके बाद 2023-24 के दौरान Repo Rate को स्थिर रखा गया। बाद में RBI ने 2025 में Rate Cut Cycle शुरू किया।

अब एक बार फिर केंद्रीय बैंक ने Rate Hike का रास्ता चुना है।

इससे यह संकेत मिलता है कि Inflation को लेकर RBI की चिंता अब इतनी बढ़ गई है कि उसे ब्याज दरों के जरिए महंगाई पर नियंत्रण मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई।

Retail Inflation भी बढ़ी

RBI के सामने Inflation को लेकर चिंता की एक वजह Retail Inflation में हालिया बढ़ोतरी भी है।

आंकड़ों के मुताबिक August में Retail Inflation 4.82 फीसदी रही, जबकि July में यह 4.45 फीसदी थी।

यानी एक महीने में Consumer Price Index (CPI) आधारित Retail Inflation में बढ़ोतरी हुई।

सरकार ने RBI को CPI-based Retail Inflation को 4 फीसदी के लक्ष्य के आसपास रखने का Mandate दिया है। इसके लिए RBI को 2 फीसदी की ऊपरी और 2 फीसदी की निचली tolerance band दी गई है।

ऐसे में Inflation में बढ़ोतरी ने केंद्रीय बैंक के लिए चिंता बढ़ाई है।

Global Risks भी RBI के सामने बड़ी चुनौती

RBI ने भारत की Growth को लेकर सकारात्मक अनुमान दिया है, लेकिन Governor Malhotra ने Global Economy से जुड़े कई जोखिमों की ओर भी इशारा किया।

इनमें Geopolitical Tensions, International Commodity Prices में बढ़ोतरी, Global Trade में अतिरिक्त Frictions और Global Financial Conditions का Tight होना शामिल हैं।

इन परिस्थितियों का असर भारत की Economic Growth पर पड़ सकता है।

इसके बावजूद RBI का अनुमान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इन चुनौतियों के बीच Resilient बनी रह सकती है।

आगे क्या होगा?

Repo Rate में 25 Basis Points की बढ़ोतरी के बाद अब नजर बैंकों के अगले कदम पर रहेगी। अगर Banks अपनी Lending Rates में बढ़ोतरी करते हैं तो नए और मौजूदा Borrowers पर इसका असर पड़ सकता है।

खासकर Floating Rate Home Loan और अन्य Repo-linked Loans वाले ग्राहकों को अपनी EMI पर नजर रखनी होगी।

दूसरी ओर, RBI का Inflation को लेकर सख्त रुख आने वाले महीनों में Monetary Policy की दिशा के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल केंद्रीय बैंक ने एक तरफ Inflation को लेकर सख्ती का संकेत दिया है, तो दूसरी तरफ भारत की Economic Growth को मजबूत बताया है। यही संतुलन आने वाले समय में RBI की Monetary Policy का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहने वाला है।

Share this News

By EDITOR

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x