असम की नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव में बीजेपी, कांग्रेस और AIUDF के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। इस सीट पर मंगलवार को मतदान होना है, जबकि चुनाव के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। कांग्रेस के गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर बीजेपी ने पूर्व IAS अधिकारी देबाशीष शर्मा को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व बाटद्रोबा विधायक सिबामोनी बोरा पर भरोसा जताया है। वहीं AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के खुद चुनाव लड़ने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
नगांव सीट 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के पास रही थी। हालांकि, इस बार राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। सीट खाली होने की वजह कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का बीजेपी में जाना और 2026 के असम विधानसभा चुनाव में दिसपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल करना है।
BJP ने पूर्व IAS अधिकारी देबाशीष शर्मा पर लगाया दांव
बीजेपी ने नगांव से पूर्व IAS अधिकारी और नगांव के पूर्व उपायुक्त देबाशीष शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। शर्मा ने 3 सितंबर को IAS सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। इसके कुछ दिन बाद 8 सितंबर को वह बीजेपी में शामिल हुए और पार्टी ने जल्द ही उन्हें उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।
हालांकि, प्रशासनिक सेवा से सीधे चुनावी राजनीति में आने को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन ने असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष शर्मा के कार्यकाल के दौरान लिए गए कुछ चुनाव संबंधी फैसलों की जांच की मांग की है।
बीजेपी ने शर्मा के समर्थन में पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उनके समर्थन में कई रैलियां की हैं। केंद्रीय मंत्री और असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी उनके लिए प्रचार कर चुके हैं।
बीजेपी के लिए यह उपचुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी नगांव में प्रद्युत बोरदोलोई के बीजेपी में आने का राजनीतिक फायदा उठाकर लोकसभा सीट पर कब्जा करना चाहती है।
कांग्रेस की सीट बचाने की कोशिश
कांग्रेस ने पूर्व बाटद्रोबा विधायक सिबामोनी बोरा को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी का प्रयास है कि नगांव सीट पर उसका पुराना प्रभाव बरकरार रहे।
बोरा के समर्थन में असम कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई तथा धुबरी से सांसद रकीबुल हुसैन समेत कई वरिष्ठ नेता प्रचार कर चुके हैं।
कांग्रेस ने अपने प्रचार अभियान में बीजेपी सरकार पर निशाना साधने के साथ-साथ AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के चुनाव लड़ने को भी बड़ा मुद्दा बनाया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि AIUDF के मैदान में आने से विपक्षी वोटों का बंटवारा हो सकता है, जिसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है।
हालांकि, AIUDF ने इस आरोप को खारिज किया है और कहा है कि वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है।
बदरुद्दीन अजमल ने बदला चुनावी समीकरण
AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के खुद नगांव से चुनाव लड़ने के फैसले ने मुकाबले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अगर मुकाबला केवल बीजेपी और कांग्रेस के बीच होता तो चुनावी गणित अलग होता, लेकिन अजमल की मौजूदगी ने वोट बंटवारे को चुनाव का प्रमुख मुद्दा बना दिया है।
अजमल अपने प्रचार में बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर निशाना साध रहे हैं और खुद को दोनों प्रमुख दलों के विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार देबाशीष शर्मा की प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आने पर भी सवाल उठाए हैं और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर भी हमला बोला है।
2024 के लोकसभा चुनाव में AIUDF को नगांव सीट पर करीब 8.9 प्रतिशत वोट मिले थे। ऐसे में इस बार पार्टी के प्रदर्शन पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों की नजर है।
प्रचार के दौरान BJP और Congress में तीखी बयानबाजी
नगांव उपचुनाव का प्रचार केवल नीतियों और विकास के मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन के बीच व्यक्तिगत टिप्पणियों को लेकर भी काफी चर्चा हुई।
सरमा ने हुसैन पर हमला बोलते हुए उन्हें ‘बकासुर’ तक कहा और सरकारी योजनाओं के पैसों को लेकर आरोप लगाए। इसके जवाब में हुसैन ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि भगवान ने उन्हें इस दुनिया में बिरयानी खाने के लिए भेजा है।
इसके बाद सरमा ने एक रैली में इस टिप्पणी को लेकर और तीखा बयान दिया। दोनों नेताओं की बयानबाजी चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में राजनीतिक चर्चा का बड़ा हिस्सा बन गई।
AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल भी इस जुबानी जंग में शामिल हुए और उन्होंने रकीबुल हुसैन पर निशाना साधा।
कांग्रेस के प्रचार काफिले पर हमले का आरोप
चुनाव प्रचार के दौरान तनाव की एक और घटना सामने आई जब 21 सितंबर को कांग्रेस नेताओं का काफिला कथित तौर पर पत्थरों और बोतलों से निशाना बनाए जाने की बात सामने आई।
गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे बीजेपी कार्यकर्ताओं का हाथ था। उनके मुताबिक, उनके साथ पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अन्य कांग्रेस नेताओं के वाहनों को भी निशाना बनाया गया। सिबामोनी बोरा की गाड़ी को नुकसान पहुंचने की बात भी सामने आई।
हालांकि, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए इस घटना के लिए कांग्रेस के अंदरूनी गुटों को जिम्मेदार बताया।
इस घटना ने पहले से ही आक्रामक चुनाव प्रचार के बीच राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया।
प्रद्युत बोरदोलोई के बीजेपी में जाने से खाली हुई सीट
नगांव उपचुनाव की पूरी राजनीतिक कहानी कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इर्द-गिर्द घूमती है। बोरदोलोई ने नगांव लोकसभा सीट से लगातार दो बार जीत हासिल की थी और 2024 में भी उन्होंने सीट बरकरार रखी।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में बोरदोलोई को 7,88,850 वोट मिले थे। बीजेपी के सुरेश बोरा को 5,76,619 और AIUDF के अमीनुल इस्लाम को 1,37,340 वोट मिले थे।
बाद में बोरदोलोई कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए और 2026 के असम विधानसभा चुनाव में दिसपुर सीट से जीत हासिल की। इसके बाद नगांव लोकसभा सीट खाली हुई और अब यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।
9 अक्टूबर को आएगा फैसला
नगांव लोकसभा उपचुनाव का प्रचार अभियान अब समाप्त हो चुका है। बीजेपी अपने उम्मीदवार देबाशीष शर्मा के जरिए सीट जीतने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस अपने पुराने गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। वहीं बदरुद्दीन अजमल की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी कांग्रेस के इस पुराने गढ़ में सेंध लगाने में सफल होगी, या कांग्रेस अपनी सीट बचा पाएगी? साथ ही AIUDF का प्रदर्शन और उसके वोट शेयर का असर भी चुनावी नतीजे पर महत्वपूर्ण हो सकता है।
नगांव लोकसभा उपचुनाव के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।
