गोवा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर एक और मामला सामने आया है। वास्को निवासी 26 वर्षीय Sherwyn Correia का दावा है कि सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने और सुनवाई में अपना पक्ष रखने के बावजूद उनका नाम गोवा की अंतिम मतदाता सूची से हटा दिया गया। अब Correia ने अपना नाम और पुराना EPIC नंबर मतदाता सूची में बहाल कराने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ का रुख करने की तैयारी की है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब गोवा में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से हटाए गए हैं। 21 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में कुल 1,185,034 मतदाताओं में से 127,468 नाम, यानी करीब 10.76 प्रतिशत, शामिल नहीं किए गए।
2002 की SIR सूची से लिंक नहीं होने का मिला नोटिस
Correia के अनुसार उन्हें एक नोटिस मिला था, जिसमें कहा गया था कि उनके नाम को 2002 में तैयार की गई पिछली SIR मतदाता सूची से जोड़ने के लिए उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है।
नोटिस में उनके मामले को “no match/likely incorrect match” बताया गया था। इसके बाद उन्हें सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यानी AERO के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया।
Correia ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि यह केवल रिकॉर्ड मिलान से जुड़ी सामान्य गलती है और दस्तावेज दिखाने के बाद मामला आसानी से सुलझ जाएगा।
उन्होंने कहा कि नोटिस मिलने पर उन्हें आश्चर्य जरूर हुआ, क्योंकि उनके परिवार का पुराना मतदाता रिकॉर्ड मौजूद था।
मां का नाम 2002 की मतदाता सूची में था
Correia की ओर से RTI के जरिए प्राप्त किए गए उनके enumeration form की कॉपी में उनकी मां की जानकारी दर्ज थी। Correia के अनुसार उनकी मां का नाम 2002 की SIR मतदाता सूची में शामिल था।
इसके बावजूद पुराने रिकॉर्ड से उनका लिंक स्थापित नहीं माना गया और उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया।
Correia ने 15 जनवरी 2026 को सुनवाई में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अपने और अपने पिता के जन्म प्रमाण पत्र सहित कई दस्तावेज अधिकारियों के सामने पेश किए।
उनका कहना है कि उनके पिता भी 2002 की मतदाता सूची में मतदाता थे। अधिकारियों ने पेश किए गए दस्तावेजों की मूल प्रतियों से जांच की और उन्हें रिकॉर्ड पर लिया।
दस्तावेज देने के बावजूद enumeration form हुआ रिजेक्ट
Correia के मुताबिक, दस्तावेज पेश करने और सुनवाई में शामिल होने के बावजूद उनका enumeration form खारिज कर दिया गया।
रिकॉर्ड में संक्षिप्त टिप्पणी दर्ज की गई कि मतदाता सुनवाई में मौजूद था और दस्तावेज पेश किए गए, लेकिन किसी एक अभिभावक के दस्तावेज जमा नहीं किए जाने के आधार पर enumeration form को खारिज किया गया।
Correia का कहना है कि उन्हें यह फैसला उचित नहीं लगा, क्योंकि वह अपने परिवार और पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंध साबित करने के लिए दस्तावेज पहले ही जमा कर चुके थे।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने Correia के पक्ष में दिया फैसला
इसके बाद Correia ने मामले को District Electoral Officer (DEO) के सामने चुनौती दी।
20 मार्च को DEO ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। अधिकारी ने माना कि Correia ने पुराने SIR रिकॉर्ड से अपना आवश्यक संबंध स्थापित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश किए हैं। साथ ही, उन्हें उस क्षेत्र का ordinary resident यानी सामान्य निवासी होने के लिहाज से भी पात्र माना गया।
DEO के फैसले के बाद Correia को उम्मीद थी कि उनका नाम दोबारा मतदाता सूची में बहाल कर दिया जाएगा।
लेकिन उनका कहना है कि इसके बाद भी नाम तुरंत बहाल नहीं हुआ।
सॉफ्टवेयर गड़बड़ी बताकर Form 6 भरने को कहा गया
Correia के मुताबिक, उन्हें AERO की ओर से बताया गया कि सॉफ्टवेयर में तकनीकी समस्या के कारण उन्हें नया Form 6 जमा करना होगा।
Form 6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। Correia ने यह आवेदन जमा किया, लेकिन उनका आवेदन शुरुआत में खारिज कर दिया गया। बाद में इसे स्वीकार कर लिया गया।
हालांकि Correia इस प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं।
उनका कहना है कि जब DEO पहले ही उनके पक्ष में फैसला दे चुका है और पुराने रिकॉर्ड से उनका संबंध साबित हो चुका है, तो उन्हें नए मतदाता के रूप में Form 6 दाखिल करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए थी।
इसी वजह से अब वह हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।
पुराने EPIC नंबर की बहाली की मांग
Correia हाईकोर्ट से अपने नाम के साथ-साथ पुराने EPIC नंबर को भी मतदाता सूची में बहाल करने की मांग करना चाहते हैं।
उनका तर्क है कि मामला नए मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने का नहीं, बल्कि पहले से मौजूद मतदाता रिकॉर्ड को SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए जाने के बाद उसे बहाल करने का है।
उनका कहना है कि Form 6 के जरिए नया पंजीकरण कराना इस विवाद का उचित समाधान नहीं है।
गोवा में 1.27 लाख से ज्यादा नाम अंतिम सूची से बाहर
Correia का मामला गोवा में SIR के दौरान मतदाता सूची से बाहर हुए हजारों नामों के बीच सामने आया है।
21 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची के आंकड़ों के अनुसार, गोवा के कुल 1,185,034 मतदाताओं में से 127,468 नाम अंतिम सूची में नहीं थे। यह कुल मतदाताओं का 10.76 प्रतिशत है।
मतदाता सूची में इतने बड़े पैमाने पर नामों के बाहर होने के बाद SIR की प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और पुराने मतदाता रिकॉर्ड से लिंक स्थापित करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं।
गोवा में इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मतदाताओं ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम हट गए और बाद में उन्हें दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन करना पड़ा।
हाईकोर्ट में पहले भी पहुंच चुका है SIR का मामला
गोवा में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मामले को लेकर पहले भी बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में सवाल उठ चुके हैं।
ऐसे ही एक मामले में सात मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर अदालत ने निर्वाचन आयोग से प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर सवाल किए थे।
इससे यह स्पष्ट है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और पुराने रिकॉर्ड से लिंक स्थापित करने की प्रक्रिया अब न्यायिक जांच के दायरे में भी आ रही है।
निर्वाचन आयोग का कहना—कोई पात्र मतदाता छूटेगा नहीं
इस विवाद के बीच 1 अक्टूबर को गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की ओर से कहा गया कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर नहीं रहेगा।
निर्वाचन अधिकारियों की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।
हालांकि Correia का मामला इस बात पर केंद्रित है कि जब संबंधित अधिकारी पहले ही उनके पक्ष में पर्याप्त दस्तावेज और पात्रता स्वीकार कर चुके हैं, तो उनका नाम और पुराना EPIC नंबर स्वतः बहाल क्यों नहीं किया गया।
अब हाईकोर्ट के फैसले पर नजर
Correia का कहना है कि वह जल्द ही बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में रिट याचिका दाखिल करेंगे। उनकी मांग मुख्य रूप से अपने नाम और पुराने EPIC नंबर की बहाली को लेकर है।
यह मामला केवल एक व्यक्ति के मतदाता रिकॉर्ड तक सीमित नहीं माना जा रहा है, क्योंकि गोवा में SIR के बाद बड़ी संख्या में नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। ऐसे में अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि किसी पात्र मतदाता का नाम पुराने SIR रिकॉर्ड से लिंक स्थापित होने और दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध होने के बावजूद हट जाने की स्थिति में निर्वाचन अधिकारियों को किस प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
फिलहाल Correia की याचिका दाखिल होना बाकी है। इसके बाद हाईकोर्ट मामले के तथ्यों, दस्तावेजों और निर्वाचन अधिकारियों के फैसलों की समीक्षा कर आगे की दिशा तय करेगा।
