प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘Viksit Bharat Sankalp Sabha’ को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन के अनुभवों, चुनौतियों और उनसे मिली सीख को साझा किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में जिन लोगों ने उनका विरोध किया, उन्होंने उन्हें लोकतंत्र की ताकत को समझने में मदद की, जबकि उनके आलोचकों ने उन्हें खुद के भीतर झांकने और अपनी कमियों को समझने की सीख दी।
प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर Vadnagar और Varanasi में भी विभिन्न कार्यक्रम हुए। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस लंबे सफर के दौरान सामने आई कई महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख किया और बताया कि इन घटनाओं ने उनके सोचने और काम करने के तरीके को किस तरह प्रभावित किया।
‘विरोध करने वालों ने लोकतंत्र की ताकत समझाई’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में अपने राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके सार्वजनिक जीवन में जिन लोगों ने उनका विरोध किया, उनसे भी उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला।
मोदी ने कहा कि विरोध करने वाले लोगों ने उन्हें लोकतंत्र की शक्ति को समझने में मदद की। वहीं, उनके आलोचकों ने उन्हें अपने भीतर झांकने और खुद का मूल्यांकन करने की प्रेरणा दी।
प्रधानमंत्री के मुताबिक सार्वजनिक जीवन में केवल समर्थन ही व्यक्ति को आगे नहीं बढ़ाता, बल्कि आलोचना और असहमति भी व्यक्ति को बेहतर तरीके से काम करने की सीख देती है।
Bhuj earthquake से मिली बड़ी सीख
प्रधानमंत्री ने 2001 के Bhuj earthquake का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में मजबूती के साथ खड़े रहने और पुनर्निर्माण के काम में जुटे रहने की सीख दी।
गुजरात में आए इस विनाशकारी भूकंप के बाद बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण का काम किया गया था। मोदी ने इस दौर को अपने सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण सीखों में शामिल किया और कहा कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और दृढ़ता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने इस अनुभव को संकट के समय लगातार काम करते रहने और लोगों के साथ खड़े रहने की सीख के तौर पर याद किया।
Chandrayaan की असफलता से मिली आगे बढ़ने की प्रेरणा
प्रधानमंत्री ने भारत के Chandrayaan मिशन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि Chandrayaan ने उन्हें असफलता के बाद फिर से उठकर आगे बढ़ने की सीख दी।
मोदी ने कहा कि किसी भी बड़ी उपलब्धि की यात्रा में असफलताएं आ सकती हैं, लेकिन असफलता को अंतिम परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। उससे सीख लेकर आगे बढ़ना और नए प्रयास करना जरूरी है।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए उन्होंने देश के वैज्ञानिकों और उनकी मेहनत का भी उल्लेख किया।
Covid-19 ने दिखाई देश की सामूहिक शक्ति
प्रधानमंत्री ने Covid-19 महामारी के दौर को भी अपने सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण सीखों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी ने उन्हें देश की सामूहिक चेतना और लोगों की एकजुटता की ताकत का एहसास कराया।
महामारी के दौरान देश के सामने स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्तर पर बड़ी चुनौतियां थीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में देश की सामूहिक शक्ति और लोगों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण रहा।
उन्होंने इस दौरान मीडिया की भूमिका का भी उल्लेख किया। मोदी ने कहा कि मीडिया ने उन्हें कड़वे-मीठे अनुभवों के बीच आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
‘2047 तक विकसित भारत, हम करके दिखाएंगे’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत के भविष्य को लेकर अपने विजन को भी सामने रखा। उन्होंने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दोहराते हुए आत्मविश्वास के साथ कहा कि देश इस लक्ष्य को हासिल करेगा।
उन्होंने कहा, “Viksit Bharat by 2047, we will do it.”
प्रधानमंत्री ने केवल विकसित भारत के लक्ष्य की बात नहीं की, बल्कि भविष्य में भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत Olympics की मेजबानी करेगा और अंतरिक्ष में भी नई ऊंचाइयां हासिल करेगा।
मोदी का संदेश साफ था कि बड़े लक्ष्य तय करने के साथ उन्हें हासिल करने का आत्मविश्वास भी देश के भीतर होना चाहिए।
‘Olympics की मेजबानी करेंगे, अंतरिक्ष में कदम रखेंगे’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य को पूरा करेगा। इसके साथ ही उन्होंने Olympics की मेजबानी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की आगे की यात्रा को लेकर भी विश्वास जताया।
उन्होंने कहा कि देश बड़े लक्ष्यों को हासिल करने की क्षमता रखता है और आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक स्तर पर और बड़ी भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के तहत अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे, तकनीक, शिक्षा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में विकास पर जोर दे रही है।
‘मेरे लिए जनता ही भगवान है’
अपने 25 साल के सार्वजनिक जीवन को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनके लिए जनता का विश्वास सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली, वह लोगों के भरोसे की वजह से मिली।
मोदी ने कहा कि उनके लिए जनता ही भगवान के समान है और सार्वजनिक जीवन में लोगों की सेवा ही सबसे महत्वपूर्ण दायित्व है।
उन्होंने अपने राजनीतिक और प्रशासनिक सफर को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय जनता के विश्वास से जोड़ते हुए कहा कि इस यात्रा में जो भी पूंजी उन्होंने अर्जित की है, वह राष्ट्र की है।
25 साल के सार्वजनिक जीवन का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी संवैधानिक कार्यकारी भूमिका की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक गुजरात का नेतृत्व किया और 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने।
प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने 2014 के बाद से केंद्र में सरकार का नेतृत्व किया है। उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस अवधि में हासिल अनुभवों और महत्वपूर्ण घटनाओं को याद किया जा रहा है।
‘Viksit Bharat Sankalp Sabha’ में मोदी ने इसी सफर को याद करते हुए कहा कि अलग-अलग घटनाओं, सफलताओं, असफलताओं, आलोचनाओं और चुनौतियों ने उन्हें लगातार सीखने और आगे बढ़ने का अवसर दिया।
देश के भविष्य को लेकर आत्मविश्वास का संदेश
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने बार-बार आत्मविश्वास, सामूहिक शक्ति और निरंतर प्रयास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए देश को मिलकर आगे बढ़ना होगा।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्रधानमंत्री मोदी के प्रमुख विजन में शामिल है। बुधवार के संबोधन में उन्होंने इसी लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि भारत बड़े सपनों को पूरा करने की क्षमता रखता है।
प्रधानमंत्री के ‘We will do it’ संदेश में विकसित भारत के साथ-साथ Olympics की मेजबानी और अंतरिक्ष क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करने का भरोसा भी दिखाई दिया। अपने 25 साल के सार्वजनिक जीवन को याद करते हुए मोदी ने यह भी कहा कि इस यात्रा में मिली हर सीख ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।
